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महाराष्ट्र के इस Hill Station पर कार ले जाने की मनाही है, जानें क्यों?

Updated at : 15 May 2024 12:00 PM (IST)
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महाराष्ट्र के इस Hill Station पर कार ले जाने की मनाही है, जानें क्यों?

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित है माथेरान हिल स्टेशन. फोटो: सोशल मीडिया

Car Prohibited on Hill Station: महाराष्ट्र का माथेरान हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है. माथेरान की गिनती भारत के सबसे छोटे हिल स्टेशनों में की जाती है.

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Car Prohibited on Hill Station: गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए आम तौर पर लोग हिल स्टेशनों का रुख करते हैं. जिनके पास अपनी कार है, वे कार से लॉन्ग ड्राइव करके हिल स्टेशनों पर जाना पसंद करते हैं. लेकिन, महाराष्ट्र में एक ऐसा भी हिल स्टेशन है, जहां पर कार, ऑटो या फिर किसी भी प्रकार के वाहनों को ले जाने पर रोक लगी हुई है. हालांकि, पूरी दुनिया में इटली का वेनिस शहर भी ऐसी जगह है, जहां कार चलाने पर रोक लगी हुई है. महाराष्ट्र के जिस हिल स्टेशन पर कार चलाने या किसी भी गाड़ी को ले जाने पर रोक लगी है, उस हिल स्टेशन का नाम माथेरान है.

भारत का सबसे छोटा हिल स्टेशन है माथेरान

माथेरान की गिनती भारत के सबसे छोटे हिल स्टेशनों में की जाती है. यह महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित है. यह हिल स्टेशन समुद्रतल से करीब 2600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. मुंबई से इसकी दूरी करीब 100 किलोमीटर के आसपास है. यह जानकर हैरानी होगी कि पूरे एशिया महादेश में माथेरान ही एक ऐसी जगह है, जो ऑटोमोबाइल फ्री हिल स्टेशन है.

माथेरान पर क्यों नहीं ले जा सकते कार

महाराष्ट्र का माथेरान हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है. इसके चारो ओर हरियाली फैली हुई है. पर्यावरण के दृष्टिकोण से इस छोटे से हिल स्टेशन पर कार, ऑटो रिक्शा या किसी भी प्रकार के वाहनों को ले जाने पर रोक लगी हुई है. सरकार ने इसे पर्यावरण के दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील क्षेत्र घोषित कर रखा है. यही वजह है कि यहां पर कार ले जाने पर रोक है. इतना ही नहीं, इस इलाके में किसी भी गाड़ी के हॉर्न सुनाई दे जाने के बाद वन और परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है. इसके अलावा, यहां पर तेज आवाज निकालने पर भी मनाही है.

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माथेरान में घोड़ों से होती है सवारी

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित स्वर्ग जैसे इस हिल स्टेशन तक पहुंचने के लिए घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. मुंबई के रास्ते लोग माथेरान पहुंचने के लिए सबसे पहले लुइसा प्वाइंट तक जाते हैं. इसके बाद लुइसा प्वाइंट से ट्रैकिंग करते हुए घुड़सवारी कराते हुए लोगों को करीब 1.5 किलोमीटर तक का सफर तय कराया जाता है. चार्लोट झील इस इलाके का सबसे बेहतरी आकर्षण का केंद्र है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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