कौन हैं ग्रीनलैंड के इनुइट, जो दशकों से खुद के शासन के लिए लड़ रहे, फिर से चर्चा में ले आए ट्रंप

Updated at : 29 Jan 2026 3:06 PM (IST)
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Who are Inuit people of Greenland fighting for the right to self-determination for decades.

ग्रीनलैंड के इनुइट समुदाय दशकों से स्वायत्ता के लिए लड़ रहे.

Who are Inuit people of Greenland: ग्रीनलैंड में इनुइट समुदाय 1000 साल पहले पहुंचा था. उन्होंने इस बेहद ठंडे द्वीप पर इतने सालों में जीने का अलग तरीका खोजा है. हालांकि, यही समुदाय दशकों से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है. अब ट्रंप के कब्जे वाले दावे के बाद उनके मुद्दे फिर से उभर आए हैं.

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Who are Inuit people of Greenland: ग्रीनलैंड को लेकर इन दिनों अमेरिका, डेनमार्क और यूरोपीय देशों के बीच काफी चर्चा हो रही है. लेकिन इस बहस में वहां के मूल निवासियों, यानी इनुइट समुदाय की आवाज अक्सर दब जाती है. ग्रीनलैंड की लगभग 57 हजार की आबादी में करीब 90 प्रतिशत लोग इनुइट हैं. वे अपनी भूमि को अपनी भाषा में ‘कलाल्लीत नुनाआत’ कहते हैं और खुद को एक स्वदेशी राष्ट्र के रूप में देखते हैं. दशकों से वे अपने भविष्य के बारे में खुद फैसला करने के अधिकार, यानी आत्मनिर्णय की मांग करते आ रहे हैं. 

इतिहासकारों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड लगभग 5,000 वर्षों तक द्वीप में प्रवेश का प्रमुख मार्ग रहा. इनुइट समुदाय का इतिहास बहुत पुराना है. उनके पूर्वज करीब एक हजार साल पहले ग्रीनलैंड पहुंचे थे. उन्होंने बेहद ठंडे और कठिन आर्कटिक वातावरण में जीने के अनोखे तरीके विकसित किए. वे कयाक नावों, कुत्तों द्वारा खींची जाने वाली स्लेज, शिकार के लिए विशेष हारपून और जानवरों की खाल से बने गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करते थे. उनकी संस्कृति में इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन और परस्पर निर्भरता को बहुत महत्व दिया जाता था.

करीब 986 ईस्वी में एरिक द रेड के नेतृत्व में नॉर्स लोग दक्षिणी ग्रीनलैंड में आकर बसे. कुछ समय तक नॉर्स और इनुइट समुदायों के बीच संपर्क और व्यापार हुआ, लेकिन संबंध हमेशा शांतिपूर्ण नहीं रहे. 14वीं सदी में जब मौसम और ठंडा हुआ तो नॉर्स लोग वहां की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल नहीं सके और लगभग 1500 तक वे ग्रीनलैंड से लुप्त हो गए. इसके विपरीत, इनुइट समुदाय अपनी लचीली जीवनशैली के कारण वहीं बना रहा.

ग्रीनलैंड के इनुइट समुदाय के लोग. फोटो- एक्स.

ग्रीनलैंड कैसे बना डेनमार्क का हिस्सा?

ग्रीनलैंड अटलांटिक महासागर के उत्तर और आर्कटिक के दक्षिण-पश्चिम में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है. 18वीं सदी में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण मजबूत किया. 1776 में रॉयल ग्रीनलैंड ट्रेडिंग डिपार्टमेंट की स्थापना के बाद पश्चिमी तट को लंबे समय तक एक बंद उपनिवेश के रूप में संचालित किया गया. 19वीं सदी तक राजधानी नूक के स्थानीय समाज में शिक्षित कलाल्लीत वर्ग उभरा, लेकिन शासन और नीतियों पर नियंत्रण डेनिश प्रशासन के हाथों में ही रहा. 

20वीं सदी की शुरुआत में ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैसले हुए, लेकिन इनमें स्थानीय लोगों की राय शामिल नहीं की गई. 1916 में अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के दावे को मान्यता दी. 1921 में डेनमार्क ने पूरे ग्रीनलैंड पर अपनी संप्रभुता घोषित कर दी, और 1933 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भी इस दावे को सही ठहराया. इन महत्वपूर्ण फैसलों में ग्रीनलैंड के लोगों से कोई सीधा परामर्श नहीं लिया गया.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1916 में अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के दावे को मान्यता दी. 1921 में डेनमार्क ने पूरे ग्रीनलैंड पर संप्रभुता घोषित की, जिसे 1933 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने बरकरार रखा. हालांकि विडंबना यह रही कि इन फैसलों में ग्रीनलैंडवासियों की राय शामिल नहीं की गई.

द्वितीय विश्व युद्ध और शीत युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व काफी बढ़ गया. अमेरिका ने वहां सैन्य अड्डे स्थापित किए, जिसके कारण कुछ इनुइट परिवारों को जबरन अपने घरों से हटाया गया. 1953 में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को उपनिवेश का दर्जा हटाकर अपने एक काउंटी का दर्जा दे दिया और वहां के लोगों को नागरिक अधिकार मिले. इसके साथ ही डेनिश भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की नीतियां भी अपनाई गईं.

बाद के वर्षों में ग्रीनलैंड ने धीरे-धीरे अधिक अधिकार हासिल किए. 1979 में जनमत संग्रह के बाद उसे होम रूल मिला, जिससे आंतरिक मामलों में उसे स्वायत्तता मिली. 2009 में स्वशासन की व्यवस्था लागू हुई, जिसने भविष्य में पूर्ण स्वतंत्रता की दिशा में रास्ता और स्पष्ट कर दिया.

आज ग्रीनलैंड के नेता खुले तौर पर आत्मनिर्णय के अधिकार की बात कर रहे हैं और यह संदेश अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बावजूद वैश्विक चर्चाओं में अक्सर यह सवाल ज्यादा उभरता है कि ग्रीनलैंड पर किस देश का प्रभाव होगा. जबकि आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए दशकों से जारी इनुइट समुदाय का संघर्ष खबरों में आ ही नहीं पाता.

इनुइट और अन्य समुदायों ने ट्रंप के दावों पर दिया सीधा जवाब

हालांकि, इनुइट समुदाय ट्रंप के दावों पर पूरी तरह स्पष्ट है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि कोई भी आर्कटिक लैंड का मालिक नहीं है. हम इस भूमि को शेयर करते हैं. ग्रीनलैंड 1953 से डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है. इसके प्रतिनिधि डेनमार्क की संसद में बैठते हैं.  इस महाद्वीप पर आजकल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर पड़ी हुई है. हालांकि, इस देश के लोगों ने अमेरिका के हर बयान का कड़ा जवाब दिया है. उन्होंने ट्रंप के चुनावी नारे (MAGA- मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) को मेक अमेरिका गो अवे बना दिया. उन्होंने खूब सारे तंजिया और मजाकिया वीडियोज बनाकर इसका जवाब दिया. इसमें डेनमार्क ने उसका भरपूर साथ दिया है.  

अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि वह यहां पर गोल्डन डोम लगाना चाहते हैं, ताकि रूस और चीन से यूरोप और उनके देश की रक्षा हो सके.  लेकिन, ट्रंप जिस तरह से रेयर अर्थ मैटेरियल्स के पीछे पड़े हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्लभ खनिजों ने उनके इरादों पर जरूर प्रभाव डाला होगा. ट्रंप को यह आईलैंड चाहिए, लेकिन इस आईलैंड के लोगों को अमेरिका नहीं चाहिए, यह तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया था. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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