कौन हैं जनरल अहमद वाहिदी? इंटरपोल का वांटेड तय करेगा ईरान का फ्यूचर!
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 24 May 2026 9:35 AM
ईरान की आईआरजीसी के चीफ जनरल अहमद वाहिदी. फोटो- एक्स (@most43304).
Ahmad Vahidi Iran: ईरान के ताकतवर सैन्य नेता अहमद वाहिदी इन दिनों अमेरिका-ईरान तनाव और पीस टॉक में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. जानिए कैसे IRGC के इस कमांडर का असर ईरान की रणनीति, युद्ध और अमेरिका विरोधी फैसलों पर बढ़ता जा रहा है.
Ahmad Vahidi Iran: ईरान में इस समय सत्ता का ढांचा काफी उलझा हुआ और कई स्तरों में बंटा हुआ दिखाई दे रहा है. आधिकारिक रूप से सबसे बड़ा फैसला अब भी सुप्रीम लीडर के दफ्तर से ही माना जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और पश्चिमी थिंक टैंकों के मुताबिक जमीनी स्तर पर असली प्रभाव अब कई ताकतवर गुटों में बंट चुका है. खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और कुछ चुनिंदा राजनीतिक चेहरों के बीच. इनमें आज का सबसे चर्चित नाम अहमद वाहिदी का है.
ईरान में आज के समय में सबसे ज्यादा प्रभावशाली संस्था आईआरजीसी को माना जा रहा है. यही संगठन ईरान की मिसाइल, सुरक्षा, विदेश नीति के सैन्य हिस्से और क्षेत्रीय नेटवर्क को संभालता है. कई रिपोर्ट्स में इसे ‘डिफैक्टो कंट्रोल’ यानी व्यवहारिक रूप से सत्ता पर पकड़ बताया गया है. अहमद वाहिदी इसी के मुखिया हैं. 28 फरवरी तक मोहम्मद पकपोर आईआरजीसी के कमांडर थे, लेकिन इसी दिन अमेरिका और इजराइल के हमलों में वह मारे गए. इसके बाद इस संस्था की कमान वाहिदी के हाथ आई.
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और सुरक्षा संकट के कारण आईआरजीसी का प्रभाव बढ़ गया है, विदेश नीति और होर्मुज स्ट्रेट जैसे मुद्दों पर अंतिम शब्द अक्सर आईआरजीसी का माना जा रहा है. तेल शिपिंग, परमाणु नीति और क्षेत्रीय मिलिशिया नेटवर्क पर भी उसका गहरा नियंत्रण है. इसके साथ ही रणनीतिक परमाणु बातचीत सहित इन सब मामलों में आईआरजीसी की भूमिका बहुत मजबूत हो चुकी है.
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ का नाम भी पिछले दिनों उनके बयानों की वजह से चर्चा में था, लेकिन वाहिदी के बयान को ईरानी शासन तंत्र में काफी तवज्जो दी जा रही है. सैन्य परिषद जैसे ढांचे में उनका असर बढ़ा है. उन्हें ईरान के कट्टर राष्ट्रवादी और सुरक्षा रणनीतिकारों में गिना जाता है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और रणनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक, वाहिदी का रुख अमेरिका के प्रति बेहद सख्त माना जाता है. अमेरिकी सरकार पहले भी उनके खिलाफ प्रतिबंध लगा चुकी है.
क्या वाहिदी अब ईरान के सबसे ताकतवर लोगों में शामिल हैं?
एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के अंदर असली निर्णय लेने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है और वाहिदी उन लोगों में हैं जो पर्दे के पीछे बड़ा प्रभाव रखते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि अहमद वाहिदी ने सुरक्षा और खुफिया पदों पर नियुक्तियों में दखल दिया, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की कई पसंदों को रोका गया और युद्धकाल में संवेदनशील फैसले आईआरजीसी के नियंत्रण में रखने की बात कही गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने बार-बार यह संदेश दिया कि ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है.
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया कि वाहिदी अमेरिकी दबाव और सैन्य धमकियों के जवाब में आक्रामक रणनीति का समर्थन कर रहे हैं. क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वाहिदी का गुट अमेरिका के साथ समझौते में ज्यादा रियायत देने के खिलाफ माना जाता है. वहीं कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वे यह मानते हैं कि अगर अमेरिका फिर हमला करता है तो ईरान को और कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देनी चाहिए. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी पर उन्होंने कहा था कि अगर ईरान पर फिर से हमला हुआ तो यह युद्ध एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगा. दुश्मनों को भारी तबाही झेलनी पड़ेगी.
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पीस टॉक पर वाहिदी का क्या मत है?
यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई दौर की बातचीत हुई है. लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के अंदर खुद इस बात पर मतभेद हैं कि अमेरिका के साथ कितना आगे बढ़ना चाहिए. कुछ रिपोर्टों के अनुसार संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ बातचीत के पक्ष में दिखाई दिए, जबकि अहमद वाहिदी अधिक सख्त रुख चाहते थे. इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच अमेरिका से बातचीत को लेकर मतभेद सामने आए.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि वाहिदी पूरी तरह बातचीत के खिलाफ हैं. बल्कि रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे ऐसी डील चाहते हैं जिसमें, ईरान की सैन्य ताकत कमजोर न हो, परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह अमेरिकी शर्तें न मानी जाएं, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहे, आईआरजीसी की भूमिका कम न हो. विश्लेषकों का मानना है कि वाहिदी जैसे सैन्य नेता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तेल मार्गों पर ईरान की पकड़ बनी रहे. इसके साथ ही उनका प्लान है कि अमेरिका को क्षेत्र में खुली छूट न मिले और युद्धविराम की स्थिति में भी सैन्य दबाव बरकरार रखा जाए
फिलहाल, अहमद वाहिदी ईरान में बदलाव का बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं. हालांकि, ईरान की राजनीति बेहद जटिल है और वहां फैसले कई शक्ति केंद्रों के बीच होते हैं. इसलिए यह साफ कहना मुश्किल है कि अंतिम नियंत्रण सिर्फ वाहिदी के हाथ में है. लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष, शांति वार्ता और सुरक्षा नीति में उनका असर अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है.
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कौन हैं अहमद वाहिदी?
अहमद वाहिदी आईआरजीसी से लंबे समय से जुड़े रहे हैं. उनका असली नाम ‘वाहिद शाहचेराघी’ बताया जाता है. वह 1979 की ईरान की इस्लामिक क्रांति के शुरुआती दौर से ही आईआरजीसी से जुड़े रहे हैं. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने खुफिया और सैन्य भूमिकाओं में तेजी से पहचान बनाई. बाद में वे आईआरजीसी इंटेलिजेंस से जुड़े, कुद्स फोर्स के शुरुआती कमांडरों में शामिल रहे और विदेशों में ईरान के नेटवर्क बनाने में भूमिका निभाई.
कासिम सुलेमानी से क्या रिश्ता था?
रिपोर्ट्स के मुताबिक 1958 में शिराज में जन्मे वाहिदी 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स का नेतृत्व कर चुके थे. बाद में यह जिम्मेदारी कासिम सुलेमानी को मिली, जिन्होंने आगे चलकर पूरे मध्य पूर्व में ईरान का प्रभाव बढ़ाया. यानी सुलेमानी से पहले वाहिदी ही उस नेटवर्क के प्रमुख चेहरा थे.
‘ईरान का शैडो पावर सेंटर’ बने वाहिदी
पेशे से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल इंजीनियर अहमद वाहिदी ने ईरान की सत्ता में कई अहम पद संभाले. वह ईरान के रक्षा मंत्री, आंतरिक मंत्री, आईआरजीसी डिप्टी कमांडर और अब हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईआरजीसी कमांडर-इन-चीफ की भूमिका में भी उनका असर बढ़ा है.
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में तो उन्हें ‘ईरान का शैडो पावर सेंटर’ तक कहा गया. वाहिदी को कट्टर ‘हार्डलाइनर’ माना जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक वह अमेरिका पर भरोसा नहीं करते, परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के खिलाफ हैं और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं.
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विवादों से भी जुड़ा नाम
वाहिदी का नाम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों में रहा है. अर्जेंटीना ने 1994 के अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में AMIA बमबारी मामले में उन पर आरोप लगाए थे, जिसमें 85 लोगों की मौत हुई थी. इसी वजह से उनके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था. हालांकि, ईरान इन आरोपों को राजनीतिक बताता रहा है. इसी वजह से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने भी उन पर प्रतिबंध लगाए हैं.
महसा अमीनी आंदोलन में भी चर्चा में आए
2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे. उस समय वाहिदी आंतरिक मंत्री थे. मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई की गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक 500 से ज्यादा लोग मारे गए थे. वाहिदी ने उस समय हिजाब विरोधी आंदोलन को ‘विदेशी साजिश’ बताया और उसे कड़ाई से कुचल दिया.
दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से कम दिख रहे हैं. ऐसे में सैन्य नेतृत्व का असर बढ़ गया और वाहिदी उस नेटवर्क के सबसे प्रभावशाली लोगों में गिने जा रहे हैं.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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