Saudi Arabia backed Yemen Govt retakes Hadramout Al-Mahra: यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच शह और मात का खेल चल रहा है. पहले यूएई समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने हदरामौत में सऊदी अरब के समर्थन से चल रही सरकार को हटाया. अब सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों ने दावा किया है कि उन्होंने STC से हदरामौत और अल-महारा प्रांतों का नियंत्रण दोबारा हासिल कर लिया है. खाड़ी क्षेत्र की दो प्रमुख शक्तियों के बीच जारी खींचतान के बीच यह नया घटनाक्रम सामने आया है. इससे पहले सऊदी अरब ने दक्षिणी यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमला किया था, जहां उसका दावा था कि विद्रोहियों के लिए यूएई से हथियार आए थे. सऊदी ने यूएई को अपने सैनिकों को वहां से निकालने के लिए 24 घंटे का वक्त दिया था. इसके बाद सऊदी ने हदरामौत में हमला करके 20 लड़ाकों को मारा था.
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष राशद मोहम्मद अल-अलीमी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि सऊदी समर्थित “होमलैंड शील्ड फोर्सेज” ने शुक्रवार से शुरू हुए एक सैन्य अभियान के बाद सऊदी सीमा से सटे इन प्रांतों में सभी सैन्य और सुरक्षा ठिकानों पर फिर से कब्जा कर लिया है. उन्होंने इस कार्रवाई को “रिकॉर्ड सफलता” करार दिया. नियंत्रण बहाल होने के बाद हदरामौत के गवर्नर सलेम अल-खानबाशी ने घोषणा की कि उन्होंने सैयून शहर से अपने आधिकारिक दायित्वों को दोबारा संभाल लिया है. अल-खानबाशी इस अभियान में अहम भूमिका निभा रहे थे.
राष्ट्रपति अल-अलीमी की हदरामौत के नागरिकों से अपील
अपने बयान में अल-अलीमी ने बताया कि उन्होंने फोन पर अल-खानबाशी से बातचीत की, जो होमलैंड शील्ड फोर्सेज के कमांडर भी हैं. उन्होंने स्थानीय प्रशासन की भूमिका और प्रमुख ठिकानों को बहाल व सुरक्षित करने में बलों की तेज और प्रभावी कार्रवाई की सराहना की. बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति अल-अलीमी ने हदरामौत के नागरिकों से अपील की कि वे सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक सुविधाओं की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन और होमलैंड शील्ड फोर्सेज का साथ दें. उन्होंने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और सामुदायिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया, ताकि कानून का शासन कायम रह सके.”
इसके अलावा, अल-अलीमी ने अल-महारा के गवर्नर मोहम्मद अली यासिर से भी फोन पर बातचीत की. इस दौरान उन्हें प्रांत की मौजूदा स्थिति और सैन्य शिविरों व संप्रभु प्रतिष्ठानों को होमलैंड शील्ड फोर्सेज तथा स्थानीय प्रशासन को सौंपने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई. उन्होंने कहा कि ये कदम सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेंगे, सार्वजनिक और निजी हितों की रक्षा करेंगे तथा सामाजिक शांति को बनाए रखने में सहायक होंगे.
शुक्रवार को शुरू किया गया सैन्य अभियान
इससे पहले शुक्रवार को अल-खानबाशी ने “कैंपों पर नियंत्रण” नामक एक सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य सैन्य ठिकानों पर शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से दोबारा कब्जा करना था. अल अरेबिया के मुताबिक, होमलैंड शील्ड फोर्सेज ने वादी हदरामौत क्षेत्र, जिसमें सैयून और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल हैं, को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है. इसके बाद बल अब हदरामौत पठार और सैयून से मुकल्ला को जोड़ने वाली सड़क पर मौजूद STC से जुड़े शेष लड़ाकों का पीछा कर रहे हैं.
साथ-साथ लड़ रहे यूएई-सऊदी आपस में भिड़े
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति की जड़ें एक दशक से भी पहले की हैं, जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने मिलकर यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन का नेतृत्व किया था, जिन्होंने देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था. समय के साथ यह सैन्य अभियान अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल नहीं हो सका. इसके बाद यूएई ने अपने रणनीतिक हितों पर ध्यान केंद्रित करते हुए दक्षिणी यमन में STC को समर्थन और हथियार उपलब्ध कराए. जब सऊदी अरब को यह महसूस हुआ कि उसकी सीमाओं के पास STC का बढ़ता प्रभाव उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, तो उसने स्थिति में सीधे हस्तक्षेप करने का फैसला किया.
एएनआई के इनपुट के साथ.
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