पहले सहमति फिर यू टर्न, ट्रंप के गाजा शांति योजना पर क्यों पलटा पाकिस्तान?

ओवल ऑफिस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करते शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर.
Pakistan U Turn on Donald Trump's Gaza Peace Plan: डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा शांति योजना के तहत 20 सूत्रीय योजना पेश की थी, तो पाकिस्तान ने उस पर खुशी जताई थी. लेकिन दो दिन ही बीते हैं कि पाक ने इस पर पूरी तरह पलटी मार दी है, जबकि इजरायल और हमास ने इसे लागू करने की सहमति जता दी है.
Pakistan U Turn on Donald Trump’s Gaza Peace Plan: इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध अब शांति की ओर जाता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से पेश की गई गाजा शांति योजना पर हमास ने भी आंशिक रूप से हामी भर दी है. 20 सूत्रीय इस प्लान पर इजरायल भी पहले चरण को लागू करने की योजना बना रहा है. इस प्लान पर कई देशों ने मध्यस्ता की, जिन्हें ट्रंप ने धन्यवाद कहा. हालांकि इस योजना पर पहले पाकिस्तान ने खुशी और सहमति जताई थी, लेकिन अब वह अपने स्टैंड से थोड़ी दूरी बना रहा है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद में औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि यह दस्तावेज पाकिस्तान का नहीं है और इसमें ऐसे संशोधन किए गए हैं जो हमारे मूल मसौदे से मेल नहीं खाते.
दुनिया भर में युद्ध रुकवाने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान युद्ध भी रुकवाने का दावा कई बार किया. इसके लिए पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार देने की मांग कर दी. हालांकि अब उन्हीं ट्रंप की योजना पर पाकिस्तान मुकर रहा है. इस ऐलान के साथ पाकिस्तान इस प्रस्ताव से सार्वजनिक रूप से अलग होने वाला पहला बड़ा देश बन गया है, जबकि हमास पहले ही इसे स्वीकार कर चुका है. इशाक डार ने संसद में कहा, “अमेरिका द्वारा घोषित शांति प्रस्ताव वह मसौदा नहीं है, जिस पर मुस्लिम देशों ने मिलकर सहमति बनाई थी. इसमें जो बदलाव किए गए हैं, वे हमारी मंजूरी से नहीं हुए.”
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद को संबोधित करते हुए डार ने ट्रंप की शांति योजना से जुड़ी शंकाओं को दूर करने के लिए विस्तार से बात की. इस दौरान उन्होंने इस सवाल का भी जवाब दिया कि क्या पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देने के लिए तैयार है? डार ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सार्वजनिक की गई गाजा शांति योजना वास्तव में हमारी नहीं है, बल्कि हमारे मसौदे में बदलाव किए गए हैं.”
पाकिस्तानी सेना की सहमति!
माना जा रहा है कि इस कड़े रुख के पीछे पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मंजूरी है. सेना का मानना है कि किसी भी तरह इस योजना को स्वीकार करना, अमेरिकी और इजरायली हितों को मान्यता देने जैसा होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने यह कदम घरेलू राजनीतिक और धार्मिक दबाव को ध्यान में रखकर उठाया है. देश के भीतर मौजूद कट्टरपंथी समूह किसी भी ऐसे समझौते का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जिसमें हमास के निरस्त्रीकरण या इजरायल को आंशिक मान्यता देने जैसी बातें शामिल हों. जमात-ए-इस्लामी जैसे धार्मिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देता है तो व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे.
घरेलू राजनीति और कूटनीति का संतुलन
पाकिस्तान सरकार का यह बयान फेस-सेविंग एक्सरसाइज जैसा भी लग रहा है. इसका उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश देना है कि इस्लामाबाद ने अमेरिकी दबाव के आगे घुटने नहीं टेके. इस रुख से पाकिस्तान यह भी जताना रहा है कि वह मुस्लिम देशों की एकजुटता से अलग नहीं हो रहा और न ही फिलिस्तीनी मकसद से समझौता कर रहा है.
ट्रंप के 20 सूत्रीय प्लान में क्या है?
- गाजा को आतंकमुक्त और पड़ोसी देशों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाया जाएगा.
- गाजा का पुनर्विकास स्थानीय लोगों के हित में किया जाएगा.
- प्रस्ताव मानते ही युद्ध तुरंत समाप्त होगा और इजरायली सेना पीछे हटेगी.
- समझौते के 72 घंटे के भीतर सभी बंधक (जीवित और मृत) लौटाए जाएंगे.
- सभी बंधकों की रिहाई के बाद इजरायल 250 आजीवन कारावास कैदियों और 1,700 गाजावासियों को छोड़ेगा.
- हथियार छोड़ने वाले हमास सदस्यों को माफी और बाहर जाने वालों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा.
- समझौते के साथ ही गाजा में बड़ी मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण शुरू होगा.
- संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सहायता वितरण की निगरानी करेंगी.
- गाजा का प्रशासन एक अस्थायी तकनीकी फ़िलिस्तीनी समिति और अंतरराष्ट्रीय “बोर्ड ऑफ पीस” देखेगा.
- गाजा के पुनर्निर्माण के लिए ट्रंप आर्थिक विकास योजना बनाई जाएगी.
- गाजा में विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाया जाएगा.
- कोई भी गाजा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होगा; रहना या लौटना सबकी मर्ज़ी होगी.
- हमास और अन्य गुट शासन से बाहर रहेंगे, सभी हथियार व सुरंगें नष्ट होंगी.
- क्षेत्रीय साझेदार गारंटी देंगे कि हमास व अन्य गुट समझौते का पालन करें.
- गाजा में अस्थायी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल (ISF) तैनात होगा, जो पुलिस को प्रशिक्षित करेगा.
- इजरायल गाजा पर कब्जा या विलय नहीं करेगा; आईडीएफ धीरे-धीरे बाहर जाएगी.
- यदि हमास प्रस्ताव को ठुकराता है, तो मदद केवल आतंकमुक्त इलाकों में जारी रहेगी.
- इजराइल-फिलिस्तीन के बीच सह-अस्तित्व और सहिष्णुता के लिए अंतरधार्मिक संवाद शुरू होगा.
- गाजा के विकास और पीए सुधार कार्यक्रम के बाद फिलिस्तीन राज्य की राह खुलेगी.
- अमेरिका इसराइल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी राजनीतिक समाधान पर संवाद शुरू करेगा.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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