Earthquake : नमाज पढ़ रहे थे मुस्लिम, अचानक गिरने लगी मस्जिद, 700 से अधिक लोग मारे गए

Published by :Amitabh Kumar
Updated at :31 Mar 2025 1:03 PM
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Myanmar earthquake

भूकंप के बाद मलबा हटाते बचावकर्मी

Earthquake : म्यांमार में जुमे की नमाज के दौरान आए भूकंप में 700 से अधिक मुसलमान मारे गए. इसका दावा एक मुस्लिम संगठन ने किया है. बताया जा रहा है कि लोग मस्जिद के अंदर नमाज पढ़ने पहुंचे थे. इसके बाद अचानक मस्जिद हिलने लगी.

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Earthquake : रमजान में जुमे की नमाज के दौरान म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के कारण 700 से अधिक नमाजियों की जान चली गई. एक मुस्लिम संगठन की ओर से यह दावा किया गया है. ‘स्प्रिंग रेवोल्यूशन म्यांमा मुस्लिम नेटवर्क’ की संचालन समिति के सदस्य तुन की ने बताया कि देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के निकट आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के कारण लगभग 60 मस्जिदें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गईं. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि मस्जिदों में मारे गए लोगों की यह संख्या भूकंप में अब तक मारे गए 1,700 से अधिक लोगों की आधिकारिक संख्या में शामिल है या नहीं.

‘द इरावदी’ ऑनलाइन समाचार साइट पर ‘पोस्ट’ किए गए वीडियो में भूकंप के दौरान कई मस्जिदें गिरती हुई दिखाई दे रही हैं. लोग इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं. तुन की ने कहा कि क्षतिग्रस्त हुई अधिकतर मस्जिदों की इमारतें पुरानी थीं.

भूकंप के बाद मलबे में दब गए थे लोग

aljazeera.com ने एक खबर प्रकाशित की है. इसमें कहा गया है कि हेट मिन ऊ मंडाले में अपने घर के बगल में एक मस्जिद में रमजान की नमाज से पहले वजू कर रहे थे. मस्जिद के एक हिस्से के साथ उनका घर भी ढह गया, जिससे उनका आधा शरीर दीवार के मलबे में फंस गया. इसमें उनकी दो मौसी दब गई थीं. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग  उन्हें बाहर निकालने के लिए दौड़े लगाई, लेकिन एक मौसी की मौत हो गई. 25 साल के एक लड़के ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, उनके दो चाचा और उनकी दादी कंक्रीट के ढेर के नीचे फंस गए थे. मलबा हटाने के लिए  कोई सामान नहीं मिला तो उसने अपने हाथों से मलबे को साफ करने का प्रयास किया, लेकिन उसे कोई सफलता हाथ नहीं लगी.

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भूकंप के बाद की भयावह कहानी आई

मांडले क्षेत्र के एक 39 वर्षीय शख्स ने भयावह दृश्य के बारे में बताया. वह सुले कोने गांव में ढह गई मस्जिद के मलबे में फंसे एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तेज झटकों के कारण उसे भागना पड़ा. उसने कहा कि मैं उसे बचाने की कोशिश करने के लिए दूसरी बार अंदर गया. मैंने अपने हाथों से चार लोगों को बचाया. लेकिन दुर्भाग्य से, तीन पहले ही मर चुके थे, और एक ने मेरी बाहों में दम तोड़ दिया.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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