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Bhor : भोरे विधानसभा सीट पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को मिलेगी कड़ी चुनौती

Updated at : 11 Jul 2025 12:47 PM (IST)
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Bhor : भोरे विधानसभा सीट पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को मिलेगी कड़ी चुनौती

Bhor : भोरे विधानसभा सीट पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को मिलेगी कड़ी चुनौती

Bhore Vidhan Sabha Chunav 2025 : भोरे विधानसभा सीट पर जेडीयू के सुनील कुमार 462 वोटों से जीते थे. सुनील कुमार को 74067 वोट मिले थे.वहीं दूसरे नंबर पर सीपीआई (एम) (एल) के जितेंद्र पासवान थे, जिन्हें 73605 वोट मिले थे.

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Bhore Vidhan Sabha Chunav 2025 : भोरे विधानसभा सीट, गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत है, जिसका राजनीतिक इतिहास विविध दलों से जुड़ा रहा है। वर्तमान विधायक और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार (जेडीयू) ने डेयरी प्लांट, अस्पताल, पुल, कॉलेज, सड़क और बस सेवा जैसी कई विकास योजनाएं शुरू की हैं। शिक्षा योजनाओं के तहत हज़ारों छात्रों को साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति दी गई है। यहां रविदास, कोइरी, मुस्लिम और यादव मतदाता निर्णायक हैं। पिछली बार जेडीयू और लेफ्ट उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर हुई थी, जिससे 2025 में फिर कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है और मंत्री की साख भी दांव पर है।

भोरे विधानसभा सीट का इतिहास

भोरे विधानसभा सीट गोपालगंज लोकसभा के तहत आता है. 1957 में इस सीट पर हुए पहले विधानसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के कैंडिडेट रामबली पांडे ने जीत हासिल की थी. वहीं 1957 में हुए चुनाव में भी गोपालगंज सीट से कांग्रेसी कैंडिडेट कमला राय ने अपनी जीत बरकरार रखी थी. 1962,1967,1969 और 1972 में यहां से कांग्रेस की टिकट पर राजमंगल मिश्रा ने लगातार चार बार जनता का समर्थन जीत लिया था. 1977 में भोरे सीट से जनता पार्टी के कैंडिडेट जमुना राम ने सभी विरोधियों को मात देने में कामयाबी हासिल की थी. वहीं 1980 में भोरे सीट पर कांग्रेसी कैंडिडेट अलगू राम ने जीत हासिल की थी.

1985 में भोरे सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेसी कैंडिडेट अनिल कुमार ने जनता का समर्थन हासिल कर लिया था. 1990 और 1995 में भोरे सीट से जनता दल के टिकट पर इंद्रदेव मांझी ने विरोधियों को मात दे दिया था. वहीं 2000 के विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी कैंडिडेट आचार्य विश्वनाथ बैठा ने जीत हासिल की थी. 2005 में भोरे सीट से आरजेडी कैंडिडेट अनिल कुमार ने जीत हासिल की थी. वहीं 2010 में बीजेपी के टिकट पर इंद्रदेव माझी ने एक बार फिर भोरे सीट पर जीत का परचम लहरा दिया था. 2015 में यहां से कांग्रेसी कैंडिडेट अनिल कुमार ने जीत हासिल की थी. वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां जेडीयू कैंडिडेट सुनील कुमार ने बाजी पलट दिया था. अभी सुनील कुमार बिहार के शिक्षा मंत्री हैं. इसलिए इस बार उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है.

विकास कार्य से जीत का भरोसा

भोरे विधानसभा सीट के विधायक शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जारी किया. उन्होंने 1 लाख लीटर क्षमता का सुधा डेयरी प्लांट, एक ग्रिड उपकेन्द्र, नादियों पर 6 नए पुलों के निर्माण कार्य की स्वीकृत, भोरे और कटेया में नए अस्पताल भवनों का निर्माण, विधान सभा क्षेत्र में 10 नए स्वास्थ्य उप केंद्र खोलने की स्वीकृति, बीपीएस कांलेज भोरे में स्नातक स्तर पर विज्ञान की पढ़ाई की स्वीकृति दिलाई है.
रिपोर्ड कार्ड के अनुसार मुफ्त साइकिल योजना के तहत 24376 छात्रों के बीच 72.13 करोड़ की राशि का वितरण, पोशाक योजना के तहत 189907 छात्रों के बीच 11.94 करोड़ रुपए की राशि वितरित किए गए. छात्रवृत्ति योजना के तहत 217783 छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित किया गया. सड़क क्षेत्र में भोरे मीरगंज पथ, कटेया बाईपास, मीरगंज बाइपास, बैरिया बाईपास का निर्माण कराया गया है. पगरा और कटेया से पटना के लिए सीधी बस सेवा शुरू की गई है. सड़क चौड़ी कर सार्वजनिक सुविधा के लिए पड़ाव, प्रतीक्षालय और नए शौचालयों का निमार्ण भी कराया गया है.

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भोरे विधानसभा सीट पर रविदास और कोइरी जाति के मतदाताओं की संख्या 30 फीसदी से अधिक है. वहीं यहां मुस्लिम और यादव वोटरों की भी अच्छी खासी संख्या है. पिछली बार जेडीयू और लेफ्ट कैंडिडेट के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. इसलिए इस बार दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला होना तय है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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