भारत और रुस के पड़ोस से पैदा हो रहा आतंकवाद दोनों देशों के लिए खतरा है : राष्ट्रपति
Updated at : 08 May 2015 7:31 PM (IST)
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मॉस्को : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि रुस और भारत के पडोस से पैदा हो रहा आतंकवाद दोनों देशों की सुरक्षा के लिए खतरा है और इस समस्या से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ठोस प्रतिबद्धता की जरुरत है. रुसी कूटनीतिक अकादमी की ओर से मानद डॉक्ट्रेट डिग्री दिए जाने के बाद […]
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मॉस्को : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि रुस और भारत के पडोस से पैदा हो रहा आतंकवाद दोनों देशों की सुरक्षा के लिए खतरा है और इस समस्या से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ठोस प्रतिबद्धता की जरुरत है. रुसी कूटनीतिक अकादमी की ओर से मानद डॉक्ट्रेट डिग्री दिए जाने के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के इतिहास की मुश्किल घडियों में रुस मजबूती का एक स्तंभ रहा है और मॉस्को नयी दिल्ली का सबसे महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार है और आगे भी बना रहेगा.
प्रणब ने कहा, हमारे साझा पडोस से पैदा हो रहा आतंकवाद और चरमपंथ भारत और रुस की सुरक्षा के लिए खतरा है. उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए न केवल दोनों देशों की ठोस प्रतिबद्धता की जरुरत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच सहयोग भी आवश्यक है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता और बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था की सदस्यता के लिए राष्ट्रपति ने रुस के समर्थन की प्रशंसा की.
उन्होंने सीरिया में राजनीतिक स्थिरता लाने और ईरान के परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में अहम योगदान के लिए रुस के प्रयासों को सराहा. राष्ट्रपति ने कहा, पूरे भारतीय समाज और इसकी राजनीतिक संरचना के फलक में इस बात को लेकर एक मत है कि रुस के साथ दोस्ती भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है.
राष्ट्रपति ने कहा कि 11 दिसंबर 2014 को हुई पिछली भारत-रुस वार्षिक शिखर वार्ता में दोनों देश आने वाले सालों में सहयोग को मजबूत करने और विविधता प्रदान करने के लिए रणनीतिक दृष्टि पर सहमत हुए थे. उन्होंने कहा, भारत रक्षा, परमाणु ऊर्जा एवं सुरक्षा के मुद्दे पर रुस के साथ अपने करीबी और गहन सहयोग को काफी महत्व देता है. रुस हमारा सबसे अहम रक्षा साझेदार है और आगे भी रहेगा.
राष्ट्रपति ने कहा, भारत में परमाणु ऊर्जा विकास में अहम भूमिका निभाकर यह ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भी हमारा अहम साझेदार है. कई स्पष्ट उदाहरण हैं जिनसे हाइड्रोकार्बन में हमारा सहयोग रेखांकित होता है. प्रणब ने कहा कि रुस दुनिया का सबसे बडा तेल एवं गैस उत्पादक है जबकि भारत इसके सबसे बडे उपभोक्ताओं में से एक है. भारत, रुस में सबसे ज्यादा निवेश तेल एवं गैस क्षेत्र में करता है जिसमें काफी इजाफा हो सकता है और यह उभरती आर्थिक साझेदारी का वाहक हो सकता है.
राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देश ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. प्रणब कल विक्टरी डे समारोह में शामिल होने के लिए पांच दिन की रुस यात्रा पर हैं. द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी के खिलाफ रुस की जीत की याद में विक्टरी डे समारोह का आयोजन किया जाता है.
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