आधा भारत नहीं जानता गाड़ियों के पीछे क्यों भागते हैं कुत्ते, जान जाएगा तो रेस नहीं लगाएगा

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Why Dogs Chase

Why Dogs Chase: रात की सड़कों पर गाड़ियों का पीछा क्यों करते हैं कुत्ते?

Why Dogs Chase: क्या आपने कभी सोचा है कि कुत्ते रात में कार-बाइक के पीछे क्यों दौड़ते हैं? शिकार का जुनून, इलाके की बादशाहत और बोरियत, जानिए चौंकाने वाली सच्चाई!

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Why Dogs Chase: रात के सन्नाटे में अचानक भौंकते-दौड़ते कुत्ते आपकी गाड़ी के पीछे लग जाएं तो डर लगता है ना? हर गली-मोहल्ले में यही ड्रामा चलता है. लोग सोचते हैं- पागल हो गए हैं क्या? मगर विज्ञान कुछ और ही कहानी सुना रहा है. दरअसल, कुत्तों का सड़क पर गाड़ियों के पीछे भागना एक सामान्य व्यवहार है, जो उनके प्राकृतिक इंस्टिंक्ट्स से जुड़ा हुआ है. यह दिन में भी होता है, लेकिन रात में ज्यादा नजर आता है क्योंकि तब ट्रैफिक कम होता है, कुत्ते ज्यादा सक्रिय रहते हैं, और उनकी इंद्रियां (जैसे सुनने और देखने की क्षमता) ज्यादा तेज हो जाती हैं. अब बात करें वैज्ञानिक कारण की, तो यह मुख्य रूप से उनके विकासवादी इतिहास से जुड़ा है:

खून में दौड़ता जंगली शिकार का जुनून (Why Dogs Chase)

भेड़िए के खानदान का लड़का है जनाब! हेडलाइट की चमक देखी नहीं कि लगता है कोई हिरण भाग रहा है. इंजन गरजा नहीं कि दिल में आग लग जाती है- पकड़ लो आज तो! रात में ये जंगली आग और भड़कतीहै.

Why Dogs Chase: ये मेरी गली, मेरी सड़क, कोई नहीं गुजरेगा!

टायर पर पेशाब करके अपना नाम-पता लिख देता है.गाड़ी चली तो उसकी खुशबू उड़ने लगी- बस फिर क्या, कुत्ता गुस्से में लाल! सोचता है- मेरा इलाका लूट रहा है कोई! और पीछे पड़ जाता है.

रात का अकेलापन और चलो रेस लगाएं यार वाला मूड (Why Dogs Chase – Reason)

दिन भर सोया, रात में फुल एनर्जी. बोर हो रहा है तो गाड़ी दिखी नहीं कि दिमाग में बल्ब जल उठा- आज तो मस्ती करेंगे! खासकर भेड़ पालने वाली नस्लों को तो बड़ा मजा आता है कार हांकने में.

Reason for Why Dogs Chase: स्पीड का चक्कर, दिमाग हैंग और अरे रुक जा भाई वाला सीन

गाड़ी धीरे है तो सोचता है आसान शिकार, जैसे ही आपने एक्सीलेटर मारा, कुत्ते का दिमाग क्रैश! अब तो पीछे लगेगा ही लगेगा. कभी डर, कभी घबराहट, कभी ट्रेनिंग ना मिली, इसलिए बस दौड़ता रहता है.

तो अगली बार गुस्सा मत करना भाई…

ये कोई दुश्मनी नहीं, बस पुरानी फितरत है. हॉर्न बजाने या तेज भागने से और उकसताहै. बस धीरे निकल जाओ, दो मिनट में थक के बैठ जाएगा. मुस्कुराओ और चलते बनो!

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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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