सुरक्षा, आर्थिक क्षेत्र में बिम्सटेक के बीच सहयोग बढ़ाने का भारत का आह्वान

ने प्यी ताओ: बिम्सटेक समूह को ‘गतिमान क्षेत्रीय इकाई’ में विकसित की आवश्यकता पर बल देते हुए भारत ने समूह के सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, उर्जा, अर्थव्यवस्था, संपर्क सुविधा तथा आबादी के बीच संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में और अधिक सहयोग का आज अह्वान किया. विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने यहां कहा, ‘‘तीसरे बिम्सटेक […]
ने प्यी ताओ: बिम्सटेक समूह को ‘गतिमान क्षेत्रीय इकाई’ में विकसित की आवश्यकता पर बल देते हुए भारत ने समूह के सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, उर्जा, अर्थव्यवस्था, संपर्क सुविधा तथा आबादी के बीच संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में और अधिक सहयोग का आज अह्वान किया.
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने यहां कहा, ‘‘तीसरे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर हमें इस बात का संतोष है कि कई प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग के मामले में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. लेकिन अभी बहुत कुछ किये जाने की जरुरत है.’’बिम्सटेक की 14वीं मिंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘‘हम भागीदारी को मजबूत करने तथा सहयोग के लिये ढांचागत सुविधाओं के निर्माण तथा ठोस परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की मांग करते हैं. मैं इस बात से खुश हूं कि हम ढाका में बिम्सटेक में स्थायी सचिवालय स्थापित कर रहे हैं, इससे हमारे प्रयासों को प्रभावी तरीके से समन्वय करने में मदद मिलेगी.’’ बे बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी.सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनोमिक कोअपरेशन (बिम्सटेक) 1990 के दशक की भारत की पूर्व की ओर देखो नीति की अभिव्यक्ति है. भारत की यह नीति थाईलैंड की ‘पश्चिम की ओर देखो’ नीति से मेल खाती है.बिम्सटेक के भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमा, भूटान और नेपाल सदस्य हैं.
उन्होंने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण एशिया तथा दक्षिणपूर्व एशिया के बीच अनूठा संपर्क उपलब्ध कराता है. इस संगठन के सदस्य देशों की आबादी 1.5 अरब है जो दुनिया की कुल आबादी का 20 प्रतिशत से अधिक है और संयुक्त रुप से सकल घरेलू उत्पाद 2500 अरब डालर से अधिक है.
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने जोर देकर कहा कि आज के अंतर्संबद्ध तथा अंतर-निर्भर दुनिया में बिम्सटेक देशों में जो सामानताएं हैं, वे सहयोग बढ़ाने के मौके उपलब्ध कराती हैं. उन्होंने बिम्सटेक को ‘गतिमान क्षेत्रीय इकाई’ बनाने का आह्वान किया और पांच प्रमुख क्षेत्रों – सुरक्षा, उर्जा, अर्थव्यवस्था, संपर्क, तथा लोगों के बीच क्षेत्रीय संपर्क को रेखांकित किया.
खुर्शीद ने कहा कि पहला संपर्क है क्योंकि क्षेत्र में अर्थव्यवस्थाओं को दक्ष बनाने तथा पारस्परिक रुप से लाभप्रद आदान-प्रदान को लेकर जरुरी ढांचागत सुविधा की कमी है. विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता भौतिक तथा संस्थागत दोनों तरह की संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने की होनी चाहिए ताकि हमारा क्षेत्र नये युग में आगे बढ़ सके. मुझे खुशी है कि हमारे विशेषज्ञ इस साल मार्च और जून के बीच मिलेंगे और क्रियान्वयन के लिये छांटी गयी परियोजनाओं की सूची को अंतिम रुप देंगे.’’ विदेश मंत्री ने कहा कि इसका कोई कारण नहीं है कि पूर्वोत्तर भारत तथा म्यांमा और थाईलैंड एवं बांग्लादेश तथा भूटान और नेपाल के बीच बेहतर संपर्क नहीं होना चाहिए.उन्होंने कहा, ‘‘हमें तटीय जहाजरानी व्यवस्था तथा अंतर-मोडल परिवहन तथा उन गतिविधियों का पुनरद्धार करने की जरुरत है जो पहले काफी अच्छी थी ताकि वस्तु एवं सेवाओं का प्रवाह आसानी से हो सके.’’
सलमान खुर्शीद ने कहा कि सहयोग का दूसरा प्रमुख क्षेत्र आर्थिक सहयोग है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे वार्ताकार बिम्सटेक एफटीए पर काम कर रहे हैं और इस मामले में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. हमें इसे जितनी जल्दी हो इसे तार्किक परिणति तक पहुंचाना चाहिए ताकि क्षेत्र के लोग एक-दूसरे से लाभान्वित हो सके.’’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘इस बीच हमें सीमा शुल्क सहयोग बढ़ाने, विवाद समाधान प्रणाली को वास्तविक रुप देने तथा उद्योगों के बीच संपर्क बढ़ाने की जरुरत है जो क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा.’’ उन्होंने कहा कि तीसरा प्रमुख क्षेत्र उर्जा है जहां सहयोग की जरुरत है.
खुर्शीद ने कहा, ‘‘आर्थिक विकास का इंजन उर्जा है. हमारे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है और गैस, पनबिजली तथा अक्षय उर्जा स्नेत, ग्रिड अंतर-संपर्क तथा उर्जा नीति पर समन्वय से पारस्परिक रुप से लाभकारी विकास होगा.’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विशेषज्ञ क्षेत्रीय उर्जा नीति तैयार करे और रेखांकित किया कि बेंगलूर में स्थापित बिम्सटेक एनर्जी सेंटर इसमें अहम भूमिका निभा सकता है.
खुर्शीद ने कहा कि चौथा क्षेत्र सुरक्षा है जिस पर बिम्सटेक को ध्यान देने की जरुरत है. उन्होंने इस क्षेत्र में सहयोग का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि पांचवा क्षेत्र लोगों के बीच संपर्क है.विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘यह मजबूत संपर्क है जिसके जरिये हमारा सांस्कृतिक अनुभव साथ आएगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा युवाओं का आदान-प्रदान हो सकेगा तथा नये संपर्क जुड़ेंगे.’’
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