Pakistan Day Special -2: सिर्फ एक देश नहीं… एक Process भी क्यों है पाकिस्तान?

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पाकिस्तान को समझना है तो उसकी ‘National Psychology’ समझिए.

पाकिस्तान को समझना है, तो सिर्फ नक्शा मत देखिए- उसकी राजनीति की वह कहानी समझिए, जो बार-बार खुद को दोहराती है.

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पाकिस्तान को हम आमतौर पर एक Nation-State के रूप में देखते हैं. एक देश, जिसकी अपनी सरकार, सेना, संविधान, सीमाएं और संस्थाएं हैं.

लेकिन पाकिस्तान की राजनीति को समझने का एक दूसरा तरीका भी है.

पाकिस्तान को एक ‘Process’ की तरह देखिए.

यानी ऐसा राजनीतिक प्रोजेक्ट, जिसकी राष्ट्रीय पहचान, सुरक्षा नीति और सत्ता की संरचना समय के साथ लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करती रही हैं.

इस नजरिए से देखें तो पाकिस्तान की कहानी सिर्फ भारत-पाकिस्तान विवाद की कहानी नहीं रह जाती. यह पहचान, सुरक्षा, सेना, धर्म, राजनीति और Proxy Warfare के बीच बने एक जटिल रिश्ते की कहानी बन जाती है.

पाकिस्तान पर मेरी किताब यहां से पढ़ें

1. पहचान का सवाल: ‘हम कौन हैं?’

हर राष्ट्र अपनी पहचान बनाने की कोशिश करता है.

भारत की राष्ट्रीय पहचान को समझने के लिए उसकी हजारों वर्षों की सभ्यतागत परंपराओं, भाषाओं, संस्कृतियों, धर्मों और सामाजिक विविधता को देखा जा सकता है.

पाकिस्तान की स्थिति कुछ अलग रही.

1947 में पाकिस्तान का निर्माण एक अलग मुस्लिम राजनीतिक पहचान और उपमहाद्वीप के मुस्लिमों के लिए अलग राजनीतिक व्यवस्था की मांग के संदर्भ में हुआ. लेकिन आजादी के बाद उसके सामने एक बड़ा सवाल था-

एक नए देश की पहचान क्या होगी?

क्या वह सिर्फ एक मुस्लिम राष्ट्र होगा? क्या उसकी पहचान इस्लाम से तय होगी? क्या वह पंजाबी, सिंधी, बलोच, पश्तून और बंगाली जैसी क्षेत्रीय पहचानों को साथ लेकर चलेगा? या उसकी राष्ट्रीय पहचान का सबसे बड़ा आधार भारत से अलग होना होगा?

यहीं से पाकिस्तान की Identity Politics की जटिलता शुरू होती है.

इसे ‘Negative Identity’ के रूप में समझा जा सकता है- जहां किसी पहचान का एक हिस्सा यह बताने से बनता है कि हम कौन नहीं हैं.

हालांकि, पाकिस्तान की पहचान को सिर्फ भारत-विरोध तक सीमित करना भी सही नहीं होगा. वहां इस्लामी पहचान, क्षेत्रीय संस्कृतियां, भाषाई विविधता और अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं भी महत्वपूर्ण रही हैं.

लेकिन भारत के साथ उसका संबंध उसकी राष्ट्रीय राजनीति का एक स्थायी तत्व जरूर बन गया.

2. भारत: पड़ोसी से ‘Security Threat’ तक

1947 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुए.

कश्मीर विवाद बना रहा और दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे.

इस माहौल ने पाकिस्तान की राजनीति में National Security को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया.

धीरे-धीरे एक विचार मजबूत हुआ-

भारत एक संभावित और स्थायी सुरक्षा चुनौती है.

यहीं से Pakistan का Security State वाला चरित्र मजबूत होने लगा.

जब किसी देश की राजनीति में सुरक्षा का मुद्दा लगातार सबसे ऊपर रहता है, तो सेना और सुरक्षा संस्थाओं की भूमिका भी बढ़ती है.

पाकिस्तान में सेना सिर्फ सीमा की रक्षा करने वाली संस्था नहीं रही. उसने कई बार सीधे सत्ता संभाली और लंबे समय तक राजनीतिक व्यवस्था पर निर्णायक प्रभाव बनाए रखा.

यानी एक चक्र बनता गया-

भारत से सुरक्षा चिंता → मजबूत सैन्य भूमिका → Security State → सेना की राजनीतिक भूमिका → फिर Security Narrative की मजबूती.

यही चक्र पाकिस्तान की राजनीति को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है.

3. जब युद्ध महंगा हो, तो Proxy क्यों?

अब आते हैं तीसरे चरण पर: Proxy Warfare.

सीधे युद्ध में सैनिक, हथियार, पैसा और राजनीतिक जोखिम सब कुछ लगता है.

इसलिए कई राज्य ऐसे संगठनों या समूहों का समर्थन करते हैं, जिनके जरिए वे अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जबकि औपचारिक रूप से सीधे युद्ध में शामिल होने से बचते हैं.

इसे ही broadly Proxy War कहा जाता है.

पाकिस्तान के संदर्भ में यह रणनीति खास तौर पर अफगानिस्तान और कश्मीर के संदर्भ में चर्चा में रही है.

1979 के बाद अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान पाकिस्तान अमेरिका और अन्य देशों के समर्थन से बने anti-Soviet jihadist network का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना.

इस अनुभव ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया.

बाद के दशकों में कश्मीर में भी विभिन्न militant और extremist संगठनों को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर आरोप और बहस होती रही.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह था कि राज्य प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय कम तीव्रता वाले संघर्ष के जरिए अपने विरोधी पर दबाव बनाए रख सकता था.

लेकिन यहां एक बड़ा खतरा भी था-

Proxy को पैदा करना आसान हो सकता है, नियंत्रित करना हमेशा आसान नहीं होता.

Read more: पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल

4. हथियार से ज्यादा ताकतवर होती है कहानी

किसी भी लंबे संघर्ष को सिर्फ हथियारों से नहीं चलाया जा सकता.

उसके पीछे एक Narrative चाहिए.

यही कारण है कि पाकिस्तान में शिक्षा, मीडिया और राजनीतिक विमर्श में National Security, Kashmir और भारत के साथ संबंधों को लेकर विशेष प्रकार के narratives लंबे समय तक प्रभावशाली रहे हैं.

स्कूल की किताबों से लेकर राजनीतिक भाषणों तक, इतिहास और राष्ट्रीय पहचान की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं.

इससे एक संदेश मजबूत हो सकता है-

हम खतरे में हैं.

और जब किसी समाज में खतरे की भावना लगातार बनी रहती है, तो सुरक्षा संस्थाओं की भूमिका भी अधिक स्वीकार्य दिखाई दे सकती है.

हालांकि, पाकिस्तान के समाज को एक ही विचारधारा से संचालित मानना गलत होगा. वहां लोकतांत्रिक आंदोलनों, उदार विचारों, क्षेत्रीय पहचानों, धार्मिक विविधताओं और सेना की भूमिका पर सवाल उठाने वाली आवाजों की भी लंबी परंपरा रही है.

यानी Pakistan का समाज और Pakistan का State एक ही चीज नहीं हैं.

Read more: Strategic Depth: जब अफगानिस्तान बना पाकिस्तान की रणनीति का केंद्र

5. तो क्या पाकिस्तान सचमुच एक ‘Process’ है?

यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है.

पाकिस्तान को केवल एक असफल या अस्थिर देश के रूप में देखना समस्या को बहुत सरल बना देता है.

वह एक ऐसा राज्य है, जहां Identity, Security, Military Power और Political Institutions ने दशकों से एक-दूसरे को प्रभावित किया है.

इसे एक चक्र की तरह समझिए-

Identity → Threat Perception → Security State → Military Influence → Proxy Strategy → National Narrative → फिर वही Identity.

यही कारण है कि पाकिस्तान को समझने के लिए केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि वहां सरकार कौन चला रहा है.

हमें यह भी पूछना होगा-

राज्य की प्राथमिकताएं क्या हैं? खतरे की उसकी परिभाषा क्या है? राष्ट्रीय पहचान कैसे बनाई जा रही है? और सत्ता के अलग-अलग संस्थानों के बीच शक्ति का संतुलन कैसा है?

क्योंकि पाकिस्तान की कहानी केवल सरकारों के बदलने की कहानी नहीं है.

यह एक ऐसे political process की कहानी है, जिसमें पहचान, सुरक्षा और सत्ता लगातार एक-दूसरे को प्रभावित करते रहे हैं.

और शायद यही पाकिस्तान को समझने की सबसे जरूरी कुंजी है-

देश को सिर्फ उसकी सीमाओं से नहीं, उसके भीतर चल रहे राजनीतिक और वैचारिक processes से समझिए।


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अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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