गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत कब और क्यों हुई थी, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

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गाड़ी पर लगा नंबर प्लेट / फोटो: एआई इमेज

Number Plate History: आज किसी भी कार या बाइक को बिना नंबर प्लेट के सड़क पर चलाना कानूनन अपराध है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाड़ियों को नंबर देने का विचार सबसे पहले कब आया था? और इसकी शुरुआत कब हुई? यहां जानिए इस दिलचस्प कहानी के बारे में.

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आज सड़क पर चलने वाली हर कार, बाइक, बस या ट्रक की अपनी एक अलग पहचान होती है, जिसे हम नंबर प्लेट के रूप में जानते हैं. किसी गाड़ी की पहचान से लेकर उसके मालिक तक की जानकारी जुटाने में नंबर प्लेट की अहम भूमिका होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत आखिर कब और क्यों हुई थी? खास बात यह है कि यह नंबर प्लेट का चलन आज से नहीं, बल्कि 130 साल से भी ज्यादा पुराना है. आइयए जानते हैं इसके पीछे की कहानी.

आखिर क्यों पड़ी नंबर प्लेट की जरूरत?

जब 19वीं सदी के आखिर में सड़कों पर मोटर गाड़ियां बढ़ने लगीं, तो सरकारों के सामने उन्हें पहचानने की समस्या खड़ी हो गई. पहले घोड़ा-गाड़ी कम संख्या में होती थीं और उन्हें पहचानना आसान था, लेकिन मोटर गाड़ियों की संख्या और रफ्तार दोनों तेजी से बढ़ रही थीं. ऐसे में दुर्घटना, ट्रैफिक नियम तोड़ने या किसी अपराध की स्थिति में गाड़ी और उसके मालिक का पता लगाना मुश्किल हो जाता था. इस समस्या को हल करने के लिए हर गाड़ी को एक अलग पहचान संख्या देने की व्यवस्था शुरू की गई, जिसे आज हम नंबर प्लेट के नाम से जानते हैं. नंबर प्लेट का मकसद गाड़ी की पहचान आसान बनाना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर वाहन मालिक तक आसानी से पहुंचना था.

दुनिया में सबसे पहले कहां शुरू हुई नंबर प्लेट व्यवस्था?

दुनिया में गाड़ियों के लिए नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत सबसे पहले फ्रांस में हुई थी. 14 अगस्त 1893 को पेरिस प्रशासन ने शहर में चलने वाले सभी मोटर गाड़ियों पर पहचान नंबर दिखाना जरूरी कर दिया था. उस समय नंबर प्लेट पर वाहन मालिक का नाम, पता और अन्य पहचान संबंधी जानकारी लिखी जाती थी. इससे पुलिस और प्रशासन को किसी दुर्घटना या कानूनी मामले में वाहन और उसके मालिक की पहचान करने में आसानी होती थी. यही व्यवस्था आगे चलकर मॉडर्न वाहन नंबर प्लेट सिस्टम की नींव बनी, जिसे आज दुनिया के लगभग सभी देशों में इस्तेमाल किया जाता है.

दूसरे देशों ने कैसे अपनाया यह सिस्टम?

फ्रांस में नंबर प्लेट व्यवस्था शुरू होने के बाद दूसरे देशों ने भी इसकी अहमियत को समझा और धीरे-धीरे इसे अपनाना शुरू कर दिया. जर्मनी ने 1896 में राष्ट्रीय स्तर पर नंबर प्लेट सिस्टम लागू किया, जिससे गाड़ियों की पहचान और रिकॉर्ड रखना आसान हो गया. इसके बाद नीदरलैंड ने 1898 में वाहन पंजीकरण व्यवस्था शुरू की. यह उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने गाड़ियों की पहचान और लाइसेंसिंग प्रोसेस को व्यवस्थित रूप दिया.

वहीं, अमेरिका में भी जल्द ही वाहन पहचान की जरूरत महसूस की गई. 1901 में न्यूयॉर्क ने ऐसा कानून बनाया, जिसके तहत वाहनों की पहचान अनिवार्य हो गई. शुरुआत में वाहन मालिक खुद लकड़ी, धातु या चमड़े की प्लेट बनाकर अपनी गाड़ियों पर लगाते थे. बाद में 1903 में मैसाचुसेट्स आधिकारिक नंबर प्लेट जारी करने वाला अमेरिका का पहला राज्य बना. इस तरह फ्रांस से शुरू हुआ नंबर प्लेट सिस्टम धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया और आज यह हर गाड़ी की पहचान का सबसे अहम जरिया बन चुका है.

भारत में कब शुरू हुई नंबर प्लेट व्यवस्था?

भारत में नंबर प्लेट और वाहन पंजीकरण की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी. शुरुआत में पूरे देश के लिए कोई एक जैसा नियम नहीं था, इसलिए अलग-अलग प्रांत अपने स्तर पर वाहन पंजीकरण के नियम बनाते थे. सबसे पहले बॉम्बे प्रेसीडेंसी (मुंबई क्षेत्र) ने 1901 में वाहन पंजीकरण के नियम लागू किए. इसके बाद बंगाल ने 1903 में और मद्रास ने 1907 में ऐसी ही व्यवस्था शुरू की. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नियम होने के कारण व्यवस्था एक समान नहीं थे. ऐसे में इसे व्यवस्थित करने के लिए 1914 में भारतीय मोटर वाहन अधिनियम (Indian Motor Vehicles Act) लागू किया गया. इस कानून ने पूरे ब्रिटिश भारत में वाहनों के पंजीकरण और पहचान के लिए एक समान फ्रेमवर्क तैयार किया. यही व्यवस्था आगे चलकर भारत की मॉडर्न नंबर प्लेट और वाहन पंजीकरण प्रणाली (Vehicle Registration System) की नींव बनी, जिसका इस्तेमाल आज भी विकसित रूप में किया जाता है.

आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है नंबर प्लेट

समय के साथ नंबर प्लेट का पैटर्न जरूर बदल गया है, लेकिन इसकी जरूरत आज भी पहले जैसी ही है. मॉडर्न हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP), डिजिटल डेटाबेस और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) जैसी तकनीकों ने गाड़ी पहचान को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है. यही वजह है कि नंबर प्लेट आज सिर्फ एक धातु की प्लेट नहीं, बल्कि हर गाड़ी की ऑफिशियल पहचान बन चुकी है.

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शिवानी शाह

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By शिवानी शाह

शिवानी शाह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में वह कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह स्मार्टफोन्स, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, बायर्स गाइड और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं.

टेक्नोलॉजी सेक्टर में शिवानी शाह की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च/रिव्यूज, गैजेट रिव्यूज, टिप्स एंड ट्रिक्स, बायर्स गाइड, टेलीकॉम अपडेट्स, AI टूल्स/फीचर्स और ट्रेंडिंग टेक टॉपिक्स से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वह नई कार/बाइक/स्कूटर्स की लॉन्चिंग, गाड़ियों के फीचर्स, बायर्स गाइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), ट्रेंडिंग ऑटो टॉपिक्स और अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर सिर्फ लॉन्च और फीचर्स की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को यह भी समझ आए कि वह उनके लिए कितनी काम की है.

शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

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