रूस को फंड करेगा यूरोप? इंडिया-ईयू ट्रेड डील से नाखुश अमेरिका; अब US ट्रेजरी सेक्रेटरी ने यूक्रेनी कंधे का लिया सहारा

Updated at : 29 Jan 2026 10:32 AM (IST)
विज्ञापन
US Treasury Secretary Scott Bessent on India-US Trade Deal

अमेरिकी ट्रेड सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (बाएं) भारत और यूरोपियन यूनियन के नेता (दाएं). फोटो- एक्स.

US Treasury Secretary on EU-India FTA: अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत-ईयू ट्रेड डील पर अपनी नाखुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि इस डील से यूरोप अपने खिलाफ युद्ध को फंड करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेनी लोगों को दरकिनार करते हुए, यूरोप ने अपनी डील को फाइनलाइज किया है.

विज्ञापन

US Treasury Secretary on EU-India FTA: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच लगभग 20 साल से ट्रेड डील पर बातचीत चल रही थी. आखिरकार, यह 27 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से सामने आ गई. भारत को लगभग 45 करोड़ पब्लिक का बाजार मिलेगा, जिसकी इकोनॉमी लगभग 20 ट्रिलियन (19.4) है. इस ट्रेड डील से जहां भारत और यूरोप काफी खुश हैं, वहीं अमेरिका काफी नाराज नजर आ रहा है. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के यूरोप के फैसले की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस कदम से यह संकेत मिलता है कि यूरोपीय महाद्वीप ने यूक्रेनी लोगों के प्रति अपनी घोषित चिंता से ऊपर वाणिज्यिक हितों को प्राथमिकता दी है.

बुधवार को CNBC से बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि वह यूरोप के रुख से निराश हैं. उनका दावा है कि यूक्रेन में जारी युद्ध के बावजूद ब्रसेल्स ने व्यापारिक हितों को तरजीह दी. उन्होंने कहा, “उन्हें अपने लिए जो बेहतर लगे वह करना चाहिए, लेकिन मैं आपको बताऊँगा, मुझे यूरोपीय बेहद निराशाजनक लगते हैं.” भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लगभग एक साल से अटकी पड़ी है. इस पर कई दौर की बातचीत के बाद भी सहमति नहीं बन पाई है. भारत अपने एग्रीकल्चर और डेयरी मार्केट पर समझौता नहीं करना चाहता. वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका अपने जीएम कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में उतारने पर ही अड़ा है. 

भारत और यूरोप दोनों को होगा फायदा

बेसेंट यह टिप्पणी उस दिन के एक दिन बाद आई जब यूरोपीय संघ ने भारत के साथ लंबे समय से अटके ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप दिया. मंगलवार को हुई इस डील को ‘सभी समझौतों की जननी (mother of all deals)’ कहा जा रहा है. इस समझौते का उद्देश्य बाईलैटेरल ट्रेड को बढ़ाना और वैश्विक व्यापार तनावों के बीच अमेरिका पर यूरोप की डिपेंडेंसी कम करना है. समझौते के तहत मूल्य के आधार पर व्यापार होने वाले 96.6 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ समाप्त या कम किए जाएंगे. इससे 2032 तक भारत को यूरोपीय संघ के निर्यात के संभावित रूप से दोगुना होने और यूरोपीय कंपनियों को लगभग 4 अरब यूरो के शुल्क की बचत होने की उम्मीद है. वहीं भारत यूरोपीय कार और वाइन पर लगने वाले टैक्स को कम करेगा. 

‘अब पता चला क्यों अमेरिका के साथ डील नहीं कर रहा था ईयू’

बेसेंट ने कहा कि यही समझौता यह भी स्पष्ट करता है कि यूरोपीय संघ ने पिछले साल भारत पर उच्च टैरिफ लगाने के वॉशिंगटन के फैसले के साथ तालमेल क्यों नहीं बैठाया. उन्होंने कहा, ‘यूरोपीय हमारे साथ जुड़ने को तैयार नहीं थे. अब पता चलता है कि वे यह व्यापार समझौता करना चाहते थे. इसलिए हर बार जब आप किसी यूरोपीय को यूक्रेनी लोगों के महत्व की बात करते सुनें, तो याद रखें कि उन्होंने व्यापार को यूक्रेनी लोगों से ऊपर रखा.’ उन्होंने यूरोपीय देशों पर रूस के कच्चे तेल से बने परिष्कृत ईंधन उत्पाद खरीदकर परोक्ष रूप से रूस के युद्ध को वित्तपोषित करने का आरोप लगाया. बेसेंट ने कहा, ‘रूसी तेल भारत जाता है, वहाँ से रिफाइंड प्रोडक्ट निकलते हैं और यूरोपीय वही उत्पाद खरीदते हैं. वह अपने ही खिलाफ चल रहे युद्ध को फंड कर रहे हैं.’

पीएम मोदी ने डील को समृद्धि का खाका बताया

भारत और ईयू के बीच यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वजह से बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव और बदलते टैरिफ ढांचों के बैकड्रॉप में हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे साझा समृद्धि का नया खाका बताया और कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है. व्यापार समझौते के साथ-साथ भारत और यूरोपीय संघ ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी और एक मोबिलिटी समझौता भी अंतिम रूप दिया. पीएम मोदी ने कहा कि यह मजबूत होती साझेदारी वैश्विक स्तर पर सकारात्मक भूमिका निभाएगी.

परोक्ष रूप से रूस को फायदा पहुंचाएगा ईयू

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश ऐसी व्यापारिक गतिविधियाँ जारी रखकर अपनी ही रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर रहे हैं. बेसेंट ने कहा कि यह रुख यूरोप की नीति में विरोधाभास को उजागर करता है. यह इनडायरेक्ट तरीके से मॉस्को को लाभ पहुंचाती हैं. उनका तर्क था कि जहां एक ओर इस संघर्ष का सीधा प्रभाव यूरोप पर पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोप रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के बजाय व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता देता रहा है. उन्होंने कहा कि भले ही यूरोपीय नेता सार्वजनिक रूप से यूक्रेन का समर्थन करते हों, लेकिन जारी ट्रेड फ्लो रूस पर फाइनेंशियल प्रेशर को कम कर रहे हैं. 

भारत का 19वां ट्रेड एग्रीमेंट

इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लगभग दो दशक पहले शुरू हुई वार्ताओं का समापन है. यह भारत का 19वां व्यापार समझौता है. इससे 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बाजार में भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने और कई घरेलू उद्योगों में प्रतिस्पर्धा के ढांचे में बदलाव आने की उम्मीद है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक व्यापार ऊँचे अमेरिकी टैरिफ, कमजोर आपूर्ति शृंखलाओं और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण दबाव में है. फिलहाल भारत पर अमेरिका की ओर से बढ़े हुए टैरिफ लागू हैं, जबकि यूरोपीय संघ पर भी अमेरिकी शुल्कों में संभावित बढ़ोतरी का खतरा मंडरा रहा है.

डील से पहले भी बेसेंट ने ऐसी ही टिप्पणी की थी

ट्रेजरी सेक्रेटरी ने इंडिया-ईयू ट्रेड डील होने से पहले ही पिछले सप्ताह भी इसी तरह की चिंताएँ उठाई थीं. ABC न्यूज के साथ एक पहले के इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वॉशिंगटन ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जबकि यूरोप अपने व्यापार समझौते को आगे बढ़ा रहा था.’ बेसेंट ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन ने संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों में मॉस्को पर अपने यूरोपीय काउंटरपार्ट्स की तुलना में अधिक दबाव डाला है. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर समझौता कराने के लिए काम किया है. उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूरोप की तुलना में काफी बड़े त्याग किए हैं.

ये भी पढ़ें:- भारतवंशी अधिकारी पर आरोप; US सरकार की सेंसिटिव इनफॉर्मेशन ChatGPT पर डाल दीं, कौन हैं डॉ. मधु गोट्टुमुक्कला?

ये भी पढ़ें:- US से बढ़ा तनाव; भारत के डिप्टी NSA से मिले ईरान के नेशनल सिक्योरिटी ऑफिसर, क्या तैयारी कर रहा शिया मुल्क?

विज्ञापन
Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola