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Bokaro News : टुसू हमारी परंपराओं, लोकविश्वास व सामूहिक जीवनशैली का जीवंत प्रतीक : सांसद

Updated at : 16 Jan 2026 9:47 PM (IST)
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Bokaro News : टुसू हमारी परंपराओं, लोकविश्वास व सामूहिक जीवनशैली का जीवंत प्रतीक : सांसद

Bokaro News : कसमार प्रखंड की सेवाती घाटी में तीन दिवसीय पारंपरिक टुसू मेला शुरू, उमड़ी ग्रामीणों की भीड़.

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कसमार, कसमार प्रखंड की सेवाती घाटी में झारखंड-बंगाल सीमा पर तीन दिवसीय पारंपरिक टुसू मेला शुक्रवार को शुरू हुआ. सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी व पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो ने मेला के संस्थापक स्व. रामेश्वर महतो की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उद्घाटन किया. सांसद श्री चौधरी ने कहा कि टुसू केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी परंपराओं, लोकविश्वास और सामूहिक जीवनशैली का जीवंत प्रतीक है. उन्होंने कहा कि सेवाती घाटी अब सिर्फ एक प्राकृतिक स्थल नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और गौरव बन चुकी है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि आने वाले समय में घाटी और टुसू मेले को और अधिक विकसित, सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए ठोस योजनाएं बनायी जाएंगी, ताकि यह स्थल झारखंड ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर सके. डॉ लंबोदर ने कहा कि उनके प्रयासों से सेवाती घाटी का नाम झारखंड सरकार की पर्यटन सूची में दर्ज हो चुकी है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही यहां विकास योजनाएं धरातल पर उतरेंगी. साथ ही उन्होंने सभी को टुसू पर्व की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति को सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ही सच्चा विकास है. मेले के पहले ही दिन घाटी में ग्रामीणों की भारी भीड़ रही. कसमार प्रखंड के अलावा सीमावर्ती बंगाल के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले में चिरुगोड़ा (बंगाल) के गोविंद महतो और उनकी टीम की शोभा कुमारी, रानी महतो, नीलम कुमारी, लक्ष्मी कुमारी सहित अन्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कुड़माली पाता नाच ने दर्शकों का मन मोह लिया. वहीं शशि कुमार की टीम में आये रांची एवं रामगढ़ के कलाकारों के नृत्य की प्रस्तुति दी. घाटी के झरने में टुसू विदाई मेले के दौरान सेवाती घाटी के झरने में अनेक टुसू का विसर्जन किया गया. विभिन्न गांवों की महिलाएं और युवतियां गाजे-बाजे के साथ समूह में नृत्य करती हुईं, पारंपरिक टुसू गीत गाते हुए झरने तक पहुंचीं और भावनात्मक माहौल में टुसू की विदाई की. यह दृश्य न केवल मनोहारी था, बल्कि लोक आस्था और परंपरा की जीवंत झलक भी प्रस्तुत कर रहा था. आयोजन को सफल बनाने में मेला कमेटी के अध्यक्ष उमेश कुमार मुंडा, सचिव प्रशांत कुमार महतो, कोषाध्यक्ष जयवीर कुमार महतो, संरक्षण मंडली के मनोज कुमार महतो, हीरालाल महतो, नरेश महतो, अखिलेश्वर मुंडा, सोमर महतो, रमेश महतो एवं वीरेंद्र मुंडा, सदस्य विजेंद्र महतो, भुनेश्वर महतो, जितेंद्र महतो, सरोज महतो, लालचंद महतो, परमेश्वर महतो, रमेश महतो, राकेश कुमार महतो, रंजीत मुंडा, सोमर महतो, नारायण महतो, जयनंदन महतो, बैजनाथ महतो, प्रदीप कुमार गंझू, वरुण महतो, अशोक हेंब्रम आदि का योगदान रहा. ये थे मौजूद मौके पर विधायक की पत्नी कौशल्या देवी, जिप सदस्य अमरदीप महाराज, प्रहलाद महतो एवं धनेश्वर महतो, स्थानीय मुखिया सरिता देवी, उपमुखिया उमा देवी, पूर्व मुखिया रामसेवक जायसवाल, ओम प्रकाश सहगल, आजसू नेता संतोष कुमार महतो, अशोक कुमार सिंह, उमेश कुमार जायसवाल, महेंद्र नाथ महतो, उमेश कुमार महतो, धनलाल कपरदार, उपेंद्र कुमार जायसवाल, शिक्षाविद डॉ जीतलाल महतो, पंकज कुमार जायसवाल, रूपेश कुमार महतो, चंद्रदेव चौधरी आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND KUMAR UPADHYAY

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By ANAND KUMAR UPADHYAY

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