कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत-पाक में फिर तूतू-मैंमैं

Updated at : 04 Nov 2014 2:27 PM (IST)
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कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत-पाक में फिर तूतू-मैंमैं

कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कहासुनी हो गयी. भारतीय प्रतिनिधि ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष की बातों को अनापेक्षित टिप्पणियां कहते हुए उन्हें ‘तथ्यात्मक रुप से गलत’ बताया. महासभा की तीसरी समिति की बैठक के बारे में संयुक्त राष्ट्र की एक वेबसाइट पर दी गयी […]

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कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कहासुनी हो गयी. भारतीय प्रतिनिधि ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष की बातों को अनापेक्षित टिप्पणियां कहते हुए उन्हें ‘तथ्यात्मक रुप से गलत’ बताया. महासभा की तीसरी समिति की बैठक के बारे में संयुक्त राष्ट्र की एक वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधि दियार खान ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें अफसोस है कि जम्मू-कश्मीर के लोग आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित रहे हैं.

महासभा की यह तीसरी समिति सामाजिक, मानवीय एवं सांस्कृतिक मुद्दों को देखती है. नस्लवाद, नस्लभेद, विदेशी-द्वेष, आत्मनिर्णय के अधिकार के मुद्दे पर कल आयोजित सत्र में भाग लेते हुए खान ने कहा कि आत्मनिर्णय के अधिकार का इस्तेमाल दबाव या बलप्रयोग से मुक्त वातावरण में किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि विदेशी अधिकार या बाहरी शासन के माहौल में आयोजित चुनावी प्रक्रिया लोगों की असल इच्छाओं को प्रदर्शित नहीं करती. खान ने कहा कि आत्मनिर्णय समय बीतने के साथ खत्म नहीं होता और न ही उसे आतंकवाद के आरोप लगाकर दरकिनार ही किया जा सकता है.

बैठक की जानकारी के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधि मयंक जोशी ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर के बारे में पाकिस्तान की ओर से की गयी अनापेक्षित टिप्पणियां असल में तथ्यात्मक रुप से गलत हैं. उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र में सभी स्तरों पर नियमित रुप से स्वतंत्र, निष्पक्ष और मुक्त चुनाव करवाए गए हैं.

जोशी ने कहा कि भारत एक बहु-धर्मी, बहु-जातीय, और बहु-भाषी समाज है, जो कि सभी तरह के भेदभावों को मिटाने के लक्ष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए पाकिस्तानी समकक्ष ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था.

उन्होंने भारत के इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र घोषित करने वाले कयी प्रस्ताव स्वीकार किए हैं. खान ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के चुनावों को संयुक्त राष्ट्र और कश्मीरी जनता द्वारा खारिज किया जाता रहा है.

प्रस्तावों ने स्पष्ट किया था कि भारतीय प्रशासन द्वारा आयोजित करायी जाने वाली किसी भी निर्वाचन प्रक्रिया को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित कराये जाने वाले निष्पक्ष जनमत संग्रह का विकल्प नहीं हो सकता. जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि जम्मू-कश्मीर चुनाव अंतरराष्ट्रीय मीडिया की समीक्षा के तहत कराये गये और उसने इन चुनावों में कोई त्रुटि नहीं पायी.

दूसरी बार बोलते हुए पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने कहा कि विदेशी अधिकार के तहत कराये गये चुनावों को निष्पक्ष चुनावों का विकल्प नहीं माना जा सकता. जोशी ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की टिप्पणियां संदर्भ से परे हैं.

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