होर्मुज स्ट्रेट खुला तो परमाणु डील पर पीछे हट सकते हैं ट्रंप, अमेरिका तलाश रहा युद्ध से निकलने का रास्ता

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परमाणु समझौते की शर्त को पीछे छोड़ सकते हैं. जानिए इस फैसले का भारत और वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ सकता है.

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Strait of Hormuz : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव से निकलने के लिए परमाणु समझौते की शर्त को पीछे छोड़ने पर विचार कर सकते हैं. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट अनुसार एएनआई ने बताया कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देता है तो ट्रंप बिना किसी औपचारिक न्यूक्लियर डील के भी इसे अपनी जीत बताकर संघर्ष से पीछे हट सकते हैं.

होर्मुज बना बातचीत का केंद्र

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ इस संभावित रास्ते पर चर्चा की है. हालांकि, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के बदले कई शर्तें रख दी हैं. इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंध हटाना, ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करना और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा शामिल है.

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जुल्घादर ने भी इन शर्तों को सामने रखा है. तेहरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और क्षेत्र में उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों के खिलाफ हमले रोकने की मांग भी कर रहा है.

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत पर इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमत और पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ सकता है. अगर होर्मुज स्ट्रेट खुलता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इससे भारत के लिए तेल आयात का खर्च घटने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को राहत मिलने की संभावना रहेगी. वहीं, अगर तनाव बना रहता है और रास्ता बंद या बाधित रहता है, तो महंगा तेल भारत का आयात बिल बढ़ा सकता है और इसका असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है.

होर्मुज खुलने से क्या बदलेगा?

अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोल देता है, तो तेल और गैस से लदे जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकती है. इससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर बना दबाव कम हो सकता है. इसका असर पेट्रोल-डीजल और दूसरी ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है. साथ ही, समुद्री रास्ता खुलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को राहत मिलेगी और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावना बढ़ सकती है. यही वजह है कि होर्मुज को खोलना ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है.

ट्रंप पर घरेलू दबाव भी

अमेरिका में आने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू राजनीतिक दबाव भी ट्रंप के लिए अहम है. युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले ऊंची बनी हुई हैं. ऐसे में अमेरिकी प्रशासन ऐसा रास्ता तलाश रहा है, जिससे सैन्य अभियान को खत्म कर उसे अपने पक्ष में उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा सके.

हालांकि ट्रंप लगातार ईरान के साथ समझौता जल्द होने की बात कहते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई औपचारिक समझौता सामने नहीं आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर होर्मुज स्ट्रेट खुलता है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तत्काल खतरा नहीं माना जाता, तो अमेरिका औपचारिक परमाणु समझौते के बजाय इसी आधार पर संघर्ष खत्म करने का रास्ता चुन सकता है.

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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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