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आगरा: यमुना में बाढ़ से बेबी ताज सहित कई स्मारक जलमग्न, मेहताब बाग किया गया बंद, जानें ताज महल की स्थिति

Updated at : 19 Jul 2023 3:43 PM (IST)
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आगरा: यमुना में बाढ़ से बेबी ताज सहित कई स्मारक जलमग्न, मेहताब बाग किया गया बंद, जानें ताज महल की स्थिति

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग स्मारकों के पास बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन से सर्वे करा रहा है. एत्माद्दौला सर्किल के 6-7 स्मारकों में बाढ़ से नुकसान हुआ है. कई बगीचे खराब हो गए हैं. पानी उतरने के बाद सिल्ट जैसी समस्या सामने आ सकती है.

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Agra News: प्रदेश के आगरा जनपद में यमुना का जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ के कारण जिले के तमाम राष्ट्रीय और संरक्षित स्मारकों को भी काफी नुकसान हो सकता है. बाढ़ का पानी स्मारकों की दीवार तक पहुंच चुका है. इसकी वजह से स्मारकों में सीलन जैसी समस्याएं सामने आ रही है. आगरा के ताज महल के पार्श्व में स्थित मेहताब बाग और ताज व्यू प्वाइंट में पानी पहुंच गया है.

मेहताब बाग को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है. वहीं एत्माद्दौला जिसे बेबी ताज भी कहा जाता है उसके पिछले हिस्से में बने 22 कमरों में से आधे से ज्यादा में पानी भर चुका है. सभी कोठरियां डूब गई हैं. अगर पानी और बड़ा तो एत्माद्दौला स्मारक भी पर्यटकों के लिए बंद कर दी जाएगी.

आगरा में एत्माद्दौला स्मारक की पिछली दीवार को छूकर यमुना नदी बह रही है. स्मारक में पर्यटकों को नूरजहां की कब्र से आगे नहीं जाने दिया जा रहा. एत्माद्दौला के संरक्षण सहायक रवि प्रताप मिश्रा ने बताया कि अगले आदेश तक मेहताब बाग बंद रहेगा. मेहताब बाग के बगीचों में अंदर तक पानी भर गया है. ताज व्यू पॉइंट पहुंच गया है. इसके अलावा चीनी का रोजा के बराबर स्थित स्मारक में भी पानी भरा हुआ है. वहीं 32 खंबा, जोहरा बाग, रामबाग स्थित सराय एक गेट संत कुईया स्मारक डूब गए हैं.

विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताज महल भी इस बाढ़ से अछूता नहीं रहा. ताजमहल के पीछे रिवर साइड गार्डन में पानी भर गया है और यमुना का पानी गार्डन के पास मौजूद दीवार तक पहुंच गया है. हालांकि ताज महल में अभी तक बाढ़ की वजह से कोई भी नुकसान नहीं है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा इस मार्ग की स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन से सर्वे कराया जा रहा है. बताया गया कि एत्माद्दौला सर्किल के 6-7 स्मारकों में बाढ़ से नुकसान हुआ है. कई बगीचे खराब हो गए हैं. पानी उतरने के बाद सिल्ट जैसी समस्या सामने आ सकती है.

वहीं पुरातत्व विभाग द्वारा बताया गया कि आगरा में नदी के किनारे बने हुए कई स्मारक लकड़ी की नींव पर बने हैं. ऐसे में यमुना का जलस्तर बढ़ने की वजह से पानी से इन स्मारकों में सीलन आ गई है. जिन स्मारकों में लकड़ी के दरवाजे लगे हैं, वह सीलन से खराब हो सकते हैं.

भारतीय पुरातत्व विभाग ने पानी आने की वजह से मेहताब बाग पर प्रतिबंध लगा दिया है. इससे पहले आगरा विकास प्राधिकरण ने ताज व्यू प्वाइंट पर बाढ़ का पानी पहुंचने के कारण ताजी पॉइंट को बंद कर दिया था. और यहीं से होता हुआ यमुना का पानी अब मेहताब बाग के गार्डन में भी पहुंच गया है.

मेहताब बाग से कुछ पहले स्थित 11 सीढ़ी स्मारक हालांकि ऊंचाई पर स्थित हैं. लेकिन, स्मारक पर मौजूद कुएं में यमुना नदी का पानी पहुंच गया है. इस वजह से कुएं का जलस्तर बढ़ गया है. यमुना नदी का रौद्र रूप देखने के लिए आसपास के तमाम लोग 11 सीढ़ी स्मारक पर पहुंच रहे हैं.

1924 में एत्माद्दौला के उद्यान में पहुंच गया था यमुना का पानी

अक्टूबर, 1924 में आई बाढ़ के समय एत्माद्दौला की यमुना किनारा की तरफ बनीं कोठरियां पानी में पूरी तरह डूब गई थीं. स्मारक के उद्यान में यमुना का पानी भर गया था. 1924 में आई बाढ़ का लेवल यहां यमुना किनारा की तरफ बनी बारादरी में दाईं तरफ के पत्थर पर अंकित है. यमुना किनारा बनी कोठरियों में सिल्ट भर गई थी. बाढ़ उतरने के बाद कोठरियों के दरवाजे ईंटों की चिनाई कर बंद करा दिए गए थे. इन्हें छह-सात वर्ष पूर्व खोला गया था, तब कोठरियों में सिल्ट भरी मिली थी.

1978 में ताजमहल के तहखाने में पहुंचा था पानी

45 वर्ष पूर्व 1978 में आई बाढ़ के समय ताज महल के तहखाने में पानी पहुंच गया था. तब यमुना का जल स्तर हाई फ्लड लेवल 508 फीट तक पहुंचा था. पुरातत्वविद् अधीक्षण राजकुमार पटेल के मुताबिक पुराने कर्मचारियों ने 1978 की बाढ़ के बाद यमुना द्वारा कभी ताज महल को नहीं छूने की जानकारी दी है. इस बार यमुना ताज महल की दीवार तक पहुंच गई है. रामबाग, एत्माद्दौला, काला गुंबद, जौहरा बाग, एत्माद्दौला, मेहताब बाग से सटकर बह रह रही है. विभागीय कर्मचारियों द्वारा यमुना के जल स्तर की निरंतर निगरानी की जा रही है.

यमुना के रौद्र तेवर से कई गांव डूबे, कॉलोनियों में भरा पानी

इस बीच आगरा में यमुना में आई बाढ़ से 40 गांव के रास्ते डूब गए है. शहर में दयालबाग से लेकर बल्केश्वर तक 12 कॉलोनियों में पानी भरा है. हजारों बीघा फसल डूब गई है. जलस्तर एक फीट बढ़कर 499.2 फीट हो गया. बचाव व राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ तैनात की गई हैं.

डीएम नवनीत सिंह चहल ने बताया कि अभी तक फसलों को भारी नुकसान का अनुमान है. जलस्तर कम होने पर सर्वे कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि 11 आश्रय स्थल बनाए हैं. शहरी क्षेत्र में मोती बाग की तरफ कुछ मकानों के पास जलभराव हुआ था. यमुना किनारा पर निरीक्षण किया है. नदी किनारे लोगों के जाने पर रोक है.

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