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चीन को मिल गई उड़ने वाली गिलरियां, तीन देशों के वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्र में खोजने में की जी-तोड़ कोशिश

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
चीन में मिलीं उड़ने वाली गिलहरियां.
चीन में मिलीं उड़ने वाली गिलहरियां.
फोटो साभार.

बीझिंग : दुनियाभर में कोरोना महामारी को भगवान के प्रसाद की तरह बांटने वाले देश चीन को एक नया जैविक हथियार मिल गया है. ड्रैगन के नाम से विश्वविख्यात चीन को दो उड़ने वाली ऊनी गिलहरियां मिली हैं. इंडिया टूडे के हिंदी समाचार चैनल आज तक की वेबसाइट की खबर के अनुसार, चीन को उड़ने वाली जो गिलहरियां मिली हैं, वे यूपेटॉरस सिनरेयिरस प्रजाति की हैं. खबर के इन दोनों में से एक गिलहरी चीन के यूनान प्रांत में दिखाई दी और दूसरी पड़ोसी देश तिब्बत के स्वायत्तशासी प्रदेश में.

मजे की बात यह है कि चीन में उड़ने वाली मिलीं इन दोनों गिलरियों को खोजने के लिए अकेला केवल चीन ही नहीं लगा था, बल्कि चीन के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिक भी जी-तोड़ कोशिश कर रहे थे. इन तीनों देशों के वैज्ञानिकों की पूरी टीम इन दोनों गिलहरियों को खोजने में जुटी थी.

इन दोनों गिलहरियों के बारे में जूलॉजिकल जर्नल ऑफ द लीनियन सोसायटी में एक लेख प्रकाशित किया गया है. इस लेख में यह कहा गया है कि इन दोनों गिलहरियों को ऊनी कहने का अर्थ झबरीली है. इनकी देह पर काफी बाल यानी फर हैं. इसीलिए इन दोनों को ऊनी कहा गया है. चीन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों की टीम ने तिब्बत के शिगात्से और यूनान प्रांत से नुजियांग में उड़ने वाली इन दोनों गिलहरियों को देखो है.

वैज्ञानिकों की टीम ने इनका एक वीडियो भी शूट किया है. ये दोनों गिलहरियां जिस क्षेत्र में देखी गई हैं, हिमालय का मध्य और पूर्वी क्षेत्र है. हालांकि, यह बात दीगर है कि इन तीनों देशों के वैज्ञानिकों ने इस प्रकार की गिलहरियों को हिमालय के पश्चिमी क्षेत्र में खोजने का प्रयास किया था. चौंकाने वाली बात यह है कि हिमालय के जिस पश्चिमी क्षेत्र में इन्हें खोजा जा रहा था, वह गंगा और यारलंग सांगपो नदी का विभाजित क्षेत्र है.

चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गाओलिगोंग माउंटेन नेशनल नेचर रिजर्व के अधिकारियों के हवाले से खबर दी है कि पूर्वी और मध्य हिमायल में मिलीं उड़ने वाली गिलहरियों के दांत और बालों का रंग हिमालय के पश्चिमी क्षेत्र में मिलने वाली गिलहरियों से बिल्कुल भिन्न है. इतना ही नहीं, इनके जींस में 45 से 1 करोड़ साल का अंतर भी है. इसका मतलब यह कि इन दोनों गिलहरियों की प्रजातियां अलग है, जो केवल हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों में रहती हैं.

Posted by : Vishwat Sen

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