ईरान-चीन के तेल धंधे पर ट्रंप-नेतन्याहू का तगड़ा प्रहार; अब लगेगा 25% भारी टैक्स

Updated at : 15 Feb 2026 12:28 PM (IST)
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Trump Netanyahu Plan Block Iran China Oil Trade

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू

Trump Netanyahu Plan: ईरान के तेल मार्केट की कमर तोड़ने के लिए ट्रंप और नेतन्याहू ने हाथ मिला लिया है. व्हाइट हाउस की सीक्रेट मीटिंग में चीन को होने वाली सप्लाई रोकने का फुल प्रूफ प्लान बना. अगर चीन नहीं माना, तो अमेरिका उस पर 25 प्रतिशत भारी टैक्स लगा सकता है.

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Trump Netanyahu Plan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की हाल ही में व्हाइट हाउस में एक अहम मीटिंग हुई. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि ईरान के तेल निर्यात (Oil Export) को रोकने के लिए अब अमेरिका ‘फुल फोर्स’ यानी पूरी ताकत लगा देगा.

एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प प्रशासन अब ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ बनाने की तैयारी में है. इसका सीधा असर उस तेल पर पड़ेगा जो ईरान, चीन को बेचता है.

चीन ही क्यों है ईरान का सबसे बड़ा सहारा?

कप्लर  के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान जितना भी समुद्री रास्ते से तेल बेचता है, उसका 80% से ज्यादा हिस्सा अकेला चीन खरीदता है. अमेरिकी पाबंदियों की वजह से ईरान के पास तेल बेचने के लिए ज्यादा ग्राहक नहीं बचे हैं, इसलिए चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार बन गया है.

कितना तेल जाता है: पिछले साल चीन ने ईरान से रोजाना औसतन 13.8 लाख बैरल तेल खरीदा.

चीन का खेल: चीन का कहना है कि ईरान के साथ उसका व्यापार कानूनी है. हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि ईरान से आने वाले तेल को अक्सर मलेशिया या इंडोनेशिया का बताकर चीन लाया जाता है ताकि कागजों पर हेराफेरी की जा सके. चीनी कस्टम डेटा में जुलाई 2022 के बाद से ईरान से तेल खरीदने का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया है.

ट्रंप का नया एक्शन प्लान

ट्रंप ने हाल ही में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है. इसके तहत अगर कोई भी देश ईरान के साथ व्यापार करता है, तो अमेरिका उस देश पर 25% तक का टैरिफ (टैक्स) लगा सकता है. यह फैसला चीन जैसे देशों को ईरान से दूर करने के लिए लिया गया है.

दबाव बनाने के पीछे का असली मकसद

अमेरिका और इजरायल चाहते हैं कि तेल की कमाई रुकने से ईरान की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाए. एक्सियोस के अनुसार, अधिकारियों का मानना है कि अगर ईरान का पैसा रुकेगा, तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर बातचीत की मेज पर आएगा और झुकने को मजबूर होगा.

युद्ध की तैयारी और डिप्लोमेसी साथ-साथ

एक तरफ पिछले हफ्ते ओमान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत हुई है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने अपनी नौसेना को भी तैनात कर दिया है. अमेरिकी सेना किसी भी बड़े ऑपरेशन के लिए तैयार है, ताकि अगर डिप्लोमेसी काम न आए तो सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जा सके. चीन के विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया है, क्योंकि वहां फिलहाल लूनर न्यू ईयर की छुट्टियां चल रही हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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