पहले मारा अब ईरान के साथ धंधा करना चाहते हैं ट्रंप, भारत ने किया जिससे इनकार, बेचना चाहते हैं वही चीज
डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स (@WhiteHouse).
Trump Iran Agriculture Deal: अमेरिका ने ईरान के 12 अरब डॉलर के जमे हुए फंड को लेकर नया प्रस्ताव रखा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस रकम से अमेरिकी गेहूं, सोयाबीन और मक्का खरीदकर ईरान भेजा जाएगा. हालांकि, ईरान ने इसका विरोध किया है.
Trump Iran Agriculture Deal: अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है. अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से पूरे 40 दिन तक ईरान में कई जगह हमले किए. इसके बाद सीजफायर हुआ, लेकिन बाद में भी छिटपुट हमले होते रहे. अब अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के साथ बिजनेस करना चाहते हैं. इसके लिए अरबों डॉलर की उस रकम का इस्तेमाल किया जाएगा, जो लंबे समय से प्रतिबंधों के कारण रोक दी गई थी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के विदेशों में जमा और अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत फंसे पैसों का इस्तेमाल अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने में किया जाएगा. इनमें गेहूं, सोयाबीन और मक्का जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें बाद में ईरान भेजा जाएगा. इसी कृषि उत्पाद को अमेरिका भारत को बेचना चाहता था, लेकिन भारत ने इससे साफ इनकार कर दिया था.
ईरान के पैसे से अमेरिकी किसानों का फायदा
ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में किसानों की मौजूदगी में कृषि से जुड़े एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा, ‘दुनिया भर में अमेरिकी निर्यात के लिए बाजार खोले जा रहे हैं. हम किसानों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं. हमारे पास एक और नया बाजार आ रहा है और उसका नाम है खूबसूरत देश ईरान. यह एक सुंदर जगह है.’
इसके बाद ट्रंप ने ईरान में खाद्य संकट का जिक्र करते हुए कहा, ‘क्या कोई वहां जाना चाहेगा? इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में भोजन को लेकर मुश्किलें हैं और हम उनके कुछ पैसे लेंगे और उससे गेहूं, सोयाबीन और मक्का खरीदेंगे, बहुत बड़ी मात्रा में. यह प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है और यह काफी बड़ा कदम होगा. मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा होगा.’
फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने पर बनी थी सहमति
सोमवार को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर पहली दौर की शांति वार्ता हुई थी. इससे पहले ट्रंप ने पिछले सप्ताह फ्रांस के वर्साय पैलेस में अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत कुछ शर्तों के साथ करीब 12 अरब डॉलर के जमे हुए ईरानी फंड को जारी करने की बात कही गई थी.
अमेरिका ने बताया- पैसा एस्क्रो खाते में रहेगा
इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अगर ईरान के फंड को जारी किया जाता है तो इसका फायदा अमेरिकी किसानों को होगा और इससे ईरानी लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. इसके अगले दिन ट्रंप ने भी इस पर मुहर लगाई.
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा जारी किया जा रहा पैसा और प्रतिबंधों से जुड़ी राशि एक एस्क्रो खाते में जाएगी, जिसे अमेरिका नियंत्रित करेगा. इसका इस्तेमाल केवल भोजन और चिकित्सा सामग्री खरीदने के लिए किया जाएगा.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘इन चीजों में मक्का, गेहूं और सोयाबीन शामिल हैं, जो हमारे महान अमेरिकी किसानों से खरीदे जाएंगे. ये वे चीजें हैं जिनकी ईरान को बहुत जरूरत है.’
ईरान ने अमेरिका की शर्तों को किया खारिज
अगर यह योजना लागू होती है तो अमेरिका और ईरान के बीच बेहद सीमित व्यापार संबंधों में करीब 12 अरब डॉलर तक की राशि शामिल हो सकती है. हालांकि, अभी तक तेहरान इस बात पर सहमत नहीं दिख रहा. ईरान का कहना है कि अगर उसके फंड जारी किए जाते हैं तो उनका इस्तेमाल ईरानी नागरिकों के लिए जरूरी सामान खरीदने में किया जाएगा, न कि अमेरिका की तय की गई शर्तों के अनुसार.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान को अपने फंड के इस्तेमाल का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा, ‘ये संपत्तियां जारी की जाएंगी और ईरान अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी सामान या वस्तु की खरीद के लिए इनका पूरी स्वतंत्रता के साथ इस्तेमाल करेगा.’
उन्होंने आगे कहा कि अगर कृषि उत्पाद खरीदे जाते हैं तो फैसला कीमत और गुणवत्ता के आधार पर होगा, न कि वॉशिंगटन की ओर से तय की गई शर्तों के अनुसार. बघाई ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा, ‘यह दिलचस्प है कि जिस युद्ध का उद्देश्य ईरानी सभ्यता को नष्ट करना और ईरान को कमजोर करना बताया गया था, वही अब अमेरिकी किसानों को समृद्ध बनाने की बात में बदल गया है.’
जिनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरैनी ने भी अमेरिका के दावे को खारिज किया. उन्होंने कहा, ‘इन संपत्तियों के साथ क्या करना है, इसका फैसला करने वाला एकमात्र देश ईरान है.’ उन्होंने कहा कि अमेरिका यह तय नहीं कर सकता कि ईरान अपने पैसे का इस्तेमाल कैसे करेगा.
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शांति वार्ता के बीच आया प्रस्ताव
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है. ट्रंप ने इसे मानवीय संकट बताते हुए कहा, ‘यह एक मानवीय संकट है और मुझे लगता है कि देर होने से पहले अभी मदद करना जरूरी है. बातचीत अच्छी चल रही है.’ ट्रंप ईरान को खाद्यान्न पहुंचाने से अपनी मानवीय सहायता और व्यापार बढ़ाने की अपनी पहल भी मजबूत कर सकेंगे. हालांकि, ईरान इसे अपनी आर्थिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है. इससे एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि ईरान के जमे हुए पैसे का अंतिम इस्तेमाल कैसे होगा?
ट्रंप के निशाने पर कई मुद्दे
हालांकि, ट्रंप अपने इस आइडिया के जरिए 3-4 निशाने एक साथ साधने की कोशिश कर रहे हैं. वह अपने किसानों से जुड़े मुद्दे का समाधान करना चाहते हैं, जो उनका सबसे बड़ा वोटर बेस है. दूसरा वह ईरान की संपत्तियों को मुक्त भी कर रहे हैं, लेकिन उससे बिजनेस भी बढ़ा रहे हैं. वहीं इसके जरिए वह भारत और चीन को अपने कृषि उत्पाद बेचने में असफल रहे थे, इससे वह इन देशों को भी संदेश दे सकेंगे. भारत ने अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील में कृषि क्षेत्र को बाहर रखा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन चाहता है कि भारत अपना एग्रीकल्चर मार्केट खोले.
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By Anant Narayan Shukla
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