Video : बातचीत फेल होना अमेरिका के लिए बुरी खबर, देखें इस्फहान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने क्या कहा

Updated at : 12 Apr 2026 12:12 PM (IST)
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JD Vance

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (गोल घेरे में असिस्टेंट प्रोफेसर, मोहसेन फरखानी)

Video : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार (12 अप्रैल) सुबह बताया कि इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई बातचीत फेल हो गई. 21 घंटे तक कोशिश करने के बाद भी दोनों देश अपने मतभेद खत्म नहीं कर पाए और कोई समझौता नहीं हो सका. जेडी वेंस के बयान पर इस्फहान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की प्रतिक्रिया आयी है. नीचे पढ़ें उन्होंने क्या कहा.

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Video : इस्फहान यूनिवर्सिटी (ईरान में है) में असिस्टेंट प्रोफेसर, मोहसेन फरखानी ने कहा कि यह ईरान के लिए कोई बुरी खबर नहीं है, क्योंकि उन्हें पहले से ही ऐसे नतीजे की उम्मीद थी. उन्होंने कहा कि ईरान ने इन बातचीत में पहले से ही गहरे अविश्वास के साथ कदम रखा था. फरखानी के मुताबिक, असल में यह अमेरिका के लिए ज्यादा नुकसानदेह है, क्योंकि वह अपने किसी भी मकसद में सफल नहीं हो पाया.

उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका को बातचीत के लिए पाकिस्तान की मदद लेनी पड़ी, जो उसकी कमजोर स्थिति दिखाता है. साथ ही, उन्होंने कहा कि ईरानी टीम को अब लगने लगा है कि ट्रंप की टीम इन बातचीतों को लेकर गंभीर नहीं है. बातचीत का फेल होना ईरान नहीं बल्कि अमेरिका के लिए बुरी खबर है.

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने की आशंका

असिस्टेंट प्रोफेसर ने कहा कि अमेरिका बातचीत में बराबरी या अच्छे इरादे से नहीं आता, बल्कि इसे कमजोरी मानता है. उन्होंने कहा कि 40 दिन की जंग में अमेरिका को नुकसान हुआ, इसलिए वह हालात संभालने के लिए बातचीत चाहता था. लेकिन सख्त शर्तों और दबाव की वजह से कोई समझौता नहीं हो पाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप की सरकार पर लॉबी का असर है और बेंजामिन नेतन्याहू का दबाव भी है, जिससे हालात और बिगड़े. उनके मुताबिक, इसी वजह से बातचीत फेल हुई और फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है.

यह भी पढ़ें : अमेरिका-ईरान की बातचीत फेल: पाकिस्तान बोला- जारी रखेंगे मध्यस्थता, खाली हाथ लौटे VP जेडी वेंस

ईरान ने उनकी शर्तें मानने से इनकार कर दिया : जेडी वेंस

जेडी वेंस ने कहा कि हम पिछले 21 घंटे से इस मुद्दे पर लगातार बात कर रहे थे और अच्छी बात यह रही कि कई जरूरी चर्चाएं हुईं. लेकिन खराब बात यह है कि हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाए. उन्होंने बताया कि अमेरिका ने साफ कर दिया था कि किन बातों पर वह मान सकता है और किन पर नहीं. वेंस के मुताबिक, ईरान ने उनकी शर्तें मानने से इनकार कर दिया. जब उनसे पूछा गया कि असली दिक्कत क्या थी, तो उन्होंने ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया.

क्या परमाणु हथियार पर अटक गई बात?

वेंस ने कहा कि मैं अधिक विस्तार से नहीं बताऊंगा क्योंकि 21 घंटे तक बंद कमरे में बातचीत करने के बाद मैं सार्वजनिक रूप से बात नहीं करना चाहता. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान खुलकर भरोसा दे कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा और न ही ऐसे साधन जुटाएगा जिससे जल्दी हथियार बना सके. वेंस के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा मकसद यही है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर पाए. इसी टारगेट के साथ ये बातचीत की गई थी.

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Amitabh Kumar

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By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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