India's Slowest Train: क्या आपको पता है भारत की सबसे धीमी ट्रेन का नाम? सिर्फ 9 km तय करने में लग जाते हैं 1 घंटे

Published by : Ankit Anand Updated At : 05 Dec 2025 11:47 AM

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India Slowest Train: भारत की सबसे धीमी ट्रेन मेट्टुपालयम-ऊटी नीलगिरि पैसेंजर

India's Slowest Train: दक्षिण भारत की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच एक पुरानी लेकिन खूबसूरत ट्रेन अब भी धीरे-धीरे चलती रहती है. इतनी धीमी कि शहरों में साइकिल चलाने वाले भी इससे तेज निकल जाएं. यह ट्रेन नीलगिरी माउंटेन रेलवे से गुजरती है, जो और मेट्टुपलायम से ऊटी तक का पांच घंटे का खूबसूरत सफर पेश करती है.

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India’s Slowest Train: फास्ट स्पीड ट्रेनों के दौर में, दक्षिण भारत की धुंध भरी पहाड़ियों के बीच एक पुरानी लेकिन खूबसूरत ट्रेन अब भी धीरे-धीरे चलती रहती है. इतनी धीमी कि शहरों में साइकिल चलाने वाले भी इससे तेज निकल जाएं. करीब 9 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली मेट्टुपालयम–ऊटी नीलगिरि पैसेंजर देश की सबसे धीमी ट्रेन है. इसे ऊटी टॉय ट्रेन के नाम से भी जाना जाता है. लेकिन यही धीमी चाल हर साल हजारों टूरिस्टों को अपनी ओर खींच लाती है. आइए जानते हैं इस ट्रेन से जुड़ी कुछ रोचक बातें. 

1908 में शुरू हुई थी भारत की सबसे धीमी ट्रेन

1854 में इसका प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन नीलगिरि माउंटेन रेलवे (NMR) को हकीकत बनने में लगभग पांच दशक लग गए. मुश्किल पहाड़ी इलाकों और इंजीनियरिंग चुनौतियों से लड़ते हुए इसका काम 1891 में शुरू हुआ, और 1908 तक यह मीटर-गेज की सिंगल-ट्रैक लाइन तैयार हो गई. तमिलनाडु की इन नीली पहाड़ियों में बनी यह रेल लाइन मेहनत और जज्बे की एक अनोखी मिसाल है.

UNESCO के Mountain Railways of India हेरिटेज समूह का हिस्सा मानी जाने वाली नीलगिरि रेलवे, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और कालका-शिमला रेलवे की तरह ही अपनी शानदार इंजीनियरिंग और यात्रियों को मिलने वाले पुराने जमाने के रोमांस के लिए मशहूर है.

लगभग 5 घंटे में पूरा करती है 46km का सफर 

मेट्टुपालयम से ऊटी (उधगमंडलम) तक की 46km की यह यात्रा लगभग पांच घंटे लेती है. यानि सबसे तेज वंदे भारत एक्सप्रेस से करीब 18 गुना धीमी. लेकिन इसके नीले रंग के आइकॉनिक डिब्बों में सफर कर रहे यात्रियों के लिए समय जैसे थम सा जाता है, क्योंकि खिड़कियों के बाहर धुंध से ढकी घाटियां, ऊंचे नीलगिरि के जंगल और सीढ़ीनुमा ढलानें धीरे-धीरे गुजरती रहती हैं.

किन-किन जगहों से गुजरती है ये ट्रेन 

मैदानों से ऊपर चढ़ते हुए यह रूट तेजी से ऊंचाई पकड़ता है और कल्लर, कुनूर, वेलिंगटन, लवडेल होते हुए आखिर में ऊटी (Ootacamund) तक पहुंचता है. इस पूरी चढ़ाई के दौरान ट्रेन 208 मोड़ों से गुजरती है, 250 पुलों को पार करती है और 16 सुरंगों में घुसकर फिर बाहर निकलती है. हर पल नीलगिरि की पहाड़ियों को एक सुंदर पोस्टकार्ड जैसा बना देता है. वापसी की ढलान में उतना जोर नहीं लगता, क्योंकि रैक-एंड-पिनियन सिस्टम पर लोड कम होता है, इसलिए वापसी का सफर करीब एक घंटे तेज हो जाता है.

प्रभात खबर पॉडकास्ट में रवि शास्त्री 7 दिसंबर को

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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