B'Day Spl: वॉचमैन से लेकर धनिया बेचने का काम कर चुके हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी, छोटे से गांव से निकल ऐसे बने बॉलीवुड के सुपरस्टार
Author : Divya Keshri Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 May 2020 8:22 AM
Nawazuddin Siddiqui -अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने शानदार अभिनय के बलबूते पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. नवाजुद्दीन आज अपना 46वां जन्मदिन मना रहे है. अभिनेता लीक से हटकर भूमिकाएं करने के लिए जाने जाते हैं. काफी लंबे समय के संघर्ष के बाद बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के सफर में नवाज ने एक से बढ़ एक भूमिकाएं निभाई. कभी चौकीदारी करने वाले नवाज को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.
Nawazuddin Siddiqui Birthday: एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने शानदार अभिनय के बलबूते पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. नवाजुद्दीन आज अपना 46वां जन्मदिन मना रहे है. अभिनेता लीक से हटकर भूमिकाएं करने के लिए जाने जाते हैं. काफी लंबे समय के संघर्ष के बाद बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के सफर में नवाज ने एक से बढ़ एक भूमिकाएं निभाई. कभी चौकीदारी करने वाले नवाज को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है. लेकिन क्या आप जानते है मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव में जन्मे एक्टर ने फिल्मी दुनिया में अपना मुकाम कैसे बनाया.
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नवाज के परिवार में आठ भाई-बहन थे. पिता किसानी करते थे इसमें घर का खर्च पूरा नहीं पड़ पाता था. इसलिए नवाज ने छोटी उम्र में ही नौकरी करनी शुरू कर दी थी. नवाज ने गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन छोटे से कस्बे में कुछ बड़ा करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे इसलिए वो दिल्ली आ गए.
नवाज कुछ बड़ा करना चाहते थे, कुछ कर दिखाने का जज्बा उनमें उबाल मार रहा था. इसलिए उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन ले लिया. लेकिन नवाज के पास रहने को घर नहीं था. इसलिए उन्होंने अपने सीनियर से कहा कि वो उन्हें अपने साथ रख लें. तो नवाज के कुछ सीनियर ने उन्हें इस शर्त पर अपने अपार्टमेंट में रहने की इजाजत दी कि वो उन्हें खाना बनाकर खिलाएंगे. नवाज तैयार हो गए और अपने सीनियर के साथ रहने लगे. 1996 में वहां से ग्रेजुएट हो गए.
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इसके बाद नवाज मुंबई आ गए थे, लेकिन दैनिक खर्च चलाने के लिए उनके पास कोई नौकरी नहीं थी. कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें एक चौकीदार की नौकरी हासिल हुई. इसके लिए उन्होंने दो हजार रुपए भी बतौर सिक्युरिटी भी जमा किए थे. इसके लिए नवाज की मम्मी ने कुछ गहने भी गिरवी रखे थे. हालांकि, नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें पैसे नहीं मिले थे.
नवाज ने एक इंटरव्यू में कहा-काम मुश्किल था. हर वक्त चौकन्ना रहना पड़ता. धूप में घंटों खड़े रहो और थोड़ी देर सुस्ता भी नहीं सकते. एक दिन, थक गया था. जमीन पर बैठकर आराम करने लगा. सिक्योरिटी कंपनी के सुपरवाइजर ने देख लिया और तुरंत नौकरी से हटा दिया. इसके अलावा नवाज धनिया बेचने तक का काम भी किया है. नवाज ने कपिल शर्मा शो में बताया था कि एक बार उन्होंने एक सब्जी वाले से 200 रुपये का धनिया खरीदा और उसे बेचने के लिए निकले. हालांकि, वह बिका नहीं और मुझे बिना टिकट सफर करन पड़ा था.
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लगभग 5 साल तक नवाज को मुंबई में संघर्ष करना पड़ा. नवाज बताते हैं मैं साधारण-सा दिखने वाला व्यक्ति उन लोगों को हीरो की तलाश रहती थी. इसलिए मुझे काम नहीं मिल पाता था. नवाज के जो दोस्त उनके साथ मुंबई गए थे वो थक-हार कर घर लौट गए, लेकिन नवाज डटे रहे. नवाज की पहली पहली सरफरोश थी. इस फिल्म में नवाज ने मुखबिर का रोल निभाया था. फिल्म ‘शूल’ में नवाज को एक वेटर का रोल दिया गया.
इसी बीच नवाज को अनुराग कश्यप की फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में काम करने का मौका मिला. उसके बाद फिराक, न्यूयॉर्क और देव डी जैसी फिल्मों में काम मिला. सुजोय घोष की ‘कहानी’ में उनका काम सराहा गया.’ फिल्म में वह विद्या बालन के साथ नजर आए थे. नवाज का मानना था कि जब उन्होंने मुंबई में एंट्री की थी तो उनके मन में जरा सा भी ख्याल नहीं आया था कि वह इतने सफल अभिनेता बन जाएंगे. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता बनने नहीं आया था बल्कि टीवी में काम करना चाहता था लेकिन किसी ने भी मुझे टीवी में काम करने का मौका नहीं दिया, इसलिए मैंने पांच-छह साल तक सी-ग्रेड फिल्मों में काम किया.’
उनकी किस्मत का सितारा तब चमका जब साल 2010 में ‘पीपली लाइव’ रिलीज हुई. इस फिल्म से नवाज फिल्ममेकर्स की नजरों में आ गए. इसके बाद तो नवाज के पास फिल्मों की झड़ी लग गई. लंबे संघर्षों के बाद ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने नवाज की जिंदगी सफलता के रास्ते पर लाकर खड़ी कर दी थी. इसके बाद तो बॉलीवुड में उनका सिक्का चलने लगा. नवाज तीनों बॉलीवुड के तीनों खान शाहरूख, सलमान और आमिर के साथ फिल्में कर चुके है.
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