अफगानिस्तान में महिलाओं के पढ़ने पर लगी पाबंदी के खिलाफ UNSC, कहा- इससे देश को होगा बड़ा नुकसान

Published by : Pritish Sahay Updated At : 28 Dec 2022 8:01 AM

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अफगानिस्तान में महिलाओं के विश्वविद्यालयों में दाखिले पर पाबंदी को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चिंता जाहिर की है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा कि कोई भी देश अपनी आधी आबादी को बाहर कर सामाजिक और आर्थिक रूप से विकास नहीं कर सकता.

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अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद धीरे-धीरे तालिबान ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में तालिबान ने महिलाओं को लेकर नया फरमान जारी किया जिसकी पूरी दुनिया में निंदा हो रही है. दरअसल, तालिबान ने अफगानिस्तान के विश्वविद्यालयों में लड़कियों के दाखिले पर बैन कर दिया है. तालिबान के इस फैसले का अन्य देशों के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ने भी चिंता जताई है.

लड़कियों की शिक्षा को लेकर तालिबानी नीतियों की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है. इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रेस रिलीज भी जारी की है. एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने महिलाओं के विश्वविद्यालयों में बैन को लेकर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि इससे देश की आर्थिक और सामाजिक बर्बादी होगी.  

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने की यह अपील: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर बढ़ती पाबंदियों की निंदा की है. साथ ही तालिबानी शासकों को इन प्रतिबंधों को तुरंत वापस लेने की अपील की है. यूएनएससी ने कहा है कि महिलाओं को गैर-सरकारी संगठनों के लिए काम करने से रोकने के फैसले के भयानक परिणामों हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा कि कोई भी देश अपनी आधी आबादी को बाहर कर सामाजिक और आर्थिक रूप से विकास नहीं कर सकता.

तेजी से बदली है तालिबान ने अपनी नीतियां: गौरतलब है कि अफगानिस्तान में शासन संभालने के बाद तालिबान ने पहले तो अपनी उदार छवि पेश की. महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करने के कई वादे किए. लेकिन सत्ता हाथ में आने के बाद धीरे-धीरे वो कट्टरवाद की ओर मुड़ने लगा. अफगानिस्तान में तालिबान ने इस्लामी कानून शरिया को बहुत सख्ती से लागू किया है और महिलाओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए हैं.
भाषा इनपुट के साथ

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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