Pakistan Day Special -4: क्या पाकिस्तान सच में ‘Failed State’ है? कहानी कुछ ज्यादा जटिल है

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पाकिस्तान की कहानी सिर्फ ‘विफलता’ की नहीं है. यह मजबूत सेना और कमजोर संस्थाओं के बीच फंसे एक राज्य की कहानी है.

सेना मजबूत, परमाणु क्षमता मजबूत, लेकिन अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र कमजोर—आखिर पाकिस्तान को किस श्रेणी में रखें?

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अगर किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता हो, अर्थव्यवस्था संकट में हो, आतंकवाद हो और सेना राजनीति में प्रभावशाली हो, तो क्या उसे सीधे ‘Failed State’ यानी विफल राष्ट्र कह देना चाहिए?

पाकिस्तान के मामले में यह सवाल दशकों से पूछा जाता रहा है.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान को ‘Failed State’ कहना जितना आसान लगता है, उसकी वास्तविक स्थिति उतनी ही जटिल है.

क्योंकि पाकिस्तान में कमजोरी भी है और ताकत भी. संकट भी है और संस्थागत क्षमता भी.

‘Failed State’ का मतलब आखिर क्या है?

‘Failed State’ कोई सामान्य गाली नहीं, बल्कि राजनीति विज्ञान का एक शब्द है.

इसका इस्तेमाल ऐसे देश के लिए किया जाता है जहां सरकार अपने बुनियादी काम करने में असमर्थ हो जाए.

मसलन-

  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना
  • अपने पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण रखना
  • नागरिकों को जरूरी सेवाएं देना
  • प्रभावी संस्थाएं चलाना
  • जनता के बीच वैधता बनाए रखना

1990 के दशक में सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों में केंद्रीय सत्ता के कमजोर होने के बाद ‘Failed State’ की अवधारणा ज्यादा चर्चा में आई.

राजनीतिशास्त्री रॉबर्ट रोटबर्ग ने भी राज्य की क्षमता को कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं और क्षेत्रीय नियंत्रण जैसे पैमानों से जोड़कर समझाया.

लेकिन यहीं एक समस्या शुरू होती है.

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क्या हर देश को एक ही पैमाने से मापा जा सकता है?

‘Failed State’ की अवधारणा की आलोचना भी होती रही है.

आलोचकों का कहना है कि किसी राज्य को सफल या असफल बताने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई पैमाने पश्चिमी लोकतांत्रिक अनुभवों से निकले हैं.

यानी सवाल यह भी है कि-

क्या हर देश की ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियां एक जैसी हैं?

अगर किसी देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हैं, लेकिन उसकी सेना, नौकरशाही या प्रशासन मजबूत है, तो उसे पूरी तरह ‘Failed’ कैसे कहा जाए?

इसीलिए आज कई विशेषज्ञ ‘State Fragility’ यानी राज्य की कमजोरी जैसी अवधारणाओं को ज्यादा उपयोगी मानते हैं.

पाकिस्तान की कहानी 1947 से ही अलग थी

पाकिस्तान की मुश्किलें उसके जन्म के साथ ही शुरू हो गई थीं.

1947 में विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा और विस्थापन हुआ. लाखों लोग अपनी जगहों से उजड़ गए. नए देश को लगभग उसी समय प्रशासन, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था खड़ी करनी थी.

इतिहासकार आयशा जलाल ने पाकिस्तान की शुरुआती स्थिति को समझाने के लिए ‘State without a Nation’ यानी ‘राष्ट्र के बिना राज्य’ जैसी अवधारणा का इस्तेमाल किया.

इसका अर्थ था कि पाकिस्तान में पहले एक राजनीतिक राज्य बना और उसके भीतर एक साझा राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने की चुनौती सामने आई.

यह चुनौती इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि पाकिस्तान खुद भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद विविध था.

भाषा ने भी बढ़ाई मुश्किल

1947 में पाकिस्तान के दो हिस्से थे: West Pakistan और East Pakistan.

दोनों के बीच करीब 1,000 मील से ज्यादा भारतीय क्षेत्र था.

भाषा, संस्कृति और आर्थिक परिस्थितियों में भी बड़ा अंतर था.

पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली भाषी आबादी बहुसंख्यक थी, जबकि उर्दू को राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा दिया गया.

इससे असंतोष बढ़ा और 1950 के दशक का भाषा आंदोलन इसी तनाव का बड़ा उदाहरण बना.

आखिरकार 1971 में पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बन गया.

यह पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक और संस्थागत झटका था.

सेना क्यों बनी इतनी ताकतवर?

पाकिस्तान की राजनीति को समझने के लिए उसके civil-military relations को समझना जरूरी है.

1958 में जनरल अयूब खान ने सत्ता संभाली।. इसके बाद 1977 में जनरल जिया-उल-हक और 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर आए.

इस तरह पाकिस्तान में सेना केवल सुरक्षा संस्था नहीं रही, बल्कि वह राजनीति और शासन की एक महत्वपूर्ण शक्ति बन गई.

इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ा. राजनीतिक दलों और संसद की भूमिका कई बार कमजोर हुई और विदेश नीति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सैन्य प्रभाव बना रहा.

यही स्थिति पाकिस्तान को एक ‘praetorian’ या सैन्य-प्रभावित राज्य के रूप में समझने का आधार देती है.

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जिया का दौर और ‘Security State’

1977 के बाद जनरल जिया-उल-हक के शासन में पाकिस्तान में इस्लामीकरण की प्रक्रिया तेज हुई।

इसी दौर में अफगानिस्तान में सोवियत युद्ध भी शुरू हुआ। पाकिस्तान अमेरिका और दूसरे देशों के लिए अफगान मुजाहिदीन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।

इससे पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और धार्मिक राजनीति का संबंध और मजबूत हुआ।

लेकिन इसका एक दूसरा असर भी हुआ—मिलिटेंसी और कट्टरपंथ के नेटवर्क मजबूत हुए, जिनके प्रभाव बाद के दशकों में पाकिस्तान और क्षेत्र से बाहर तक दिखाई दिए।

अर्थव्यवस्था भी बड़ी चुनौती

पाकिस्तान की एक और बड़ी समस्या उसकी अर्थव्यवस्था रही है.

देश को कई बार भुगतान संतुलन के संकट का सामना करना पड़ा. विदेशी मुद्रा की कमी, कम टैक्स संग्रह, राजकोषीय दबाव और बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भरता ने संकट को बढ़ाया.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के साथ बार-बार कार्यक्रमों की जरूरत पड़ना भी उसकी आर्थिक कमजोरी का संकेत माना जाता है.

लेकिन आर्थिक संकट का मतलब अपने आप ‘Failed State’ होना नहीं है.

यही फर्क समझना जरूरी है.

भारत और बांग्लादेश से तुलना क्यों जरूरी है?

भारत और पाकिस्तान एक ही समय में स्वतंत्र हुए। फिर दोनों का रास्ता अलग क्यों हुआ?

भारत ने 1950 में संविधान लागू किया, नियमित चुनाव कराए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपेक्षाकृत लगातार बनाए रखा.

भारत में भी गरीबी, भाषाई विवाद, क्षेत्रीय असमानता और राजनीतिक संकट रहे. 1975-77 का आपातकाल इसका बड़ा उदाहरण है.
लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था फिर बहाल हुई और संस्थाएं बनी रहीं.

बांग्लादेश की कहानी भी दिलचस्प है.

1971 में युद्ध और भारी तबाही के बाद कई लोगों को लगा था कि यह देश शायद लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा. लेकिन बाद के दशकों में बांग्लादेश ने कपड़ा उद्योग, महिला रोजगार, माइक्रोफाइनेंस और सामाजिक विकास के जरिए उल्लेखनीय प्रगति की.

कई सामाजिक सूचकांकों में उसने पाकिस्तान से बेहतर प्रदर्शन किया.

इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है-

किसी देश की शुरुआती मुश्किलें उसका भविष्य तय नहीं करतीं.

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तो क्या पाकिस्तान ‘Failed State’ है?

शायद सबसे सही जवाब है- पूरी तरह नहीं.

पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता है, आर्थिक संकट है, आतंकवाद और क्षेत्रीय विद्रोह की समस्या है और सेना का प्रभाव भी बेहद महत्वपूर्ण है.

लेकिन दूसरी तरफ-

उसकी नौकरशाही काम करती है, प्रशासनिक संस्थाएं मौजूद हैं, न्यायपालिका सक्रिय है, चुनाव होते हैं और देश के अधिकांश हिस्से पर राज्य का नियंत्रण है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के पास एक संगठित सेना और परमाणु क्षमता भी है.

यानी समस्या राज्य के पूरी तरह खत्म हो जाने की नहीं, बल्कि राज्य की क्षमता के असमान वितरण की है.

‘Failed’ से ज्यादा ‘Fragile’?

यही वजह है कि पाकिस्तान को ‘Fragile State’ यानी कमजोर या नाजुक राज्य के रूप में समझना ज्यादा उपयोगी हो सकता है.

यह ऐसा राज्य है जिसमें कुछ संस्थाएं बहुत मजबूत हैं, जबकि दूसरी संस्थाएं कमजोर.

पाकिस्तान में सैन्य और सुरक्षा संस्थाएं अपेक्षाकृत मजबूत हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं, अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं और नागरिक-सैन्य संतुलन के सामने गंभीर चुनौतियां हैं.

इसलिए पाकिस्तान की कहानी को सिर्फ ‘Failure’ कहकर खत्म कर देना आसान है, लेकिन शायद सही नहीं.

पाकिस्तान एक ऐसा राज्य है जो कमजोर भी है और सक्षम भी- और उसकी सबसे बड़ी चुनौती इसी विरोधाभास को समझना है.


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अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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