इजरायल-लेबनान के बीच शांति की नई पहल, अमेरिका ने करवाई डील, तो भड़के हिज्बुल्लाह ने कहा- गृहयुद्ध की ओर...

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समझौते का ऐलान करते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (माइक के साथ). फोटो- स्क्रीनग्रैब.

Israel Lebanon Ceasefire Agreement: अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच शांति समझौते का फ्रेमवर्क तैयार हुआ है. मार्को रुबियो ने इसे स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में पहला कदम बताया. समझौते के तहत हिजबुल्लाह को दक्षिणी लेबनान से गोलीबारी रोकने और पीछे हटने की शर्त रखी गई है. हालांकि, इजरायल और लेबनान ने इसका स्वागत किया है, लेकिन हिजबुल्लाह ने इसका विरोध किया.

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Israel Lebanon Ceasefire Agreement: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल सामने आई है. अमेरिका ने इजरायल और लेबनान के बीच एक ऐसे फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच ‘स्थायी शांति और सुरक्षा’ स्थापित करना है. इस फ्रेमवर्क समझौते पर लेबनान की राजदूत नादा मोआवद, इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए. हालांकि, हिज्बुल्लाह ने इस समझौते का विरोध किया है. 

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को इस समझौते का ऐलान किया. अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार इस समझौते में सीजफायर यानी युद्धविराम का प्रावधान शामिल है. हालांकि, यह शर्त भी रखी गई है कि हिजबुल्लाह सभी तरह की गोलीबारी बंद करेगा और दक्षिणी लेबनान से पीछे हटेगा. और जहां से इजरायल और हिज्बुल्लाह हटेंगे वहां पर लेबनान की सेना तैनात होगी. 

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने बयान में कहा कि इजरायल और लेबनान दोनों ही प्राचीन सभ्यताओं के उत्तराधिकारी देश हैं, जिनका इतिहास बाइबल काल तक जाता है. दोनों देशों के लोग दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली और उद्यमी लोगों में शामिल हैं और दोनों के पास खूबसूरत समुद्री तट हैं. लेकिन दशकों से इन देशों को आतंकवादी संगठनों और उनके समर्थक समूहों के कारण संघर्ष का सामना करना पड़ा है. इन समूहों ने लेबनान की संप्रभुता को कमजोर किया, इजरायल पर हमले किए और पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ाई.

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते को साझा किया गया.  इसमें मार्को रुबियो के हवाले से दिए गए बयान में कहा गया, ‘हमें लेबनान की संप्रभु सरकार और इजरायल सरकार के बीच एक फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है. इस प्रक्रिया में अमेरिका ने मध्यस्थता और समर्थन की भूमिका निभाई है.’ फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रुबियो ने कहा कि इस समझौते को लागू करने के लिए अभी काफी मेहनत और समय लगेगा, लेकिन आज उठाया गया कदम इस लंबी यात्रा की शुरुआत है. 

अमेरिका करेगा निगरानी, लेबनान को मिलेगी आर्थिक मदद

मार्को रुबियो ने बताया कि अमेरिका लेबनान के लिए बनाए गए नए त्रिपक्षीय सैन्य समन्वय समूह के जरिए समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा. उन्होंने लेबनान के लिए तुरंत 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देने का भी ऐलान किया. यह सहायता संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल में दी जाएगी. इसके अलावा अमेरिका मौजूदा अधिकारों के तहत 3 करोड़ डॉलर से ज्यादा की अतिरिक्त मदद देगा. इसका उद्देश्य लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करना और पूरे देश में सरकार की पकड़ बढ़ाने में मदद करना है.

दक्षिणी लेबनान में बनाए जाएंगे दो पायलट जोन

समझौते का सबसे अहम हिस्सा दक्षिणी लेबनान में दो पायलट जोन बनाने की योजना है. इसके तहत इजरायली सेना संघर्ष के दौरान कब्जे में लिए गए कुछ सीमित इलाकों से पीछे हटेगी और वहां लेबनानी सेना तैनात होगी. हालांकि, इजरायल ने साफ किया है कि सेना की वापसी पूरी तरह हिजबुल्लाह के हथियार छोड़ने और उसके सैन्य ढांचे को खत्म करने पर निर्भर करेगी.

लेबनान के राजदूत बोले बहाल होगी संप्रभुता

अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने बातचीत की मेजबानी और दोनों पक्षों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि समझौते का उद्देश्य लेबनान की संप्रभुता बहाल करना, संघर्ष खत्म करना और विस्थापित लोगों को वापस अपने घर लौटने का मौका देना है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय लेबनान के राष्ट्रपति आऊन, प्रधानमंत्री सलाम, राजदूत करम और लेबनानी सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता को दिया.

नेतन्याहू बोले- हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर निर्भर वापसी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि लेबनानी सेना इलाकों पर नियंत्रण लेने की तैयारी शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि इजरायल की आगे की वापसी तभी होगी जब हिजबुल्लाह का सैन्य ढांचा पूरी तरह खत्म किया जाएगा. वहीं इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर ने इस समझौते को ‘परफॉर्मेंस आधारित’ बताया. 

उन्होंने कहा कि आगे की इजरायली वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह को हथियार डालने और उसके सैन्य ढांचे को खत्म करने में कितनी सफल होती है. लेइटर ने यह भी कहा कि ईरान बाहर है, हिजबुल्लाह बाहर है और इजरायल-लेबनान के बीच शांति का रास्ता अब खुल रहा है.

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हिजबुल्लाह ने किया समझौते का विरोध

समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हिजबुल्लाह की ओर से इसका विरोध सामने आया, जिससे इसके लागू होने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. हिजबुल्लाह के वरिष्ठ सांसद हसन फदलल्लाह ने इस फ्रेमवर्क को खारिज कर दिया. लेबनान के टीवी चैनल अल मयादीन के अनुसार, फदलल्लाह ने कहा कि अगर लेबनानी अधिकारी इस समझौते को लागू करना चाहते हैं तो उन्हें अमेरिकी समर्थन के साथ गृहयुद्ध जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. 

उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह अपने हथियार छोड़ने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा और अपने हथियारों को और मजबूती से पकड़े रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का विरोध ‘गंभीर’ है और वह लेबनानी अधिकारियों को जमीन पर इन प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करने देगा.

संघर्ष में हजारों लोगों की मौत

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब इजरायल-लेबनान सीमा पर हिंसा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव उस समय बढ़ा जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले शुरू किए. इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह को निशाना बनाया.  रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली जवाबी कार्रवाई में अब तक 4,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं. वहीं इस संघर्ष में अब तक 37 इजरायली सैनिक भी मारे गए हैं.

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Anant Narayan Shukla

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By Anant Narayan Shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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