ePaper

क्या भारत ने अमेरिका पर लगा दिया टैरिफ? दालों को लेकर यूएस सांसद ने ट्रंप को लिखा लेटर

18 Jan, 2026 1:22 pm
विज्ञापन
India Slaps 30% Tariff on US Pulse Import US Senator writes Letter to Donald Trump urge actions.

भारत ने अमेरिकी दालों पर 30% टैरिफ लगा दिया है.

अमेरिका के नॉर्थ डकोटा के सांसद केविन क्रेमर ने डोनाल्ड ट्रंप को लेटर लिखा है. उन्होंने ट्रंप से रिक्वेस्ट की है कि भारत की ओर से 1 नवंबर से दालों के इंपोर्ट पर 30% टैरिफ लगा दिया है. यह दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेड डील के बीच नई अपडेट है, जिसे अब तक छुपाया गया था, या ये कहें कि भारत सरकार ने इसका ज्यादा प्रचार नहीं किया था.

विज्ञापन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया भर में टैरिफ लगाने की कार्रवाई करते हैं. उन्होंने दुनिया भर के सभी देशों में अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले देशों पर यह शुल्क लगाए हैं. उन्होंने इसका इस्तेमाल सभी से अपनी बात मनवाने के लिए ही किया है. भारत तो इसका सबसे बड़ा नुकसान झेल रहा है. रूस से तेल लेने की वजह से 25% टैरिफ के अलावा अलग से 25% टैरिफ लग रहा है. यानी कुल मिलाकर 50 प्रतिशत. कुछ देशों को छोड़कर लगभग सभी ट्रंप के आगे झुक गए हैं, लेकिन भारत अब भी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है, ताकि उसका व्यापार अमेरिका और उसके विरोधी देशों के साथ भी चलता रहे. लेकिन इसी बीच एक खबर सामने आई, जिसमें कहा गया कि भारत अमेरिका के दाल पर 30% टैरिफ लगा रहा है. 

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर पहले से ही काफी देर हो रही है. लंबी बातचीत के बाद भी अब तक दोनों देश एक डील पर एग्री नहीं हो पाए हैं. अब दाल के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच नया विवाद छिड़ सकता है. हाल ही में, दो अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेटर लिखा. इसमें उन्होंने ट्रंप से आग्रह (रिक्वेस्ट) किया कि भारत से अमेरिकी दालों पर 30% आयात शुल्क हटवाएं. उन्होंने इसे अनुचित बताया. पत्र में, नॉर्थ डकोटा के सांसद केविन क्रेमर और मोंटाना के स्टीव डेनिस ने कहा कि भारत ने 30 अक्टूबर को अमेरिकी पीली मटर पर यह शुल्क लगाया था, जो 1 नवंबर से लागू हो गया.

भारत का अमेरिकी दालों पर 30% शुल्क

16 जनवरी को सांसदों ने ट्रम्प को लिखे लेटर में रिक्वेस्ट की कि किसी भी ट्रेड डील पर समझौते से पहले अमेरिकी दाल और मसूर के लिए बेहतर बाजार दिलवाया जाए. उन्होंने कहा कि अनफेयर इंडियन टैरिफ के कारण, अमेरिकी दाल पैदा करने वाले किसान अपने हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स को भारत में एक्सपोर्ट करने में भारी कंपटीशन की वजह से नुकसान उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत में सबसे अधिक खपत होने वाली दालें मसूर, चना, सूखी सेम और मटर हैं. फिर भी इंडिया ने अमेरिकी दालों पर भारी शुल्क लगाया है

सांसदों ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान भी लिखा था. तब, ट्रम्प ने पीएम नरेंद्र मोदी को यह पत्र ‘हाथ से’ सौंपा था. यह 2020 के व्यापार वार्ता के दौरान हुआ था, जब ट्रंप अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे. उन्होंने कहा कि इससे हमारे प्रोड्यूसर्स को (मोलभाव की) मेज पर लाने में मदद मिली थी. 

यह मुद्दा नॉर्थ डकोटा और मोंटाना जैसे कृषि राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अमेरिका में मटर और दाल के मेन प्रोडक्शन हब हैं. वहीं, भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता है. भारत में ग्लोबल खपत का लगभग 27% हिस्सा इस्तेमाल होता है. लेखक और जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट नवरूप सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा, “इसका मतलब है कि भारत ने अमेरिकी शुल्कों के जवाब में मटर पर 30% शुल्क बढ़ाया, जो अक्टूबर 2025 में लागू हुआ.” एक यूजर ने कहा कि लगता है हमने चुपचाप बदला ले लिया.  

भारत की इस कार्रवाई पर ज्यादातर मीडिया का ध्यान नहीं गया. इसे मुख्य तौर पर अमेरिका की उस 50% टैरिफ के बदले के रूप में देखा जा रहा है, जिसे ट्रम्प ने पिछले साल लगाया था. यह विकास अमेरिकी-भारतीय व्यापार समझौते की बातचीत को और जटिल बना सकता है. भारत के इस कदम को अधिकतर नजरअंदाज किया गया. इसका प्रचार सरकार ने भी नहीं किया.

भारत के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर एक रेड लाइन

भारत के लिए कृषि एक प्रमुख क्षेत्र है. राजनीतिक रूप से भी यह काफी प्रभाव डालने वाला है. क्योंकि भारत की अधिकांश जनता या तो खेती पर निर्भर है, या उसका जुड़ाव किसी न किसी रूप में ग्रामीण भारत से है.   भारत की घरेलू परिस्थितियां ही अमेरिका के साथ ट्रेड डील में सबसे बड़ी बाधा बन रही है. भारत अपने कृषि और डेयरी बाजारों तक किसी भी बाहरी देश की पहुंच नहीं होने देना चाहता. हाल ही में न्यूजीलैंड, जिसका डेयरी सेक्टर दुनिया में सबसे बेस्ट माना जाता है, उसके साथ भी ट्रेड डील में भारत ने कोई रियायत नहीं दी. ये नई दिल्ली के लिए रेड लाइन हैं. भारतीय किसान भारत सरकार के लिए किसी भी ट्रेड डील में एक रेड लाइन हैं, जिसे किसी भी व्यापार समझौते में पार नहीं किया जाएगा. 

ये भी पढ़ें:- अमेरिकी फौज ने छोड़ा अल-असद एयरबेस, ईराकी सेना ने जमाया कब्जा, ईरान से ‘वॉर लाइक सिचुएशन’ के बीच ऐसा क्यों किया?

ये भी पढ़ें:- चीन का त्यौहार: सड़क पर लगती है टेबल, साथ खाते हैं हजारों लोग, इस बार 300 मीटर लंबी लाइन लगी, जहां इंडियन बना सुपरस्टार

विज्ञापन
Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola

अपने पसंदीदा शहर चुनें

ऐप पर पढ़ें