West Bengal News: रिटायरमेंट के रुपयों से गांव में बनाया पुस्तकालय, किया पिता के सपने को पूरा

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वर्ष 2021 में अनूप नौकरी से रिटायर हुए. इस समय कोविड के कारण पूरे देश में लॉकडाउन का दौर था. रिटायरमेंट के बाद अनूप ने अपनी मां और बड़े भाई से गांव में पुस्तकालय बनाने की इच्छा जाहिर की.

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हावड़ा.

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दिवंगत पिता के एक पुस्तकालय बनाने के सपनों को बेटे ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली अपने पूरे जीवन की कमाई से पूरा किया है. बेटे की इस कोशिश से पूरा गांव गौरवान्वित है. मामला बागनान थाना अंतर्गत खानपुर इलाके की है. पिछले दिनों इस पुस्तकालय का उद्घाटन कर दिया गया. इस पुस्तकालय की देखरेख के लिए एक समिति भी बनायी गयी है. इस समिति में गांव के विद्यार्थियों को रखा गया है. पुस्तकालय खुलने से उत्साहित लोग पुस्तक खरीदने के लिए बहुत जल्द कोलकाता आयेंगे. फिलहाल हर दिन सुबह दो घंटे तक यह पुस्तकालय खुला रहेगा.

बागनान के खानपुर गांव में तारापद सातरा रहते थे. वह किसान थे. कम पढ़े लिखे होने के बावजूद उन्हें पढ़ाई में बहुत रूचि थी. वह विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया करते थे. वह विद्यार्थियों के लिए कुछ करना चाहते थे. उन्होंने विद्यार्थियों के लिए गांव में एक पुस्तकालय खोलने का मन बनाया. वर्ष 1975 में ग्रामीणों के सहयोग से उन्होंने एक मिट्टी के घर का एक पुस्तकालय बनाया. पुस्तकालय में विद्यार्थियों की भीड़ जुटने लगी. इसी बीच वर्ष 1978 में बंगाल में भयावह बाढ़ आयी थी. इस बाढ़ की चपेट में पूरा हावड़ा जिला भी आया था. बताया जाता है कि यह मिट्टी के घर से बना यह पुस्तकालय पूरी तरह ढह गया. इसके बाद यह नहीं बन सका. तारापद ने काफी कोशिश की थी.

लेकिन आर्थिक तंगी और इसी तंगी के बीच बच्चों की परवरिश और पढ़ाई के कारण उनका यह सपना अधूरा ही रह गया. वर्ष 1990 में उम्रजनित बीमारियों के कारण उनकी मौत हो गयी. परिजन बताते है कि पुस्तकालय नहीं बनाने का मलाल उन्हें काफी था. इसी दौरान उनके मझले बेटे अनूप सातरा की नौकरी रेलवे में लग गयी. नौकरी के सिलसिले में अनूप को गांव छोड़ना पड़ा. वह हावड़ा के रामराजातला में रहने लगे. अपने दिवंगत पिता के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य अनूप ने बहुत पहले ही तय कर लिया था.

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वर्ष 2021 में अनूप नौकरी से रिटायर हुए. इस समय कोविड के कारण पूरे देश में लॉकडाउन का दौर था. रिटायरमेंट के बाद अनूप ने अपनी मां और बड़े भाई से गांव में पुस्तकालय बनाने की इच्छा जाहिर की. सभी राजी हुए. ग्रामीणों के पास अनूप ने पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव रखा. ग्रामीण भी मान गये. इसके बाद अनूप ने 20 लाख रुपये खर्च कर अपने गांव में एक नया पुस्तकालय बनाया, जिसका उद्घाटन 22 अप्रैल को कर दिया गया.

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