भागलपुर मौसम: बरसे बादल तो खेतों में जमा होने लगा पानी, बारिश देख खिले किसानों के चेहरे
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 Jun 2023 3:29 AM
आद्रा में बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. खेतों में पानी जमने लगा तो उनकी उम्मीद जग गयी और वे खेतों पर बिचड़ा लगाने निकल पड़े. कृषि विभाग की ओर से आंकड़े के अनुसार अब तक जिले में 90 फीसदी तक बिचड़ा का काम हो गया होता, लेकिन सुखाड़ के कारण मात्र 15 फीसदी ही बिचड़ा का काम हो पाया.
भागलपुर: रोहिणी, मृगशिरा नक्षत्र गुजर जाने के बाद आद्रा में बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. खेतों में पानी जमने लगा तो उनकी उम्मीद जग गयी और वे खेतों पर बिचड़ा लगाने निकल पड़े. कृषि विभाग की ओर से आंकड़े के अनुसार अब तक जिले में 90 फीसदी तक बिचड़ा का काम हो गया होता, लेकिन सुखाड़ के कारण मात्र 15 फीसदी ही बिचड़ा का काम हो पाया. जून माह में 47 एमएम बारिश हुई, जबकि 170 एमएम की जरूरत थी. दो दिन के अंदर 22 एमएम बारिश होने की संभावना जतायी गयी है.
जिले के धान उत्पादक नौ प्रखंडों सबौर, गोराडीह, शाहकुंड, सन्हौला, पीरपैंती, जगदीशपुर, नाथनगर, कहलगांव व सुल्तानगंज में खासकर किसान खेतों पर निकलने लगे. नाथनगर कजरैली के गुंजेश गुंजन ने बताया कि धान की खेती के साथ ककोड़ी की खेती करने में जुटे हैं. इसमें कम पानी में भी अधिक मुनाफा है. शाहकुंड के किसान शिरोमणि कुमार ने बताया कि खरीफ फसल के तहत धान का बिचड़ा गिरा रहे हैं.
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जिला कृषि पदाधिकारी अनिल यादव ने बताया कि भागलपुर जिले में किसान आद्रा नक्षत्र में बिचड़ा डालते हैं. ऐसे में यदि बारिश शुरू हुई है, तो किसानों और इस क्षेत्र के लिए खुशखबरी है. मक्के की फसल के लिए यह बारिश अमृत के समान है. बारिश के बाद मक्के के पौधे सलामत रहे और उपज अच्छी दें, इसलिए खाद छिड़का जा रहा है.
जगदीशपुर के किसानों ने बताया कि बिचड़ा का समय मई आखिरी सप्ताह में शुरू हो जाता है. सुखाड़ के कारण बोरिंग से सिंचाई करके बिचड़ा डाला गया था, लेकिन उसे बचाना मुश्किल हो गया. अभी का बारिश अमृत समान है. अधिकतर किसानों की जीरो टिलेज-बॉग विधि से सीधी बोआई के तहत धान की खेती करने की योजना है.
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जिले के धान उत्पादक नौ प्रखंडों समेत अन्य प्रखंडों में 52 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. पिछले वर्ष सुखाड़ के कारण किसान चिंतित हैं. हजारों किसान बारिश नहीं होने से परेशान थे, लेकिन मौसम में बदलाव के बाद किसानों में उम्मीद जगी है कि समय पर धान की खेती हो जायेगी.
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