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Bihar News: लौकहा विधानसभा में पिछड़ों का दबदबा, 2025 की लड़ाई में जेडीयू कर सकता है दावा

Updated at : 18 May 2025 11:36 AM (IST)
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Bihar News: लौकहा विधानसभा सीट पर मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन का है. यह सीट सबसे हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है. इस सीट से नीतीश सरकार में मंत्री लक्ष्मेश्वर राय एनडीए की ओर से जेडीयू के उम्मीदवार के तौर पर जीतते रहे हैं.

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Bihar News: मधुबनी. बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से एक लौकहा विधानसभा का सीट क्रमांक 40 है. यह विधानसभा मधुबनी जिले और झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस विधानसभा सीट से लक्ष्मेश्वर राय मंत्री और विधायक रहे हैं. यह सीट एनडीए के लिए बेहद अहम है. लौकहा विधानसभा सीट पर मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन का है. यह सीट सबसे हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है. इस सीट से नीतीश सरकार में मंत्री लक्ष्मेश्वर राय एनडीए की ओर से जेडीयू के उम्मीदवार के तौर पर जीतते रहे हैं. 2020 में महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्यासी भारत भूषण मंडल सामने थे. दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर में राजद के भारत भूषण ने जीत दर्ज की.

2025 में इस सीट से लड़ना चाहेगा जदयू

2015 के विधानसभा चुनाव में जनता दल युनाइटेड के लक्ष्मेश्वर राय ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रमोद कुमार प्रियदर्शी को चुनावी समर में मात दी थी. 79,971 वोट जेडीयू को पड़े थे, वहीं बीजेपी को 56,138 मत हासिल हुए थे. जीत का अंतर 23,833 था. इस चुनाव में कुल 59 फीसदी लोगों ने वोट किया था. 14 लोग चुनावी महासमर में उतरे थे, जिनमें से 3 महिलाएं थीं. 12 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. 2015 में जेडीयू भी महागठबंधन का हिस्सा थी, हालांकि महागठबंधन टूट गया और नीतीश कुमार वापस अपने साथी एनडीए की ओर लौट गए. जाहिर तौर पर समीकरण अब उनके पक्ष में और मजबूत होंगे.

1951 में हुई थी पहली बार वोटिंग

लौकहा विधानसभा सीट पर पहली बार वोटिंग 1951 में हुई. 1951 से 57 तक यह सीट कांग्रेस के खाते में रही. फिर पीएसपी को 1962 में जीत मिली. 1967 में कांग्रेस की एक बार फिर वापसी हुई. अगले चुनाव में सीपीआई ने कब्जा जमाया. 90 के दशक में सीपीआई का दबदबा रहा और 1990 और 1995 में लगातार सीपीआई के लाल बिहारी यादव चुनाव जीतते रहे. अब तक 16 बार इस सीट पर चुनाव हो चुके हैं. इस सीट पर 2005 से ही जनता दल यूनाइटेड का कब्जा बरकरार था. 2005 में हरि प्रसाद साह, फिर 2010 में भी हरि प्रसाद साह विजयी हुए. उन्होंने आरेजडी के चितरंजन प्रसाद यादव को मात दी थी.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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