कोचर की बढ़ रही कठिनार्इ : वीडियोकाॅन मामले में सीबीआर्इ ने चंदा के देवर राजीव से की नौ घंटे तक पूछताछ
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Apr 2018 10:55 AM
नयी दिल्ली : वीडियोकाॅन ऋण मामले में आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक की प्रमुख चंदा कोचर आैर उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2012 में आईसीआईसीआई बैंक की आेर से वीडियोकॉन समूह को दिये गये 3,250 करोड़ रुपये के ऋण मामले में शुक्रवार को बैंक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य […]
नयी दिल्ली : वीडियोकाॅन ऋण मामले में आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक की प्रमुख चंदा कोचर आैर उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2012 में आईसीआईसीआई बैंक की आेर से वीडियोकॉन समूह को दिये गये 3,250 करोड़ रुपये के ऋण मामले में शुक्रवार को बैंक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर के देवर राजीव कोचर से करीब नौ घंटे तक पूछताछ की. अधिकारियों ने बताया कि राजीव कोचर मुंबई में सीबीआई कार्यालय में पेश हुए. उनसे वीडियोकॉन को दिये गये ऋण की रिस्ट्रक्चरिंग के विभिन्न पहलुओं पूछताछ की गयी. ‘अविस्ता एडवाइजरी’ के संस्थापक से ऋण के संबंध में वीडियोकॉन को दी गयी मदद के बारे में सवाल किया गया.
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उन्होंने बताया कि राजीव को गुरुवार को मुंबई हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था. वह किसी दक्षिण पूर्व एशियाई देश के लिए रवाना होने वाले थे. इससे पहले सीबीआई ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था. हिरासत में लिये जाने के बाद राजीव से गुरुवार को भी पूछताछ की गयी थी. अधिकारियों के मुताबिक, एजेंसी ने ऋण मामले में वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रारंभिक जांच दर्ज की है. सीबीआई आरोपों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए शुरुआती जांच कर रही है. अगर एजेंसी को प्रथम दृष्टया लगता है कि आरोपों में किसी तरह का दम है, तो वह नियमित मामला दर्ज कर सकती है.
वहीं, आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने यह माना था कि वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत को न्यूपावर बोर्ड में शामिल करना उनकी गलती थी. उन्होंने यह भी कहा कि चंदा कोचर को बोर्ड में धूत को शामिल किये जाने के बार में तब पता चला, जब उन्होंने 22 दिनों के अंदर ही बोर्ड छोड़ दिया. दीपक कोचर ने कहा कि मैंने यह कभी नहीं कहा कि धूत को कंपनी के निदेशक के रूप में आमंत्रित करना मेरी सबसे बड़ी भूल थी और मैंने इस पर सफाई देते हुए बयान भी जारी किया है. धूत के साथ कोई भी संयुक्त उपक्रम नहीं है. उन्हें डायरेक्टर के रूप में बुलाने का मकसद सौर ऊर्जा में उनका अनुभव है.
उन्होंने कहा कि धूत की आेर से कंपनी में किया गया निवेश केवल 2.5 लाख रुपये था. जब दीपक कोचर से न्यूपावर में सुप्रीम एनर्जी जैसी कंपनियों के जरिये निवेश के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मामले की जांच का हवाला देते हुए कुछ भी कहने इनकार कर दिया. वहीं, इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक अपने पुराने कदम पर कायम है कि दीपक कोचर के कारोबारी उपक्रम और चंदा कोचर की आेर से ऋण की मंजूरी देने के मामले में कोर्इ आपसी तालमेल नहीं है. बैंक ने कहा कि धूत जब 22 दिन बोर्ड के सदस्य रहे, तब वीडियोकॉन को कोई ऋण मंजूर नहीं किया गया. बैंक का कहना है कि उस समय चंदा कोचर उस समय क्रेडिट समिति में थीं. उस समय तक उन्हें बैंक की सीईओ नहीं बनाया गया था.
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