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रेप पर रोक को लेकर पाकिस्तान में दो अध्यादेश को मंजूरी, कौमार्य परीक्षण पर लगी रोक, दोषी का किया जा सकता है बधियाकरण, लेकिन...

By Prabhat khabar Digital
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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
Photo : Twitter

इस्लामाबाद : पाकिस्तान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) नेतृत्ववाली सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बलात्कार और अन्य यौन अपराधों पर रोक लगाने के लिए दो अध्यादेशों को मंजूरी दे दी. इससे पहले कैबिनेट ने सैद्धांतिक मंजूरी दी थी.

मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के मुताबिक, दोनों अध्यादेश एंटी-रेप (इन्वेस्टीगेशन एंड ट्रायल) ऑर्डिनेन्स-2020 और क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेन्स-2020 है. साथ ही कहा है कि पाकिस्तान के विधायी इतिहास में देश भर में महिलाओं, लड़कियों और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण क्षण है.

मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के मुताबिक, बलात्कार पीड़िता से आरोपित जिरह नहीं कर सकता. केवल जज और आरोपित का अधिवक्ता ही जिरह कर सकता है. साथ ही दोषी पाये जाने पर रसायनिक बधियाकरण तक किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए दोषी की सहमति लेनी होगी, अन्यथा वह अदालत के समक्ष चुनौती दे सकता है.

एंटी-रेप (इन्वेस्टीगेशन एंड ट्रायल) ऑर्डिनेन्स-2020 की विशेषताएं

  • विशेष न्यायालयों की स्थापना

  • कमिश्नर या डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में एंटी-रेप क्राइसिस सेल का निर्माण, जो तुरंत पंजीकरण सुनिश्चित करेगा

  • एफआईआर, चिकित्सा परीक्षा और फोरेंसिक विश्लेषण आदि. अमानवीयता को समाप्त करना और मेडिकल-लीगल परीक्षण के दौरान बलात्कार पीड़िता की कौमार्य परीक्षण (टू फिंगर टेस्ट) को नष्ट करना और इसके लिए संभावित मूल्य के किसी भी लगाव को समाप्त करना.

  • आरोपित द्वारा बलात्कार पीड़िता की जिरह पर रोक लगाना, जिससे न्यायाधीश और आरोपी के वकील को ही अनुमति मिल सके;

  • इन-कैमरा ट्रायल

  • पीड़ितों और एक से अधिक गवाहों के लिए सुरक्षा

  • जांच और परीक्षण के दौरान आधुनिक उपकरणों का उपयोग

  • कानूनी सहायता और न्यायिक प्राधिकरण के जरिये पीड़िता को कानूनी सहायता

  • स्वतंत्र सहायता सलाहकारों का निर्माण, जो समर्थन प्रदान करेंगे

पीड़िता के लिए

  • विशेष न्यायालयों के लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति

  • जिला पुलिस अधिकारियों की अध्यक्षता में जेआईटी द्वारा जांच

  • कानून के समग्र कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निशुल्क आधार पर विशेष समिति का निर्माण

क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेन्स- 2020 की मुख्य विशेषताएं

  • पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी) की मौजूदा धारा 375 के नये प्रावधान के साथ प्रतिस्थापन, ताकि 'बलात्कार' की नयी परिभाषा प्रदान की जा सके, जो सभी उम्र की महिलाओं और 18 वर्ष से कम आयु के पुरुष पीड़ितों तक विस्तारित होगी.

  • बलात्कार के अलावा, सामूहिक बलात्कार के अपराध को भी दायरे में रखा जायेगा

  • पहले या बार-बार अपराधियों के संबंध में, रासायनिक पृथक्करण की अवधारणा को मुख्य रूप से पुनर्वास के रूप में भी पेश किया गया है, और सहमति के अधीन है.

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