औरंगाबाद में नामांकन में लापरवाही पर शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, 54 एचएम के तीन दिन का वेतन कटा , 261 से मांगा जवाब
Published by : Vivek Pandey Updated At : 15 Jun 2026 8:48 AM
डीईओ कार्यालय औरंगाबाद
Aurangabad News: औरंगाबाद में कक्षा-एक के नामांकन और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर प्रविष्टि में लापरवाही पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. 54 प्रधान शिक्षकों का तीन दिन का वेतन काटा गया है, जबकि 261 स्कूल प्रभारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
(औरंगाबाद से सुधीर कुमार सिन्हा की रिपोर्ट)
Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-एक के छात्रों के नामांकन और उसकी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टि में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है. विभाग ने 54 विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों के तीन दिनों का वेतन काटने का आदेश दिया है, जबकि 261 विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों और हेडमास्टरों से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है.
समीक्षा में सामने आई गंभीर लापरवाही
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार 9 जून को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर कक्षा-एक के विद्यार्थियों की प्रविष्टि की समीक्षा की थी. इस दौरान औरंगाबाद जिले की प्रगति बेहद असंतोषजनक पाई गई. बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कई विद्यालयों में नामांकित बच्चों का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया.
54 स्कूलों में शून्य प्रविष्टि, तीन दिन का वेतन कटा
विभागीय जांच में 54 विद्यालय ऐसे मिले जहां कक्षा-एक के नामांकन की ऑनलाइन प्रविष्टि शून्य थी. इसे विभागीय आदेश की अवहेलना और घोर लापरवाही मानते हुए संबंधित प्रधान शिक्षकों एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों के तीन दिनों के वेतन की कटौती की गई है. साथ ही तीन दिनों के भीतर शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है.
261 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से मांगा गया स्पष्टीकरण
जिले के 261 विद्यालयों में कक्षा-एक के नामांकित विद्यार्थियों की ई-शिक्षाकोष पर प्रविष्टि 30 प्रतिशत से भी कम पाई गई. ऐसे सभी विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों से दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर आगे विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
इन प्रखंडों के स्कूल आए कार्रवाई की जद में
वेतन कटौती की कार्रवाई औरंगाबाद, बारूण, देव, दाउदनगर, गोह, हसपुरा, कुटुंबा, मदनपुर, नवीनगर, ओबरा और रफीगंज प्रखंड के कुल 54 विद्यालयों पर की गई है. इनमें कई प्राथमिक, मध्य और उर्दू विद्यालय शामिल हैं, जहां कक्षा-एक की ऑनलाइन प्रविष्टि शून्य पाई गई.
नवीनगर में सबसे अधिक शो-कॉज नोटिस
स्पष्टीकरण मांगने की कार्रवाई में सबसे अधिक नवीनगर प्रखंड के 43 विद्यालय शामिल हैं. इसके अलावा रफीगंज के 34, कुटुंबा के 30, ओबरा के 25, बारूण के 23, औरंगाबाद के 21, गोह के 20, दाउदनगर और देव के 18-18, हसपुरा के 15 तथा मदनपुर के 14 विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों से जवाब तलब किया गया है.
पोर्टल पर दिखने वाली प्रगति से तय होगी जवाबदेही
शिक्षा विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद सरकारी विद्यालयों में हड़कंप मच गया है. संबंधित प्रधान शिक्षक अब नामांकन की ऑनलाइन प्रविष्टि पूरी करने में जुट गए हैं. विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब केवल कागजी रिकॉर्ड नहीं, बल्कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दिखाई देने वाली वास्तविक प्रगति के आधार पर अधिकारियों और शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाएगी.
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विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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