WTO: भारत के कडे रुख के समर्थन में आया संयुक्‍त राष्‍ट्र एजेंसी

Published at :04 Aug 2014 6:26 PM (IST)
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WTO: भारत के कडे रुख के समर्थन में आया संयुक्‍त राष्‍ट्र एजेंसी

नयी दिल्‍ली: विश्‍व व्‍यापार संगठन में भारत के कडे रुख का समर्थन संयुक्‍त राष्‍ट्र के एक एजेंसी आईफैड ने किया है. खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के रुख का समर्थन करते हुये कृषि विकास पर संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी आईफैड ने सोमवार को कहा कि कुछ देशों में […]

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नयी दिल्‍ली: विश्‍व व्‍यापार संगठन में भारत के कडे रुख का समर्थन संयुक्‍त राष्‍ट्र के एक एजेंसी आईफैड ने किया है. खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के रुख का समर्थन करते हुये कृषि विकास पर संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी आईफैड ने सोमवार को कहा कि कुछ देशों में रोजगार के अवसर बढाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि अपने यहां लोगों के लिये खाद्यान्न की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये.

कृषि विकास के लिये अंतरराष्ट्रीय कोष (आईफैड) के अध्यक्ष कानायो वांजे ने कहा, ‘अपने लोगों को भूखा रखकर, दूसरे देशों के लिये रोजगार के अवसर बढाने के लिये काम करना बुद्धिमानी नहीं है. यदि मैं अपने पूरे परिवार को भोजन उपलब्ध कराने अथवा किसी दूसरे के लिये रोजगार के अवसर पैदा करने की स्थिति में हूं, तब ऐसी स्थिति में मैं क्या करुंगा? आप क्या करेंगे?’

डब्ल्यूटीओ में भारत के कडे रुख के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ‘ मूल बात यह है कि हर सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने लोगों के लिये खाद्यान्न की व्यवस्था करे.’ आईफैड के भारत में निदेशक नीजेल ब्रेट ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि भारत पर अपने लोगों के लिये खाद्यान्न की व्यवस्था करना बडी जिम्मेदारी का काम है.’

आपके देश में 1.2 अरब लोगों की जनसंख्या है. इतने लोगों को भोजन के लिये अनाज की व्यवस्था करना बडा काम है. ऐसे में सरकार को अपने लोगों के लिये भोजन की व्यवस्था के लिये हर संभव प्रयास करना चाहिये.’ भारत ने पिछले सप्ताह डब्ल्यूटीओ के व्यापार सरलीकरण समझौते (एफटीए) की पुष्टि नहीं की. यह समझौता विकसित देशों के हित में था पर डब्ल्यूटीओ समझौते में भारत की खाद्य सुरक्षा चिंताओं के बारे में कोई स्थायी समाधान की बात छोड दी गयी थी. भारत ने कहा है कि वह एफटीए के खिलाफ नहीं है पर इसके साथ खाद्य सुरक्षा की छूट का समझौता भी होना चहिए.

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