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वोट देता हूं तो उंगली की स्याही देशभक्ति के साथ जुड़ाव की भावना करती है पैदा, बोले प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़

Updated at : 20 Apr 2024 12:22 PM (IST)
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वोट देता हूं तो उंगली की स्याही देशभक्ति के साथ जुड़ाव की भावना करती है पैदा, बोले प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़

Chief Justice of India D Y Chandrachud/ File Photo

प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जब मैं वोट देता हूं तो उंगली पर लगने वाली स्याही देशभक्ति और राष्ट्र के साथ जुड़ाव की जबरदस्त भावना पैदा करती है.

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प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने नागरिकों से आम चुनाव में मतदान करने का अवसर न चूकने का आग्रह करते हुए कहा है कि संवैधानिक लोकतंत्र में यह ‘‘सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य’’ है. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर निर्वाचन आयोग के ‘माई वोट माई वॉयस’ मिशन के लिए एक वीडियो संदेश में कहा, हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नागरिक हैं, जो कि हमारा देश है.

चंद्रचूड़ ने कहा कि संविधान नागरिक के रूप में हमें कई अधिकार देता है, लेकिन साथ ही यह भी अपेक्षा करता है कि हर कोई उसे सौंपा गया अपना कर्तव्य निभाए. संवैधानिक लोकतंत्र में नागरिकता के सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्यों में से एक कर्तव्य वोट डालना है. आगे प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने कहा, मैं आप सभी से अनुरोध करूंगा कि कृपया हमारी महान मातृभूमि के नागरिक के रूप में जिम्मेदारी से मतदान करने का यह अवसर न चूकें. हर पांच साल में पांच मिनट, हमारे देश के लिए. यह किया जा सकता है, है ना? आइए, गर्व के साथ मतदान करें. मेरा वोट, मेरी आवाज…

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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार चुनने में नागरिकों की सहभागी भूमिका होती है और इसीलिए कहा जाता है कि ‘‘यह सरकार लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिए सरकार है. सीजेआई ने बताया कि जब वह पहली बार मतदाता बने थे और मताधिकार का उपयोग करने के लिए मतदान केंद्र में कतार में खड़े हुए थे, तब वह कितने उत्साहित थे. उन्होंने कहा, जब मैं वोट देता हूं तो उंगली पर लगने वाली स्याही देशभक्ति और राष्ट्र के साथ जुड़ाव की जबरदस्त भावना पैदा करती है.

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, इसलिए हमारा संविधान और हमारा कानून एक नागरिक, एक वोट और एक मूल्य का प्रावधान करता है. मुझे लगता है कि संवैधानिक लोकतंत्र के रूप में यह हमारे देश की महान दृढ़ता और शक्ति है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जब वह वकील थे और उन्हें काम के लिए इधर-उधर भागना पड़ता था, तब भी वह वोट डालने का अपना कर्तव्य निभाने से नहीं चूके. आपको बता दें कि लोकसभा के 543 सदस्यों के चुनाव के लिए 19 अप्रैल से एक जून तक सात चरणों में मतदान होगा. नतीजे चार जून को घोषित किए जाएंगे.

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