‘बेटी जीते-जी झेल रही है नर्क’, मां जुटा रही चंदा – दुबई जेल में लॉ स्टूडेंट मिया की सिर्फ एक गलती ने बर्बाद कर दी पूरी जिंदगी

दुबई जेल में ब्रिटिश लॉ स्टूडेंट मिया ओ'ब्रायन को हुई जेल/एआई जेनरेटेड इमेज
Dubai Prison British Law Student: ब्रिटिश लॉ स्टूडेंट मिया ओ’ब्रायन को दुबई में 50 ग्राम कोकीन रखने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई. मां ने कहा– "बहुत बड़ी गलती कर दी." जेल में कठिन हालात झेल रही मिया की रिहाई की उम्मीद अब दया याचिका पर टिकी है.
Dubai Prison British Law Student: ब्रिटेन की 23 वर्षीय लॉ स्टूडेंट मिया ओ’ब्रायन इस समय दुबई की जेल में उम्रकैद की सजा काट रही हैं. एक मां के लिए इससे ज्यादा दुखद और क्या हो सकता है? उनकी मां ने इस घटना को एक “बेहद मूर्खतापूर्ण गलती” बताया है. मैनचेस्टर इवनिंग न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अपराध का विवरण आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय मीडिया का दावा है कि मिया को पिछले साल अक्टूबर में दुबई की यात्रा के दौरान 50 ग्राम कोकीन के साथ गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने अदालत में अपनी बेगुनाही की दलील दी, लेकिन जुलाई में उन्हें दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
Dubai Prison British Law Student: यूएई में सख्त कानून और सजा का मतलब
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों को लेकर बेहद सख्त कानून हैं. यहां छोटी-सी मात्रा में भी ड्रग्स पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और लंबे समय तक कारावास की सजा मिल सकती है. यूएई के कानून में “आजीवन कारावास” का मतलब 15 से 25 साल तक जेल में रहना होता है. यही वजह है कि मिया की सजा ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
मां ने शुरू किया फंडरेजिंग
मिया की मां डेनियल मैकेना ने बेटी की कानूनी लड़ाई, दुबई में आने-जाने और जेल में मुलाकात के खर्च को पूरा करने के लिए फंडरेजिंग कैंपेन शुरू किया था. लेकिन यह पेज गोफंडमी (GoFundMe) ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर हटा दिया. अब उन्होंने फेसबुक पर एक नया पेज बनाकर मदद जुटाने की कोशिश शुरू की है. डेली मेल ऑनलाइन से बातचीत में डेनियल मैकेना ने कहा, “मिया वकील या सॉलिसिटर बनना चाहती थी, लेकिन अब उसे लगता है कि उसने अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी. वह फोन पर ज्यादा कुछ नहीं कह पाती, बस यही बताती है कि उसने बहुत बड़ी गलती की है.”
उन्होंने बताया कि जेल की हालत बेहद खराब है. “वहां पर्याप्त स्टाफ नहीं है. जरूरत पड़ने पर उसे बड़े दरवाजे को पीटना पड़ता है. उसने झगड़े देखे हैं और कई बार डरी रहती है. उसे छह अन्य कैदियों के साथ फर्श पर गद्दे पर सोना पड़ता है. हालांकि अब तक गंभीर रूप से बीमार नहीं हुई है, लेकिन शरीर पर रैशेज निकल आए हैं.”
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घर लौटने की उम्मीद
मिया की मां ने कहा कि उनकी बेटी को उम्मीद है कि रमजान के बाद जब यूएई में आम माफी या दया याचिका के सौदे होते हैं, तब शायद उसे ब्रिटेन भेजा जा सके. “हम सब उसकी सजा सुनकर हैरान थे. मिया बहुत बहादुरी से हालात का सामना कर रही है, लेकिन उसे अपने छोटे भाइयों की बेहद याद आती है. वे सिर्फ पांच और सात साल के हैं.” डेनियल ने भावुक होकर कहा, “वह मेरी इकलौती बेटी है. मैं चाहती हूं कि वह किसी तरह घर लौट आए. उसने कहा है कि जेल का माहौल डरावना है, लेकिन वह बस चुपचाप रहकर सजा काट रही है.”
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परिवार की जंग जारी
इस पूरे मामले ने ब्रिटेन में भी बहस छेड़ दी है. जहां एक ओर यूएई के सख्त कानूनों को लेकर चर्चा है, वहीं दूसरी ओर एक मां अपनी बेटी की रिहाई की उम्मीद में संघर्ष कर रही है. मिया की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि विदेश यात्रा के दौरान स्थानीय कानूनों को नज़रअंदाज करना कितना महंगा साबित हो सकता है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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