बोकारो के कसमार में खतियानी महाजुटान में उमड़े लोग, बोले- 1932 के खतियान के आधार पर करे स्थानीय नीति लागू

Updated at : 03 Apr 2022 8:30 PM (IST)
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बोकारो के कसमार में खतियानी महाजुटान में उमड़े लोग, बोले- 1932 के खतियान के आधार पर करे स्थानीय नीति लागू

jharkhand news: बोकारो के कसमार क्षेत्र में खतियानी महाजुटान का आयोजन हुआ. इस मौके पर आंदोलकारी तीर्थनाथ आकाश ने कहा कि केवल 1932 का खतियान ही मूल झारखंडी होने की पहचान है. इस कारण राज्य सरकार 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करे.

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Jharkhand news: बोकारो जिला अंतर्गत कसमार प्रखंड के पुरनी बगियारी स्थित मंगलचंडी मंदिर परिसर में रविवार को झारखंडी भाषा संघर्ष समिति द्वारा खतियानी महाजुटान कार्यक्रम का आयोजन हुआ. कार्यक्रम में कसमार, पेटरवार और जरीडीह प्रखंड समेत आसपास के क्षेत्रों से काफी संख्या में खतियानी जुटे. इस दौरान 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति, नियोजन नीति और विस्थापन नीति लागू करने की मांग पर जोर दिया गया.

केवल खतियान ही मूल झारखंडी होने की पहचान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी तीर्थनाथ आकाश ने कहा कि केवल खतियान ही मूल झारखंडी होने की पहचान है. इसके अलावा कोई भी सर्टिफिकेट झारखंड का मूल निवासी होने को प्रमाणित नहीं कर सकता है. इसलिए हर हाल में सरकार को 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करना ही पड़ेगा. साथ ही कहा कि अगर राज्य सरकार ने इस मांग को हल्के में लिया, तो सरकार को न केवल सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि भविष्य में वापसी का कोई रास्ता झामुमो और गठबंधनदल के पास नहीं रह जाएगा.

किसी गलतफहमी में ना रहे राज्य सरकार

उन्होंने कहा कि सरकार इस गलतफहमी में ना रहे कि यह आंदोलन थोड़े दिनों में थम जाएगा. चाहे इसके लिए हमें 32 साल या उससे अधिक ही क्यों ना लड़ना पड़े. हम सभी झारखंडी लड़ेंगे और 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति, नियोजन नीति और विस्थापन नीति लागू करा कर ही दम लेंगे. कहा कि झारखंडियों ने अपने हक-अधिकार की हमेशा लड़ाई लड़ी है और हासिल करके भी दिखाया है. अलग राज्य का निर्माण इसका सबसे जीता जागता प्रमाण है. अगर हम लड़कर झारखंड अलग राज्य ले सकते हैं, तो 1932 का खतियान भी लेकर दिखाएंगे.

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राज्य सरकार पर भड़के खतियानी

इस मौके पर विकास महतो ने कहा कि 1932 का खतियान अगर लागू नहीं हुआ, तो सभी खतियानी आंदोलन करने को बाध्य होंगे. वहीं, अमरलाल महतो ने कहा कि हम हर हाल में 1932 का खतियान लागू कराकर ही मानेंगे. गौरीशंकर महतो ने कहा कि 1932 का खतियान की मांग करनेवालों के साथ राज्य सरकार जैसा बर्ताव कर रही वह निंदनीय है. कहा कि विधायक लोबिन हेंब्रम की रैली को बाधित करने के लिए सरकार ने आज जो कुछ भी किया, वह लोकतंत्र मे कहीं से भी सही नहीं है.

इनलोगों ने भी किया संबोधित

कार्यक्रम को प्रशांत महतो, मनोज महतो (फुसरो), सुभाष महतो, नरेश कुमार महतो, गौरीशंकर महतो, रथु महतो, आकाश टुडू आदि ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर हबीब नाज, प्रेमचंद कालिंदी, अशोक पाहन आदि ने 1932 के खतियान पर आधारित गीत प्रस्तुत किया. वहीं, कार्यक्रम के सफल आयोजन में अमरलाल महतो, भुवनेश्वर महतो, सुभाषचंद्र महतो, करण ओहदार, सुनील करमाली, कमाल हसन, अखिल महतो, पिंटू महतो, प्रशांत महतो, विनोद महतो, मिथिलेश महतो, संतोष महतो, डॉ अखिलेश्वर महतो, नरेश कुमार महतो, टिंकू अंसारी, शबीर अंसारी, सुकदेव राम, इमाम सफी आदि की अहम भूमिका रही.

रिपोर्ट : दीपक सवाल, कसमार, बोकारो.

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