सेहन में लगे पेड़-पौधे बढ़ाते हैं खूबसूरती

Published at :22 Jun 2015 7:37 AM (IST)
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सेहन में लगे पेड़-पौधे बढ़ाते हैं खूबसूरती

जमशेदपुर: जुगसलाई की तंग गलियों के बीच स्थित मसजिद-ए-मेराज में महतो पाड़ा रोड, हिल व्यू के मिल्लत नगर व आसपास क्षेत्र के मुसलमान नमाज अदा करने पहुंचते हैं. 15 अप्रैल 2003 को पीरे तरीकत अब्दुल हफीज साहब की मौजूदगी में इदारे शरिया के नाजिम- ए- आला मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने इसकी संग ए बुनियाद […]

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जमशेदपुर: जुगसलाई की तंग गलियों के बीच स्थित मसजिद-ए-मेराज में महतो पाड़ा रोड, हिल व्यू के मिल्लत नगर व आसपास क्षेत्र के मुसलमान नमाज अदा करने पहुंचते हैं. 15 अप्रैल 2003 को पीरे तरीकत अब्दुल हफीज साहब की मौजूदगी में इदारे शरिया के नाजिम- ए- आला मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने इसकी संग ए बुनियाद रखी थी.

शुरुआती दौर में यह झोपड़ीनुमा था. टीन-करकट डालकर यहां पांच वक्त की नमाज शुरू हुई. आज इस मसजिद के पास बड़ी इमारत है. खूबसूरत सा सेहन (आंगन) है, जिसमें पेड़-पौधे लगाये गये हैं जो नमाजियों को काफी सुकून देता है. हाजी मोहम्मद कासिम, मो सरफराज, मो वाहिद आदि मसजिद के विकास व कुशल संचालन के लिए तत्पर हैं. मसजिद की दूसरी मंजिल का निर्माण कार्य शुरू किया गया है. बिजली नहीं रहने पर इसमें जेनरेटर से विद्युत आपूर्ति होती है.

रोजा में तकवा का खास ख्याल रखना चाहिए
हाफिज मौलाना मेराजउद्दीन फैजी ने कहा कि रोजा उन इबादतों में से है, जिसे मजहब- ए- इसलाम में बरतरी हासिल है. इस महीने में रोजा रखने से अल्लाह के बताये हुए एहकमात की पाबंदी होती है. रोजा इबादत के साथ-साथ इनसान के शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है. अल्लाह ने फरमाया रोजा में तकवा का पैदा किया जाना जरूरी है. सिर्फ भूखे -प्यासे रहने का नाम रोजा नहीं है, बल्कि शरीर के हर हिस्से को रोजे के बताये हुए उसूलों के तहत कार्य करना चाहिए. यानी झूठ न बोलें, आंखों से बुरी चीजें न देखें, एक दूसरे के दिलों को चोट न पहुंचायें.

रोजा की गरिमा बनाये रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें. एक रोजेदार को दूसरों की मदद करना और अल्लाह के बताये हुए उपदेश और रसूल की सुन्नतों पर अमल करना चाहिए.-इमाम मेराज मसजिद जुगसलाई

मीनार और गुंबद का निर्माण शीघ्र मसजिद ए मेराज के मतवल्ली और मसजिद के प्रबंधन से जुड़े मोतिउल्लाह हबीबी के मुताबिक मसजिद के तीसरे तल्ले और गुंबद के साथ-साथ मीनार की तामीर का काम जल्द शुरू किया जायेगा. यहां गरीब बच्चों को दीनी तालीम भी दी जाती है. इसके एवज में फीस नहीं ली जाती. यहां ढेर सारे पेड़- पौधे लगाये गये हैं. यहां का वजू खाना स्वच्छ और आरामदायक है.
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