Coronavirus पीड़ितों की पहचान करनेवाली इस मशीन के बारे में कितना जानते हैं आप?

Updated:
विज्ञापन
Coronavirus पीड़ितों की पहचान करनेवाली इस मशीन के बारे में कितना जानते हैं आप?

how infrared thermometer detects coronavirus infected patients: कोरोना वायरस के साथ इस जंग में एक हथियार बेहद असरदार साबित हो रहा है और उसका नाम है थर्मोमीटर गन. इस खास गन से सार्वजनिक स्थलों पर कोरोना वायरस से पीड़ितों की जांच की जा रही है. आइए जानें कि क्या है यह गन और कैसे करती है काम-

विज्ञापन

Use of Infrared Thermometer detects Coronavirus infected patients: दुनिया के लगभग 190 देश इस समय कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus infection) से जूझ रहे हैं. लाखों लोग इस जानलेवा महामारी (coronavirus pandemic) की चपेट में आ चुके हैं और हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. सभी देश अपने उपलब्ध संसाधनों और अपने-अपने तरीके कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.

कोरोना वायरस के साथ इस जंग में एक हथियार बेहद असरदार साबित हो रहा है और उसका नाम है थर्मोमीटर गन. इस खास गन से सार्वजनिक स्थलों पर कोरोना वायरस से पीड़ितों की जांच की जा रही है. आइए जानें कि क्या है यह गन और कैसे करती है काम-

थर्मोमीटर गन का इस्तेमाल आजकल होटल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मॉल, आ​फिस तक में हो रहा है. थर्मोमीटर गन का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के शरीर के तापमान को मापने के लिए होता है. आमतौर पर इसके लिए थर्मोमीटर का इस्तेमाल होता है, लेकिन यह सार्वजनिक जगहों पर बड़े स्तर पर लोगों के शरीर के तापमान का पता लगाने के लिए के लिए उतना कारगर नहीं है जितना थर्मोमीटर गन होता है.

थर्मोमीटर गन इंफ्रारेड लाइट के जरिये काम करता है इसीलिए इसे इंफ्रारेड थर्मोमीटर भी कहते हैं. यह शरीर के तापमान के बारे में बताता है. खास बात यह है कि थर्मोमीटर गन से करीब एक फीट की दूरी से भी किसी के शरीर के तापमान का सटीक पता लगाया जा सकता है.

हालिया वर्षों में वायरल के प्रकोप को रोकने की दिशा में यह देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. यह व्यापक रूप से साल 2000 में सामने आया. चीन में सार्स के प्रसार को धीमा करने और एक दशक बाद पश्चिम अफ्रीका में इबोला के प्रकोप को रोकने के लिए व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल किया गया.

हालांकि इसकी भी कुछ सीमाएं ���ैं. बता दें कि थर्मोमीटर गन कोरोना पीड़ितों की पुष्टि नहीं करता है, बल्कि संभावित मरीजों के बारे में बताता है. थर्मोमीटर गन के साथ एक समस्या यह है कि कई बार यह उन लोगों को भी बीमार बता देता है जिन्हें बुखार है ही नहीं.

मान लीजिए कि आप दौड़कर आ रहे हैं या फिर धूप से आ रहे हैं तो जाहिर है कि उस समय आपके शरीर का तापमान ज्यादा होगा और अगर उसी वक्त थर्मोमीटर गन से आपकी जांच होती है तो यह आपके शरीर का तापमान अधिक ही आयेगा. ऐसे में यह डिवाइस आपको बीमार घोषित कर देगी.

आपके शरीर का तापमान यह नहीं बताता है कि आप कोरोना वायरस से संक्रमित हैं. इंसान को बुखार तब आता है जब शरीर को यह अहसास होता है कि कोई घुसपैठिया आया है. इसके बाद इम्‍यून सिस्‍टम कुछ केमिकल छोड़ता है और इससे गर्मी बढ़ती है. हालांकि अगर किसी ने दवा खायी है, तो उसके शरीर का तापमान कम हो जाएगा. ऐसे मरीजों की पहचान थर्मोमीटर गन से नहीं हो पाएगी.

ऐसे में इस उपकरण की क्षमता को लेकर संदेह उठने शुरू हो गए हैं. शक्तिशाली सेंसर तकनीक के बावजूद चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि सेंसर युक्त यह थर्मोमीटर अप्रभावी रक्षा तंत्र साबित हुआ है.

इन कमियों के बावजूद भी इस थर्मोमीटर गन का इस्‍तेमाल पूरी दुनिया में किया जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि बेहद कम समय में इतनी बड़ी तादाद में लोगों की जांच का और कोई आसान तरीका है भी नहीं. हर ​किसी की थर्मामीटर या शारीरिक जांच संभव नहीं है, इसीलिए कई बार सही आंकड़े नहीं देने के बाद भी थर्मोमीटर गन का ही इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

इस बीच आपको बता दें कि भारत सरकार भी कोरोना को रोकने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है. 24 मार्च 2020, दिन मंगलवार रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद पूरे देश को अगले 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है.

कोरोना वायरस संक्रमण के शिकार लोगों की पहचान कर उन्हें आइसोलेशन और क्वारंटाइन में रखकर उनके इलाज की व्यवस्था की जा रही है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे घर पर ही रहें और इस खतरनाक वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करें.

विज्ञापन
राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. Google Discover और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारी भरे होते हैं, बल्कि यूजर्स की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, कॉम्पैरिजन-बेस्ड आर्टिकल्स और एक्सप्लेनर स्टोरीज को यूजर्स काफी पसंद करते हैं.

राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

जुड़िए [email protected] पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola