कौन हैं रॉब जेटन? जो बन सकते हैं नीदरलैंड के सबसे युवा और पहले गे पीएम, अर्जेंटीना के खिलाड़ी से की है सगाई

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अपनी पार्टी की जीत के बाद खुशी जताते रॉब जेटन. फोटो- एक्स.

Who is Rob Jetten set to become Netherlands PM: नीदरलैंड्स के आम चुनाव में सेंटरिस्ट पार्टी D66 ने कड़ी टक्कर वाले मुकाबले में जीत दर्ज की है. गीर्ट वाइल्डर्स की फ्रीडम पार्टी (PVV) मतों के मामूली अंतर को पाटने में असफल रही. इस परिणाम से D66 के नेता रॉब जेटन (Rob Jetten) यूरोपीय संघ की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में हैं. सोमवार को अगर उनकी पार्टी की बढ़त बरकरार रहती है, तो वे नीदरलैंड के अब तक के सबसे युवा और खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री होंगे.

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Who is Rob Jetten set to become Netherlands PM: नीदरलैंड्स के आम चुनाव में सेंटरिस्ट पार्टी D66 ने कड़ी टक्कर वाले मुकाबले में जीत दर्ज की है. इस परिणाम से D66 के नेता रॉब जेटन (Rob Jetten) यूरोपीय संघ की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में हैं, हालांकि नई सरकार के गठन से पहले लंबी गठबंधन वार्ताओं की उम्मीद की जा रही है. रॉब जेटन नीदरलैंड्स के इतिहास में सबसे युवा और पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री बन सकते हैं. उनकी पार्टी D66 ने नीदरलैंड्स के आम चुनाव में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है. लोकल न्यूज एजेंसी ANP और फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, जेटन की D66 पार्टी का मुकाबला गीर्ट वाइल्डर्स की फ्रीडम पार्टी (PVV) से कांटे की टक्कर में रहा, लेकिन वाइल्डर्स का मतदाताओं में समर्थन पिछले साल की रिकॉर्ड सफलता की तुलना में काफी घट गया और वह मतों के मामूली अंतर को पाटने में असफल रही.

30 अक्टूबर (स्थानीय समयानुसार) को 98% मतों की गिनती पूरी होने के बाद, दोनों प्रतिद्वंद्वी दलों को 150 सदस्यीय संसद के निचले सदन में 26-26 सीटें मिलने का अनुमान है. फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, ANP के अनुमानों में जेटन को वाइल्डर्स पर 15,155 मतों की मामूली बढ़त मिली है, जबकि अब भी एक निर्वाचन क्षेत्र और विदेशी डाक मतपत्र की गिनती बाकी है. हेग में चल रही डाक मतों की गिनती के परिणाम सोमवार शाम तक आने की संभावना है. ऐतिहासिक रूप से, विदेशी मतदाता आमतौर पर मध्यपंथी और वामपंथी दलों को समर्थन देते रहे हैं. पिछली 2023 की चुनावी प्रक्रिया में D66 ने PVV से लगभग 3,000 डाक मतों से बढ़त हासिल की थी.

पिछड़ने के बाद जेटन की पार्टी ने की वापसी

प्रारंभिक एग्जिट पोल और शुरुआती गिनती में D66 की मामूली जीत दिखाई दे रही थी, लेकिन ताजा आंकड़ों ने PVV के थोड़ा बेहतर प्रदर्शन की ओर संकेत किया. इसके बावजूद, वाइल्डर्स के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि सभी मुख्यधारा की पार्टियों ने उनके साथ गठबंधन से इंकार कर दिया है. D66 के समर्थक जश्न मनाते हुए झंडे लहरा रहे थे और “यस, वी कैन” के नारे लगा रहे थे, जब रॉब जेटन ने पार्टी मुख्यालय से जीत की घोषणा की.

पिछली सरकार में वाइल्डर्स के असफल 11 महीने के गठबंधन में शामिल न होने के कारण D66 पार्टी की साख बरकरार रही. पिछला चुनाव (2023) जेटन के लिए बेहद खराब साबित हुआ था और सरकार पिछले जून में इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर विवाद के चलते गिर गई, जब वाइल्डर्स की PVV ने गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया.

कौन हैं रॉब जेटन?

38 वर्षीय रॉब जेटन नीदरलैंड्स के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री बन सकते हैं. करिश्माई युवा नेता ने अपनी सामाजिक रूप से उदार पार्टी D66 को मात्र दो वर्षों में डच राजनीति में पाँचवें स्थान से शीर्ष पर पहुँचा दिया. एएफपी के अनुसार, बचपन से ही राजनीति के दीवाने रहे जेटन का पालन-पोषण दक्षिणपूर्व नीदरलैंड्स के ब्राबांट प्रांत के छोटे से शहर उडेन में हुआ. उन्होंने नाइमेगन स्थित रैडबाउड विश्वविद्यालय (Radboud University) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की. जेटन ने बताया कि बचपन में वे स्कूल जाने से पहले दो अखबार पढ़ते थे और शाम को टीवी समाचार देखते थे. उन्होंने कहा, “मैं एक गीक था 12 साल की उम्र में यही था मैं.”

अपने करियर के शुरुआती दौर में, उन्हें उनके रटे-रटाए संवादों और पढ़ाकू लुक्स के कारण रोबोट जेटन कहा जाता था. राजनीति में आने से पहले, जेटन ने डच रेल नेटवर्क प्रोरेल (ProRail) में बतौर कंसल्टेंट काम किया. साल 2017 में मात्र 30 वर्ष की उम्र में वे सांसद बने. एक साल बाद, वे D66 के सबसे युवा नेता बन गए. उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और उन्होंने 2022 से 2024 के बीच डच प्रधानमंत्री मार्क रुटे (Mark Rutte) की सरकार में ऊर्जा और जलवायु मंत्री के रूप में कार्य किया.

उनके समर्थक उन्हें मिनी-मार्क रुटे के रूप में देखते हैं. आपको बता दें कि रुटे अब नाटो (NATO) के प्रमुख हैं. जेटन ने अपने निजी जीवन को कभी राजनीतिक पहचान का हिस्सा नहीं बनने दिया. खुले तौर पर समलैंगिक जेटन अर्जेंटीना के हॉकी खिलाड़ी निकोलास कीनन से सगाई कर चुके हैं. दोनों की शादी अगले साल स्पेन में होने वाली है.

मंगलवार को वरिष्ठ सांसद बनाएंगे स्काउट

अब मंगलवार को वरिष्ठ सांसद संसद में मिलकर एक “स्काउट” नियुक्त करेंगे. यह वह वार्ताकार होगा, जो संभावित गठबंधन विकल्पों की तलाश करेगा. परंपरा के अनुसार, सबसे बड़े दल का नेता इस स्काउट को नामित करता है और गठबंधन निर्माण प्रक्रिया का नेतृत्व करता है, जो कई महीनों तक चल सकती है. वहीं कार्यवाहक प्रधानमंत्री डिक स्कूफ तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता. उन्होंने शुक्रवार को कहा, “मुझे लगता है कि मैं क्रिसमस तक प्रधानमंत्री रहूंगा.”

जेटन कैसे बन सकते हैं प्रधानमंत्री?

सभी प्रमुख दलों ने वाइल्डर्स के साथ सहयोग से इंकार कर दिया है. वाइल्डर्स ने पहले भी आव्रजन नीति पर मतभेद के चलते अपनी PVV पार्टी को पिछली सरकार के गठबंधन से वापस ले लिया था. यदि जेटन की जीत की पुष्टि होती है, तो उन्हें 150 सदस्यीय संसद में बहुमत (कम से कम 76 सीटों) वाला गठबंधन बनाना होगा. जेटन के लिए सबसे संभावित गठबंधन विकल्प एक ग्रैंड एलायंस हो सकता है, जिसमें शामिल होंगे 18 सीटों वाली क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अपील,  22 सीटों वाली लिबरल पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी और 20 सीटों के साथ वामपंथी ग्रीन/लेबर ब्लॉक, जबकि D66 के पास फिलहाल 26 सीटें हैं.

जेटन के लिए गठबंधन बनाना आसान नहीं होगा

हालांकि, यह अब भी अनिश्चित है कि VVD और ग्रीन/लेबर ब्लॉक साथ काम कर पाएंगे या नहीं. VVD की नेता डिलन येशिलगोज ने चुनाव से पहले कहा था कि ग्रीन/लेबर के साथ गठबंधन संभव नहीं है और उन्होंने केन्द्र-दक्षिणपंथी साझेदारी को प्राथमिकता दी थी. वहीं ग्रीन/लेबर ब्लॉक अपने नए नेता का चुनाव सोमवार को करेगा, क्योंकि पूर्व यूरोपीय संघ उपाध्यक्ष फ्रांस टिम्मरमैन्स ने इस्तीफा दे दिया है. यह कदम गठबंधन वार्ताओं को आसान बना सकता है.

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Anant Narayan Shukla

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By Anant Narayan Shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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