EV ने कैसे दिया 89 kmpl का माइलेज? जानिए वह गणित जिसने पेट्रोल कारों को पीछे छोड़ दिया

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 02 Jun 2026 4:25 PM

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इलेक्ट्रिक व्हीकल / एआई इमेज

एक लीटर पेट्रोल के बराबर ऊर्जा पर 89 किलोमीटर तक चलने वाली EV ने सभी को चौंका दिया है. जानिए इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल और डीजल वाहनों से इतनी ज्यादा एफिशिएंट क्यों मानी जाती हैं.

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भारत में इलेक्ट्रिक कारों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन आज भी बहुत से लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि आखिर EV इतनी ज्यादा एफिशिएंट कैसे होती है. हाल ही में एक टेस्ट के दौरान एक इलेक्ट्रिक कार ने पेट्रोल के बराबर ऊर्जा पर करीब 89 किलोमीटर चलकर सभी को चौंका दिया. यह आंकड़ा किसी पेट्रोल, डीजल, CNG या यहां तक कि मजबूत हाइब्रिड कार के लिए भी लगभग असंभव माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर EV के पीछे ऐसा कौन-सा विज्ञान काम करता है जो उसे पारंपरिक इंजन वाली कारों से कई गुना ज्यादा एफिशिएंट बना देता है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने इसपर एक रोचक रिपोर्ट प्रकाशित की है.

एक लीटर पेट्रोल में कितनी ऊर्जा होती है?

ऊर्जा के हिसाब से देखें तो एक लीटर पेट्रोल में लगभग 8.9 kWh ऊर्जा मौजूद होती है. आमतौर पर जब कोई पेट्रोल कार सड़क पर चलती है तो इस ऊर्जा का बड़ा हिस्सा इंजन के अंदर ही गर्मी, घर्षण और आवाज के रूप में बर्बाद हो जाता है. यही वजह है कि कई पेट्रोल कारें शहर के ट्रैफिक में 12 से 14 किलोमीटर प्रति लीटर के आसपास का माइलेज देती हैं.

दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक कारें इसी ऊर्जा का कहीं बेहतर इस्तेमाल करती हैं. एक हालिया परीक्षण में देखा गया कि एक EV ने एक kWh बिजली में लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय की. अगर इसी गणना को पेट्रोल की ऊर्जा के बराबर रखा जाए तो यह आंकड़ा करीब 89 किलोमीटर प्रति लीटर के बराबर बैठता है.

पेट्रोल इंजन में कहां बर्बाद होती है ऊर्जा?

पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन यानी ICE तकनीक पिछले कई दशकों से विकसित हो रही है, लेकिन इसके बावजूद इसकी ऊर्जा दक्षता सीमित है. इंजन में पिस्टन, वाल्व, गियरबॉक्स, कूलिंग सिस्टम और कई मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं. हर चरण में ऊर्जा का कुछ हिस्सा नष्ट होता रहता है.

ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी कार भी लगातार ईंधन खर्च करती रहती है. यही कारण है कि पेट्रोल इंजन आमतौर पर अपनी कुल ऊर्जा का केवल 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही पहियों तक पहुंचा पाते हैं, जबकि बाकी ऊर्जा बर्बाद हो जाती है.

EV ट्रैफिक में और ज्यादा एफिशिएंट क्यों होती है?

जहां भारी ट्रैफिक पेट्रोल और डीजल कारों के माइलेज को नुकसान पहुंचाता है, वहीं EV के लिए यह स्थिति फायदे की साबित हो सकती है. इलेक्ट्रिक कारों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक होती है. जब ड्राइवर एक्सीलेटर छोड़ता है या ब्रेक लगाता है, तब मोटर जेनरेटर की तरह काम करने लगती है और कुछ ऊर्जा वापस बैटरी में जमा कर देती है.

यही वजह है कि बार-बार रुकने और चलने वाले शहर के ट्रैफिक में भी कई EV अपेक्षाकृत बेहतर एफिशिएंसी हासिल कर लेती हैं. पहाड़ी रास्तों से नीचे उतरते समय भी बैटरी में कुछ प्रतिशत चार्ज वापस जुड़ सकता है.

EV बैटरी और पर्यावरण का गणित

EV को लेकर अक्सर यह बहस होती है कि बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले खनिजों का क्या होगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यहां एक बड़ा अंतर समझना जरूरी है. पेट्रोल एक बार जलने के बाद हमेशा के लिए खत्म हो जाता है, जबकि EV बैटरी के अंदर मौजूद कई महत्वपूर्ण पदार्थों को दोबारा रिकवर किया जा सकता है.

आधुनिक बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीक के जरिये लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण तत्वों का बड़ा हिस्सा वापस प्राप्त किया जा सकता है. इससे भविष्य में नई बैटरियां तैयार करने में मदद मिलती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है.

EV और ICE में किसे चुनना चाहिए?

कार खरीदते समय केवल माइलेज ही एकमात्र पैमाना नहीं होता. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्राइविंग पैटर्न, बजट, बिजली की उपलब्धता और रीसेल वैल्यू जैसे कई पहलू भी महत्वपूर्ण हैं. फिर भी ऊर्जा दक्षता के मामले में EV का पलड़ा स्पष्ट रूप से भारी दिखाई देता है.

यही कारण है कि दुनिया भर में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है. आने वाले वर्षों में बेहतर बैटरी तकनीक और चार्जिंग नेटवर्क के साथ EV और भी ज्यादा लोकप्रिय हो सकती हैं.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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