मुर्सी ने सेना के अल्टीमेटम को खारिज किया

Updated at :16 Jul 2013 1:55 PM
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मुर्सी ने सेना के अल्टीमेटम को खारिज किया

काहिरा : मिस्र में मौजूदा संकट आज उस वक्त और गहरा गया जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने सेना के 48 घंटे के अल्टीमेटम को खारिज करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने के लिए वह अपनी योजनाएं बनाएंगे. कुर्सी नहीं छोड़ने की जिद पर अड़े मुर्सी लगातार अलग थलग पड़ते नजर […]

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काहिरा : मिस्र में मौजूदा संकट आज उस वक्त और गहरा गया जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने सेना के 48 घंटे के अल्टीमेटम को खारिज करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने के लिए वह अपनी योजनाएं बनाएंगे. कुर्सी नहीं छोड़ने की जिद पर अड़े मुर्सी लगातार अलग थलग पड़ते नजर आ रहे हैं. आज विदेश मंत्री मोहम्मद कामिल अम्र ने इस्तीफा दे दिया. उनके चार मंत्रियों ने कल पद छोड़ा था.

राष्ट्रपति ने लंबे समय से सत्ता पर काबिज हुस्नी मुबारक को अपदस्थ करने वाले 2011 के लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ 25 जनवरी की क्रांति की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक मिस्र में लोकतंत्र की स्थापना है. मिस्र किसी भी हालात में ऐसा कोई कदम उठाने की मंजूरी नहीं देगा जो देश को पीछे की ओर ले जाता हो.’’ मुर्सी से सत्ता छोड़ने की मांग करते हुए लाखों लोगों के सड़कों पर उतर आने के मद्देनजर मिस्र की शक्तिशाली सेना ने चेतावनी दी थी कि प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग यदि 48 घंटे के भीतर नहीं मानी जाती तो वह दखल देगी.

राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि सेना ने अपनी घोषणा स्पष्ट नहीं की. मुर्सी ने ऐसी किसी भी घोषणा की निंदा की जिससे ‘फूट और गहरी’ हो और ‘सामाजिक शांति को खतरा ’ पैदा हो. सेना ने आज यहां जारी नए बयान में कहा कि राजनीतिक ताकतों को सुलह करने और मौजूदा संकट को समाप्त करने के लिए दिया गया उसका 48 घंटों का अल्टीमेटम ‘सत्ता परिवर्तन की चेतावनी’ नहीं है बल्कि इसका मकसद मसले का तेजी से हल ढूंढना है.

विरोधी मुर्सी पर आरोप लगा रहे हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड के हितों को वह देश के हितों से ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. सेना ने फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए बयान में कहा , ‘‘ मिस्र के सैन्य बलों के सिद्धांत उसे सत्ता परिवर्तन की मंजूरी नहीं देते हैं और यह अल्टीमेटम इसलिए जारी किया गया था ताकि राजनेताओं पर गतिरोध का तेजी से समाधान खोजने का दबाव बनाया जाए.’’ सेना ने कहा, ‘‘ सेना न तो शासक है और न ही राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है. वह खुद को दी गई जिम्मेदारी को नहीं छोडेगी.’’

इस बीच सलाफी नूर पार्टी के सहायक महासचिव शाबान अब्देल अलीम ने कहा कि सेना का कल जारी पहला बयान अस्पष्ट है. उन्होंने कहा, ‘‘ हमें सैन्य शासन की वापसी का डर है. समय सीमा पर्याप्त नहीं है.’’ सेना के बयान का स्वागत करते हुए ‘‘तामरोद’’ मुहिम के संस्थापक महमूद बद्र ने कहा,‘‘ हम मिस्र की महान सेना और उसके बयान को सलाम करते हैं.’’ उन्होंने कहा,‘‘ हम सेना को लोकतांत्रिक प्रणाली के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के लिए भी सलाम करते हैं. उसने सत्ता और राजनीति का हिस्सा होने से इनकार कर दिया है.’’

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