BS4 और BS6 में क्या है फर्क? ज्यादातर लोग नहीं जानते दोनों के बीच ये बड़े अंतर
हाईवे पर चलती कारें (Photo: AI Generated)
BS4 और BS6 गाड़ियों में सबसे बड़ा फर्क पॉल्यूशन और तकनीक का है. BS4 गाड़ियां खरीदने और मेंटेन करने में सस्ती पड़ सकती हैं, लेकिन BS6 गाड़ियां कम पॉल्यूशन फैलाती हैं और नई तकनीक के साथ आती हैं. आइए इसे डिटेल में जानते हैं.
अगर आपके घर के गैरेज में कोई पुरानी कार खड़ी है या फिर आप नई गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपने BS4 और BS6 जैसे शब्द जरूर सुने होंगे. लेकिन आखिर ये BS4 और BS6 हैं क्या और इनका आपकी गाड़ी से क्या लेना-देना है? अक्सर लोगों के मन में इन्हें लेकर कई सवाल और कन्फ्यूजन होते हैं. अगर आप इन दोनों टर्म्स को लेकर उलझे रहते हैं तो टेंशन मत लीजिए. आइए इन सभी सवालों के जवाब आसान शब्दों में जानते हैं और समझते हैं कि ये उत्सर्जन (Emission) नियम आखिर क्यों इतने जरूरी हैं.
BS4 क्यों बेहतर है BS6 से?
अगर बात एनवायरनमेंट और पॉल्यूशन की करें, तो BS4 गाड़ियों का BS6 के मुकाबले कोई खास फायदा नहीं है. फिर भी कई लोग BS4 को पसंद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी कम कीमत और कम मेंटेनेंस खर्च. BS4 गाड़ियों में एमिशन कंट्रोल सिस्टम, BS6 के मुकाबले ज्यादा सरल होता है, इसलिए इनके रिपेयर और सर्विसिंग पर भी कम खर्च आता है. कुछ मामलों में BS4 गाड़ियों थोड़ा बेहतर माइलेज भी दे सकते हैं, क्योंकि इनमें इनमें पॉल्यूशन कम करने वाला सिस्टम ज्यादा पेचीदा नहीं होता.
हालांकि, अगर मॉडर्न टेक्नोलॉजी और एनवायरनमेंट के नजरिए से देखा जाए, तो BS6 गाड़ियां साफ तौर पर बेहतर ऑप्शन हैं. ये काफी कम पॉल्यूशन फैलाते हैं, कम धुआं और कम पॉल्यूशन फैलाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इसके अलावा BS6 इंजन में नई और बेहतर तकनीक का यूज किया जाता है, जिससे परफॉरमेंस बेहतर होता है.
BS6 का क्या मतलब है?
BS6 यानी भारत स्टेज 6, भारत सरकार द्वारा लागू किया गया सबसे नए प्रदूषण नियम है. इसका मकसद गाड़ियों से होने वाले एयर पॉल्यूशन को कम करना है. इसके तहत नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), पार्टिकुलेट मैटर (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन (HC) जैसे हानिकारक प्रदूषकों पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त नियंत्रण लगाया गया है.
इन मानकों को पूरा करने के लिए BS6 गाड़ियों में डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF), सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) और बेहतर कैटेलिटिक कन्वर्टर जैसी एडवांस्ड तकनीकों का यूज किया जाता है. भारत ने अप्रैल 2020 से पूरे देश में BS6 मानकों को लागू कर दिया था. खास बात यह रही कि देश ने सीधे BS4 से BS6 पर छलांग लगाई और BS5 चरण को पूरी तरह छोड़ दिया.
भारत में BS6 नियम क्या है?
BS6 नियम के मुताबिक भारत में बिकने वाली हर नई गाड़ी को Bharat Stage 6 (BS6) उत्सर्जन मानकों का पालन करना जरूरी है. ये नियम अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं. इसका मकसद गाड़ियों से होने वाले पॉल्यूशन को कम करना और हवा को साफ बनाना है.
BS6 नियमों के तहत:
- भारत में बिकने वाली हर नई पेट्रोल और डीजल गाड़ी को BS6 उत्सर्जन मानकों पर खरा उतरना जरूरी है.
- देशभर में BS6 ग्रेड का फ्यूल बेचा जाता है, जिसमें सल्फर की मात्रा काफी कम (10 ppm) होती है. इससे पॉल्यूशन भी कम होता है.
- गाड़ी कंपनियों को गाड़ियों में एडवांस्ड पॉल्यूशन-कंट्रोल तकनीकें लगानी पड़ती हैं, ताकि हानिकारक गैसों का एमिशन कम हो.
- सभी BS6 गाड़ियों में ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक (OBD) सिस्टम दिया जाता है, जो इंजन और एमिशन से जुड़े हिस्सों पर नजर रखता है और किसी खराबी की जानकारी देता है.
- अप्रैल 2020 के बाद केवल BS6 मानकों वाली नई गाड़ियां ही बनाई और बेची जा सकती हैं. हालांकि, इससे पहले रजिस्टर हुई BS4 गाड़ियां अभी भी सड़क पर चल सकती हैं, बशर्ते वे स्थानीय नियमों और फिटनेस मानकों का पालन करती हों.
क्या BS4 गाड़ियों को BS6 में बदला जा सकता है?
नहीं, किसी BS4 कार को पूरी तरह BS6 मानकों के अनुसार अपग्रेड करना संभव नहीं है. BS6 नॉर्म्स को पूरा करने के लिए इंजन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम, एग्जॉस्ट ट्रीटमेंट यूनिट, सेंसर और ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक्स जैसे कई अहम हिस्सों में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, इन सभी कंपोनेंट्स को बाद में लगाना बेहद मुश्किल और काफी महंगा काम है. सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में ऐसे मॉडिफिकेशन को ऑफिसियल BS6 कन्वर्जन के रूप में मान्यता भी नहीं मिलती.
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By Ankit Anand
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