इंजन के पावर को नापने का पैमाने को CC क्यों कहते हैं? क्या होता है BHP और RPM
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 02 May 2024 2:28 PM
इंजन की पावर को मापने के पैमाने को सीसी क्यों कहते हैं. फोटो: सोशल मीडिया
Engine power CC: किसी भी गाड़ी के इंजन की पावर को सीसी से मापा जाता है. ट्रांसमिशन या गियरबॉक्स, अल्टरनेटर और वाटर पंप के काम करने के साथ ही फ्रिक्शन (घर्षण) के कारण पावर लॉस होने के बाद गाड़ी के बचे हुए पावर को बीएचपी कहते हैं.
Engine power CC: जब आप किसी शोरूम से कार, मोटरसाइकिल या कोई दूसरी गाड़ी खरीदने जाते हैं तो सबसे पहले क्या देखते हैं? दाम देखते हैं माइलेज या फिर इंजन और फीचर्स? लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाड़ी के इंजन की पावर को मापने का पैमाने को क्या कहते हैं? नहीं जानते हैं, तो हम आपको बता देते हैं. गाड़ी के इंजन को मापने के पैमाने को सीसी कहा जाता है. अब यह जानना चाहेंगे कि ये कौन सी चीज है. तो, बताते चलें कि आज हम आपको गाड़ी के मूवमेंट को बनाए रखने में अहम रोल निभाने वाले इंजन को माने वाले पैमाने सीसी (CC) के साथ-साथ बीएचपी (BHP), आरएमपी (RMP) और टॉर्क के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं. आइए उनको जानते हैं.
क्या होता है इंजन की पावर मापने का पैमाना
किसी भी कार के इंजन की पावर को सीसी से मापा जाता है. इस सीसी को क्यूबिक कैपिसिटी कहा जाता है. इस क्यूबिक कैपिसिटी की खासियत यह है कि यह जितनी अधिक होगी उसका सिलिंडर भी उतना ही बड़ा होगा. सामान्य गाड़ियों के मुकाबले अधिक सीसी वाली गाड़ियों में ईंधन और हवा को कंज्यूम करने की क्षमता अधिक होती है. इस प्रकार की गाड़ियां अधिक पावर जेनरेट करने में सक्षम होती हैं. इसका असर बढ़े हुए टॉर्क और बीएचपी के तौर पर दिखाई देता है.
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तुरंत रफ्तार पकड़ लेती हैं अधिक सीसी वाली गाड़ियां
मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक क्यूबिक कैपिसिटी वाली गाड़ियों को रफ्तार पकड़ने में देर नहीं लगती. एक्सीलेरेटर दबाते ही फट से तेज रफ्तार पकड़ लेती हैं. स्पोर्ट्स कार या फॉर्मूला वन रेसिंग वाली कारें फटाक से तेज रफ्तार पकड़ लेती हैं. उनके रफ्तार पकड़ने में इसी क्यूबिक कैपिसिटी का रोल होता है. यह बात दीगर है कि अधिक क्यूबिक कैपिसिटी वाली गाड़ियों के इंजन में ईंधन की खपत भी ज्यादा होती है. इसलिए इन गाड़ियों की माइलेज सामान्य गाड़ियों के मुकाबले कम होती है.
क्या होता है बीएचपी
बीएचपी का फुलफॉर्म ब्रेक हॉर्स पावर होता है. इसका संबंध इंजन की स्पीड से होता है. गाड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने वाली पावर को ब्रेक हॉर्स पावर या बीएचपी कहते हैं. दूसरे शब्दों में कहें, तो ट्रांसमिशन या गियरबॉक्स, अल्टरनेटर और वाटर पंप के काम करने के साथ ही फ्रिक्शन (घर्षण) के कारण पावर लॉस होने के बाद गाड़ी के बचे हुए पावर को बीएचपी कहते हैं.
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आरपीएम कैसे करता है काम
रिवॉल्यूशन प्रति मिनट को संक्षेप में आरपीएम कहते हैं. इंजन में लगा हुआ क्रैंकशॉफ्ट एक मिनट में जितनी पर रोटेट या रिवॉल्व होता है, उसे ही आरपीएम कहा जाता है. इसके अलावा, गाड़ी के इंजन का पिस्टन 1 मिनट में जितनी बार ऊपर नीचे आता जाता है, उसे भी आरपीएम के तौर पर दर्शाया जाता है. अधिक आरपीएम होने का मतलब इंजन में ज्यादा पावर जनरेट होगा. इंजन जो भी पावर बनेगा, वह गियर के सहारे पहियों तक पहुंचेगा. इससे ही गाड़ी की स्पीड बढ़ती है. हालांकि, इस प्रक्रिया में ईंधन की खपत भी ज्यादा होती है. आरपीएम और गियर शिफ्टिंग के बीच एक जुड़ाव होता है. अधिक आरपीएम पर गाड़ी को कम गियर में चलाने पर इंजन पावर को जनरेट करेगा, लेकिन गाड़ी रफ्तार नहीं पकड़ेगी.
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टॉर्क का मतलब क्या है
ट्विस्टिंग फोर्स को टॉर्क कहा जाता है. टॉर्क को मापने के न्यूटन मीटर का इस्तेमाल किया जाता है. इसी न्यूटन मीटर को संक्षेप में एनएम भी कहा जाता है. यह न्यूटन मीटर रिवॉल्यूशन प्रति मीटर पर काम करता है. भौतिक शास्त्र के सिद्धांत के अनुसार, इस फोर्स का इस्तेमाल किसी वस्तु को मोड़ने या घुमाने के लिए किया जाता है. टॉर्क के आंकड़ों के जरिए यह बताना आसान हो जाता है कि इंजन में गाड़ी को खींचने की ताकत कितनी है. आम तौर पर गाड़ी स्टार्ट करने के बाद एक्सिलेरेट करते वक्त एक फोर्स जनरेट होता है. इस फोर्स की मदद से ही इंजन गाड़ी को खींच पाती है. इस दौरान जो हल्का सा झटका महसूस होता है, उसे ही टॉर्क स्पीड कहा जाता है. भारी गाड़ियों को रफ्तार देने के लिए ज्यादा टॉर्क की जरूरत पड़ती है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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