आर्थिक गलियारे की संभावना का अध्ययन करेंगे भारत- चीन

Published at :24 Oct 2013 1:11 PM (IST)
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आर्थिक गलियारे की संभावना का अध्ययन करेंगे भारत- चीन

बीजिंग : भारत और चीन में आपस में एक ऐसे आर्थिक गलियारे की स्थापना की संभावना का अध्ययन करेंगे जो बांग्लादेश व म्यांमा को भी जोड़ेगा.दोनों देशों ने कल यहां जारी एक संयुक्त बयान में कहा है, ‘‘इस आर्थिक गलियारे की अवधारणा तथा मार्ग संयोजन पर आगे विचार विमर्श का प्रस्ताव है. भारत और चीन […]

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बीजिंग : भारत और चीन में आपस में एक ऐसे आर्थिक गलियारे की स्थापना की संभावना का अध्ययन करेंगे जो बांग्लादेश व म्यांमा को भी जोड़ेगा.दोनों देशों ने कल यहां जारी एक संयुक्त बयान में कहा है, ‘‘इस आर्थिक गलियारे की अवधारणा तथा मार्ग संयोजन पर आगे विचार विमर्श का प्रस्ताव है.

भारत और चीन दोनों अन्य पक्षों के साथ इस पहल पर विचार विमर्श जारी रखेंगे. आगामी दिसंबर में बीसीआईएम संयुक्त अध्ययन समूह की पहली बैठक होगी, जिसमें बीसीआईएम आर्थिक गलियारे की स्थापना के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों का अध्ययन किया जाएगा.’’

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग के बीच हुई शीर्ष स्तरीय वार्ता के बाद यह बयान जारी किया गया है. मई में इस बारे में सहमति बनी थी जिसके बाद भारत व चीन दोनों ने बीसीआईएम :बांग्लादेश, चीन, भारत व म्यांमा: आर्थिक गलियारे पर अध्ययन समूह का गठन किया था.बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया है कि भारत व चीन व्यावहारिक सहयोग तथा आपसी लाभ की नीतियों तथा व्यवहार के जरिये आर्थिक सम्पर्कों के एक नए चरण में प्रवेश करने वाले हैं.

बयान में कहा गया है, ‘‘उन्हें उम्मीद है कि नवंबर-दिसंबर, 2013 की रणनीति आर्थिक वार्ता में उन परियोजनाओं व पहलों पर बातचीत होगी, जिन पर व्यापक तौर पर पहले ही सहमति बन चुकी है.’’इसमें कहा गया है कि संयुक्त आर्थिक समूह द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाएगा साथ ही द्विपक्षीय व्यापार में संतुलित वृद्धि को प्रोत्साहित करेगा.

ली के साथ बैठक के बाद सिंह ने कहा कि चीन के प्रधानमंत्री अस्थिर व्यापार संतुलन को लेकर उनके चिंताओं को जानते हैं. दोनों के बीच इस अंतर को पाटने के रास्ते खोजने पर सहमति बनी है. सिंह ने कहा, ‘‘हम भारत में चीन औद्योगिक पार्क के चीन के प्रधानमंत्री ली द्वारा नई दिल्ली में रखे गए विचार को आगे बढ़ाएंगे. ये पार्क भारत में चीन के निवेश के लिए चुंबक के रुप में काम कर सकते हैं. हम दक्षिणी रेशम मार्ग के जरिये दोनों देशों को जोड़ने को बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमा आर्थिक गलियारे की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहे हैं.’’

वित्त वर्ष 2012-13 में चीन को भारत का निर्यात 13.53 अरब डालर व आयात 52.24 अरब डालर रहा. संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों में द्विपक्षीय क्षेत्रीय व्यापार करार :आरटीए: की संभावना पर विचार करने की सहमति बनी है. इसके अलावा वे क्षेत्रीय वृहद आर्थिक भागीदारी :आरसीईपी: पर वार्ता की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे.

इसमें कहा गया है कि दोनों देशों के उपक्रमों को संकुल के रप में विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के करार की रुपरेखा को पूरा करने की प्रक्रिया तेज करने पर सहमति बनी है. बयान में कहा गया है कि बातचीत के संपन्न होने के बाद आर्थिक करारों पर हस्ताक्षर मई, 2013 के बाद हुई प्रगति को दर्शाता है.

बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक महत्व के राजनीतिक व आर्थिक मसलों पर चर्चा की. बैठक में उन मुद्दों पर भी विचार विमर्श हुआ जो संबंधित देशों की वृद्धि व विकास की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं. दोनों नेताओं के बीच विभिन्न वैश्विक मुद्दों मसलन जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, खाद्य एवं उर्जा सुरक्षा आदि पर बहुपक्षीय मंचों ब्रिक्स, जी 20 तथा रुस-भारत-चीन में समन्वय व सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.

बयान में कहा गया है कि दोनों नेता विभिन्न मुद्दों पर नियमित रुप से मिलने के लिए वार्ता तथा तंत्र के प्रोत्साहन के लिए भी सहमत हुए हैं, जिससे एक-दूसरे के हितों व चिंताओं को समझा जा सके.

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