क्वांटम साइंस में तीन वैज्ञानिकों को मिला नोबेल पुरस्कार, फोटोन के टूटे कणों को जोड़ने का तरीका किया ईजाद

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :04 Oct 2022 9:08 PM (IST)
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क्वांटम साइंस में तीन वैज्ञानिकों को मिला नोबेल पुरस्कार, फोटोन के टूटे कणों को जोड़ने का तरीका किया ईजाद

फोटोन कहे जाने वाले कणों को अधिक दूरी तक अलग-अलग किए जाने के बावजूद उन्हें जोड़ सकने वाले या पकड़ने के तरीकों की खोज के लिए तीनों वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार दिया गया है. क्वांटम सूचना विज्ञान का एक उदाहरण ‘इनक्रिप्शन' भी है.

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स्टॉकहोम : विज्ञान विषय में भौतिक शास्त्र की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए फोटोन सबसे महत्वपूर्ण है. आम तौर पर जब भौतिक शास्त्र के विद्यार्थी ऊर्जा या परमाण्विक ऊर्जा के बारे में पढ़ाई करते हैं, तब इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और न्यूट्रॉन को तो पढ़ते ही हैं, लेकिन इसमें एक तत्व फोटोन भी है. फोटोन के तत्व जब टूटकर अधिक दूरी तक चले जाते हैं, तो उन्हें जोड़ने के लिए जिस विधि का प्रयोग किया जाता है, उसे क्वांटम विज्ञान कहा जाता है. आपको बता दें कि क्वांटम विज्ञान पर शोध करने वाले तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से भौतिक शास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है.

फ्रांस, अमेरिका और ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिकों को मिला पुरस्कार

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भौतिक शास्त्र में ऊर्जा के लिए क्वांटम सूचना विज्ञान पर काम करने के लिए तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से वर्ष 2022 के लिए भौतिक शास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने ‘क्वांटम सूचना विज्ञान’ के लिए फ्रांस के एलै एस्पै, अमेरिका के जॉन एफ क्लाउसर और ऑस्ट्रिया के एंतन साइलिंगर को यह पुरस्कार देने की घोषणा की.

क्यों मिला नोबेल

‘फोटोन’ कहे जाने वाले कणों को अधिक दूरी तक अलग-अलग किए जाने के बावजूद उन्हें जोड़ सकने वाले या पकड़ने के तरीकों की खोज के लिए तीनों वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार दिया गया है. क्वांटम सूचना विज्ञान का एक उदाहरण ‘इनक्रिप्शन’ भी है. बता दें कि ‘इनक्रिप्शन’ एक ऐसी पद्धति है, जिसके जरिए सूचना को गुप्त कोड में परिवर्तित किया जाता है, जो सूचना के सही अर्थ को छिपा देता है.

क्वांटम सूचना विज्ञान तेजी से हो रहा विकसित

नोबेल कमेटी की सदस्य इवा ओलसन ने कहा कि क्वांटम सूचना विज्ञान एक जीवंत और तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है. उन्होंने कहा कि सूचना के सुरक्षित स्थानांतरण, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेंसिंग प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में इसके व्यापक उपयोग की संभावना है. इवा ने कहा कि इसकी जड़ें क्वांटम मेकैनिक्स तक जाती हैं. उन्होंने कहा कि इसके अनुमानों ने एक दूसरी दुनिया के द्वार खोल दिए हैं और माप की हमारी व्याख्या की पूरी बुनियाद को भी इसने हिलाकर रख दिया है. नोबल पुरस्कार की घोषणा के बाद साइलिंगर ने फोन पर कहा कि उन्हें पुरस्कार मिलने की घोषणा सुनकर वह स्तब्ध हैं. वियना विश्वविद्यालय से संबद्ध 77 साल के एंतन साइलिंगर ने कहा कि लेकिन यह सकारात्मक अनुभव है.

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इजराइल में वुल्फ पुरस्कार पा चुके हैं तीनों वैज्ञानिक

गौरतलब है कि तीनों वैज्ञानिकों को 2010 में इजराइल में वुल्फ पुरस्कार मिला था, जिसे नोबेल पुरस्कार मिलने की संभावना बनाने वाला पुरस्कार माना जाता है. नोबेल कमेटी ने कहा कि क्लाउसर (79) क्वाटम सिद्धांत को व्यावहारिक प्रयोग में लेकर आए और एस्पै (75) ने 1960 के दशक में पहली बार प्रतिपादित किए गए इस सिद्धांत की खामियों को दूर किया, जबकि साइलिंगर ने ‘क्वांटम टेलीपोर्टेशन’ को प्रदर्शित किया, जिसने दूरी तक सूचना के पारेषण में मदद की. साइलिंगर ने कहा कि उन्होंने जब अपना अनुसंधान कार्य शुरू किया था, तो प्रयोग पूरी तरह से दार्शनिक थे जो किसी संभावित उपयोग के बगैर थे. तब से इन वैज्ञानिकों के कार्य का उपयोग क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम नेटवर्क और सुरक्षित क्वांटम इनक्रिप्टेड संचार के क्षेत्रों के विकास में किया गया.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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