"अमेरिका में नहीं चाहिए 20 साल का तनाव": भारतीय महिला का वीडियो वायरल, छिड़ी US vs Germany की बहस
आकांक्षा खंडेलवाल, फोटो इंस्टाग्राम
शिक्षा, नौकरी और बेहतर लाइफस्टाइल की तलाश में विदेश जाने वाले भारतीयों के बीच अब अमेरिका के अलावा यूरोपीय देश भी पहली पसंद बनते जा रहे हैं. जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला, आकांक्षा खंडेलवाल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर बताया कि 2 साल अमेरिका में रहने के बाद उन्होंने जर्मनी में बसने का फैसला क्यों किया. हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद यूएस और जर्मन को लेकर बहस शुरू हो गई है.
सोशल मीडिया पर अपने जर्मनी के जीवन से जुड़े वीडियो साझा करने वाली आकांक्षा ने कहा, "2 साल अमेरिका में रहने के बाद मुझे समझ आ गया कि मुझे अगले 20 साल वहां क्यों नहीं रहना. यह जानना बहुत जरूरी है कि आपको जिंदगी में क्या चाहिए, और मुझे शांति चाहिए."
उन्होंने कहा कि वह अपनी पूरी जिंदगी गाड़ी के अंदर बिताने, पेट्रोल और इंश्योरेंस के खर्चों की चिंता करने में नहीं निकालना चाहती थीं. अपने वीडियो में पेड़-पौधों से घिरी सड़कें और शांत माहौल दिखाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की प्रकृति से भरी और सहज जीवनशैली पसंद है.
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वीजा की अनिश्चितता और स्थायी निवास
आकांक्षा ने अमेरिका छोड़ने का सबसे बड़ा कारण वीजा की अनिश्चितता को बताया. उन्होंने कहा, "मुझे वीजा का तनाव नहीं चाहिए. मैं यह सोचते हुए समय नहीं बिताना चाहती कि मेरा वीजा कब तक मान्य है."
जर्मनी के नियमों की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया, "मुझे जर्मनी आए सिर्फ तीन साल हुए हैं और इस साल मुझे यहां का पीआर (Permanent Residency) मिल जाएगा. यह जीवन में एक बहुत बड़ा सुकून है." उन्होंने सलाह दी कि विदेश जाने का फैसला करने से पहले लोगों को यह जरूर सोच लेना चाहिए कि वे वास्तव में अपनी जिंदगी से क्या चाहते हैं.
सोशल मीडिया पर बंटी राय
आकांक्षा के इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर अमेरिका बनाम जर्मनी की जीवनशैली को लेकर बहस छिड़ गई. एक यूजर ने आकांक्षा का समर्थन करते हुए लिखा, "अगर आपको कम भीड़-भाड़, शांति और खूबसूरत कुदरत पसंद है, तो जर्मनी आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह है." वहीं, एक अन्य यूजर ने अमेरिका का पक्ष लेते हुए लिखा, "आपकी बात का सम्मान है, लेकिन भारतीयों के लिए अमेरिकी जिंदगी यूरोप से बेहतर है. यूरोप में मेरे दोस्त मुझसे आधी कमाई करते हैं और 40% तक टैक्स देते हैं. जर्मनी में भाषा की चुनौती और घर मिलने में काफी परेशानी होती है. अमेरिका कोई यूटोपिया नहीं है, लेकिन वहां रफ्तार और अवसर ज्यादा हैं. जो लोग संघर्ष या भागदौड़ नहीं करना चाहते, वे इससे डरते हैं."
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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