भूषण स्टील के अधिग्रहण से सरकार खुश, बैंकों को NPA से निबटने में मिलेगी मदद
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्ली : वित्त मंत्रालय भूषण स्टील मामले के निपटान से उत्साहित है और उसे उम्मीद है कि बैंकों को फंसे कर्ज के सभी 12 बड़े मामलों के समाधान से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे. ये वे मामले हैं जिन्हें रिजर्व बैंक ने अपनी पहली सूची में ऋण शोधन कार्यवाही के लिए भेजा […]
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नयी दिल्ली : वित्त मंत्रालय भूषण स्टील मामले के निपटान से उत्साहित है और उसे उम्मीद है कि बैंकों को फंसे कर्ज के सभी 12 बड़े मामलों के समाधान से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे. ये वे मामले हैं जिन्हें रिजर्व बैंक ने अपनी पहली सूची में ऋण शोधन कार्यवाही के लिए भेजा है. पिछले सप्ताह टाटा समूह ने कर्ज में डूबी भूषण स्टील लिमिटेड में 36,000 करोड़ रुपये में 72.65 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया.
इससे जहां फंसे कर्ज के मामले में बैंक सुदृढ होंगे वहीं उनका लाभ भी बढ़ेगा. वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने से कहा कि शेष 11 एनपीए (गैर – निष्पादित परिसंपत्ति या फंसा कर्ज) मामलों के ऋण शोधन एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) के तहत निपटारे से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आएंगे तथा बैंकों का लाभ बढ़ेगा एवं फंसा कर्ज कम होगा.
मात्र 12 खातों से 25 प्रतिशत एनपीए
पिछले साल जून में रिजर्व बैंक की आंतरिक परामर्श समिति ने 12 खातों की पहचान की है. इन खातों में बैंकों का काफी बकाया है. इन 12 खातों में जितना कर्ज बैंकों का फंसा है, वह राशि बैंकों के कुल एनपीए का 25 प्रतिशत तक बैठती है. रिजर्व बैंक के परामर्श के बाद बैंकों ने भूषण स्टील लिमिटेड, भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड, एस्सार स्टील लिमिटेड, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, लैंको इंफ्राटेक लिमिटेड, मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड, ज्योति स्ट्रक्चर्स लिमिटेड, एलेक्ट्रोस्टील स्टील्स लिमिटेड, एमटेक आटो लिमिटेड, एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लि आलोक इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड को एनसीएलटी के पास भेजा. इन सभी फंसे कर्ज के खातों में कुल मिलाकर 1.75 लाख करोड़ रुपये का बकाया है.
कई और कंपनियां है कतार में
राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (एनसीएलटी) की कोलकाता पीठ पहले ही इलेक्ट्रो स्टील स्टील्स के अधिग्रहण को लेकर वेदांता रिर्सोसेज की समाधान योजना को मंजूरी दे चुका है. इसके अलावा एनसीएलटी ने पिछले महीने ही भूषण पावर एंड स्टील के कर्जदाताओं से ब्रिटेन की लिबर्टी हाउस की बोली पर विचार करने को कहा है. भूषण पावर एंड स्टील के ऊपर बैंकों का 48,000 करोड़ रुपये बकाया है. पंजाब नेशनल बैंक ने पिछले साल जून में मामले को एनसीएलटी के पास भेजा. पिछले सप्ताह ही टाटा स्टील की पूर्णस्वामित्व वाली कंपनी बामनीपाल स्टील लिमिटेड ने 36,400 करोड़ रुपये का भुगतान कर भूषण स्टील में 72.65 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली. इसमें से 35,200 करोड़ रुपये का भुगतान वित्तीय कर्जदाताओं को दिया जायेगा
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