Bilawal Bhutto in US : जैश को खत्म करो, हिंदुओं को सुरक्षा दो, बिलावल भुट्टो को अमेरिका ने दिया टास्क
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 07 Jun 2025 7:15 AM
Bilawal Bhutto in US
Bilawal Bhutto in US : पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अहमदी समुदायों को बिना हिंसा, भेदभाव या असमान न्याय के डर के अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने की आजादी मिलनी चाहिए. इन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से भाग लेने की पूरी अनुमति मिलनी चाहिए. यह बात अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने कही है.
Bilawal Bhutto in US : भारत की नकल करना पाकिस्तान को महंबा पड़ गया. विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में अमेरिका पहुंचे पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को वहां शर्मिंदगी झेलनी पड़ी जिससे पाकिस्तान की थू–थू होने लगी है. दरअसल, अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने उन्हें साफ और सख्त मैसेज दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने की जरूरत है. शर्मन ने खास तौर पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को खत्म करने की बात कही, जिसने 2002 में पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या की थी. भुट्टो के सामने अमेरिका का रुख बेहद स्पष्ट नजर आया.
पत्रकार डैनियल पर्ल का मर्डर कर दिया था आतंकियों ने
अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को आतंकवाद, खासकर जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई की अहमियत बताई. उन्होंने कहा कि यह वही संगठन है जिसने मेरे निर्वाचन क्षेत्र के निवासी पत्रकार डैनियल पर्ल का मर्डर कर दिया था, जिनके परिवार वाले आज भी वहीं रहते हैं. पाकिस्तान को इस आतंकी संगठन को खत्म करने के लिए हरसंभव कदम उठाने की जरूरत है.

यही नहीं ब्रैड शर्मन ने पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अहमदी समुदायों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि इन्हें बिना हिंसा, भेदभाव या असमान न्याय के डर के अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए.
बिलावल भुट्टो और शशि थरूर की टीम थी वॉशिंगटन में
यहां खास बात यह है कि जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो अमेरिका दौरे पर थे, उसी समय भारत से शशि थरूर के नेतृत्व में एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भी वॉशिंगटन में ही था. भारत का यह प्रतिनिधिमंडल “ऑपरेशन सिंदूर” और पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की आतंकवाद विरोधी नीति की जानकारी अमेरिकी अधिकारियों को दे रहा था. भुट्टो ने न्यूयॉर्क में UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के राजदूतों से मुलाकात की. इसके बाद फिर वॉशिंगटन जाकर कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें उलटा आतंकवाद खत्म करने का निर्देश मिल गया.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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