टिकट नहीं तो विद्रोह! बागी उम्मीदवार बिगाड़ेंगे NDA और महागठबंधन का खेल, दर्जनों नेता टक्कर देते आयेंगे नजर
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 17 Oct 2025 6:37 PM
तेजस्वी यादव के साथ समाजवादी नेता शरद यादव के पुत्र शांतनु यादव
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन समाप्त होते ही राजनीतिक दलों में बगावत खुलकर सामने आ गई है. भाजपा, जदयू, राजद और कांग्रेस समेत सभी दलों में टिकट बंटवारे से नाराज नेताओं ने पार्टी लाइन छोड़ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोंक दी है.
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन की समय सीमा शुक्रवार को खत्म हो गयी, लेकिन राजनीतिक दलों में बगावती तेवर कम नहीं हो रहे. सभी दलों में ऐसे बगावती उम्मीदवार सामने आये हैं. भाजपा में दर्जन भर ऐसे नेता हैं, जिन्होंने टिकट कटने के बाद पार्टी के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया है. जदयू, कांग्रेस और राजद में भी ऐसी लंबी फेहरिस्त है. वाम दलों में सीटों की किल्लत है. इनकी शिकायत महागठबंधन के सबसे बड़े दल राजद से है, जिसने अपने पास सबसे अधिक सीटें रखी हैं.
जदयू में बागी हुए कई नेता, निर्दलीय ठोंका ताल
एनडीए में जदयू को 101 सीटें मिली हैं. उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही कुछ नेताओं के बागी तेवर सामने आये हैं. ये वैसे नेता हैं, जिन्हें जदयू की उम्मीदवारी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सूची में नाम नहीं आया. अब ऐसे अधिकतर नेताओं ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है.
ऐसे नेताओं में पूर्व मंत्री और दिनारा से विधायक रहे जय कुमार सिंह, पूर्व मंत्री और जमालपुर से विधायक रहे शैलेश कुमार, गोपालपुर के विधायक रहे गोपाल मंडल, बरबीघा के विधायक रहे सुदर्शन कुमार, सिकटा के पूर्व विधायक खुर्शीद आलम व वरिष्ठ नेत्री आसमां परवीन प्रमुख हैं. इन सभी ने पार्टी नेतृत्व पर कई आरोप लगाये हैं.
आसमां परवीन पूर्व मंत्री इलियास हुसैन की बेटी हैं. उन्हें 2020 में जदयू ने महुआ से उम्मीदवार बनाया था. इस बार यह सीट लोजपा को चली गयी. इसी तरह जय कुमार सिंह की सीट दिनारा रोलोमो के कोटे में चली गयी है़ वहीं, शैलेश कुमार, गोपाल मंडल, सुदर्शन कुमार व खुर्शीद आलम का टिकट काट दिया गया है. इन सभी ने निर्दलीय लड़ने का एलान किया है. आसमां परवीन ने महुआ से नामांकन कर दिया है. गोपाल मंडल ने तो यहां तक कहा है कि यदि वह निर्दलीय चुनाव जीत जायेंगे, तो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू का ही समर्थन करेंगे.
भाजपा नेताओं के बगावती सुर बनी बड़ी चुनौती
एनडीए में भाजपा को भी 101 सीटें मिली हैं, जबकि पार्टी में चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वालों की संख्या तीन हजार से अधिक थी. पार्टी ने 17 मौजूदा विधायकों के टिकट भी काटे हैं. सबसे अधिक विरोध मुजफ्फरपुर के औराई विधायक और पूर्व मंत्री राम सूरत राय का है. उनके समर्थकों ने भाजपा कार्यालय का घेराव किया है.
अलीनगर सीट से उम्मीदवार बनी चर्चित गायिका मैथिली ठाकुर को लेकर भी स्थानीय कार्यकर्ता एकजुट नहीं हैं. मौजूदा विधायक मिश्रीलाल यादव जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ने का एलान कर चुके हैं. अन्य जिलों में भी भाजपा के लिए हालात कम चुनौतीपूर्ण नहीं हैं.
रोहतास और औरंगाबाद से संगठन के बड़े चेहरे तैयारी कर रहे थे. बक्सर से भाजपा के एक कार्यकर्ता ने टिकट मांगा था, लेकिन उनकी जगह एक पूर्व आइपीएस अधिकारी को उतार दिया गया. इससे जिला कमेटी के लोगों में नाराजगी है.
भागलपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे और वरिष्ठ नेता प्रशांत विक्रम निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं. छपरा की पूर्व मेयर राखी गुप्ता ने भाजपा से नाराज होकर निर्दलीय मैदान में उतरने का एलान किया है.
गोपालगंज की विधायक कुसुम देवी ने बगावती तेवर दिखाये हैं. महाराजगंज में भाजपा एमएलसी सच्चिदानंद राय ने खुलेआम विद्रोह का एलान किया है. सहयोगी दलों को सीट चलने जाने के बाद बरौली के विधायक रामप्रवेश राय व पारू के विधायक अशोक कुमार सिंह ने भी बगावत कर दिया है.
पूर्वी चंपारण जिले की ढाका सीट से भाजपा के पूर्व नेता लाल बाबू प्रसाद जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार हैं. अररिया सीट से टिकट नहीं मिलने पर भाजपा नेता अजय झा फूट-फूट कर राेये.
राजद में दर्जन भर से अधिक बागी
राजद में भी बगावती तेवर कम नहीं हो रहे. सीतामढ़ी में पूर्व मंत्री रंजू गीता की नाराजगी चरम पर है. वह निर्दलीय चुनाव लड़ने को तैयार हैं. भोजपुर की बड़हरा सीट से पूर्व विधायक सरोज यादव ने गुरुवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं पर गंभीर आरोप लगाया है.
लालगंज से राजद ने मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवांगी शुक्ला को उम्मीदवार बनाया था. कांग्रेस भी वहां से अपना उम्मीदवार उतार दिया है. सारण की तरैया सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज मिथिलेश यादव दल के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ आग उगल रहे हैं.
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कांग्रेस में पुराने नेताओं को नहीं मिली तवज्जो
कांग्रेस इस बार के चुनाव में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रही है, यह दल के शीर्ष नेता भी नहीं बता पा रहे हैं. नामांकन की समय सीमा खत्म होने के कुछ घंटे पहले पार्टी ने 48 उम्मीदवारों की पहली सीट जारी की. इसमें तीन मौजूदा विधायकों के टिकट काट कर उनकी जगह नये उम्मीदवार दिये गये हैं. पटना शहर की सीटों के अलावा कई जगहों पर चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. मसलन, शुक्रवार की दोपहर कांग्रेस ने दरभंगा जिले के जाले की सीट पर राजद नेता ऋषि मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है.
पटना की बांकीपुर सीट से दल ने नये उम्मीदवार के नाम की घोषणा की, जबकि नामांकन के एक दिन पहले दोपहर तक पार्टी के तीन नेता टिकट मिलने की आस में नामांकन पत्र का फॉर्म खरीदते देखे गये. पार्टी की 49 सीटों में 19 सीटों पर सवर्ण उम्मीदवार उतारे गये हैं.
इनमें आठ भूमिहार, पांच राजपूत, छह ब्राह्मण उम्मीदवार बनाये गये हैं. चार मुस्लिम और पांच महिला उम्मीदवार दिये गये है. कांग्रेस ने पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग से 17 उम्मीदवार दिये, जबकि एससी कोटे से 10 प्रत्याशी मैदान में उतारे गये हैं. कांग्रेस की दूसरी सूची आनी अभी बाकी है.
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शरद यादव के बेटे शांतनु को नहीं मिला टिकट
मधेपुरा के पूर्व सांसद समाजवादी नेता शरद यादव के पुत्र शांतनु यादव को राजद ने मधेपुरा से टिकट नहीं दिया है. शांतनु यादव ने गुरुवार की देर रात पटना आकर तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी. नाराज शांतनु ने अपने औपचारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि मेरे खिलाफ राजनीतिक षणयंत्र हुआ. समाजवादी की हार हुई. लोकसभा चुनाव के दौरान शांतनु यादव ने अपनी पूरी पार्टी के साथ राजद में विलय किया था. उन्हें उम्मीद थी कि लोकसभा में टिकट दिया जायेगा. तब भी वह निराश हुए थे. अब विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से वह बेहद निराश होकर लौट गये हैं.
शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव ने अपने भाई को समर्थन दिया है. उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव को अपने ट्वीट में टारगेट पर लिया है. उन्होंने कहा, “जो अपने खून के नहीं हुए, वो दूसरों के क्या सगे होंगे. जो अपने ही परिवार के वफादार नहीं, वो किसी और के लिए कैसे भरोसेमंद हो सकते हैं?” उन्होंने कहा कि विश्वासघात की पराकाष्ठा और उनकी असहजता का उत्कृष्ट उदाहरण है. जो षड्यंत्र उन्होंने रचा है, अब वही षड्यंत्र इनके खिलाफ जनता रचेगी.
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कांग्रेस ने नहीं छोड़ी बछवाड़ा सीट तो भाकपा ने ये किया
महागठबंधन में शामिल कांग्रेस ने बछवाड़ा सीट पर भाकपा प्रत्याशी के सामने अपना भी प्रत्याशी उतार दिया है. इसके बाद भाकपा ने शुक्रवार को कांग्रेस की तीन सीटाें पर भाकपा ने उम्मीदवार उतार दिये और उन्होंने नामांकन भी कर दिया है. भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडे ने कहा कि बछवाड़ा सीट भाकपा की है. जब इस सीट पर कांग्रेस ने नामांकन कराने की बात थी, तो हमने महागठबंधन की समन्वय समिति के समक्ष आपत्ति की थी.
इसके बावजूद कांग्रेस ने बछवाड़ा में नामांकन कराया. इसके कारण शुक्रवार को पार्टी के निर्णय पर बिहारशरीफ से शिव कुमार यादव, राजापाकड़ से मोहित पासवान और रोसड़ा से लक्ष्मण पासवान ने नामांकन करा है. दूसरे चरण में कम-से-कम कांग्रेस की 12 से अधिक सीटों पर हमारे उम्मीदवार नामांकन करेंगे. वहीं, दूसरी ओर वैशाली और लालगंज सीट पर कांग्रेस और राजद दोनों ने उम्मीदवार उतारे हैं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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